कश्मीर में मासूमों के कत्ल पर राष्ट्रपति क्यों चुप, भीमसिंह ने उठाया सवाल

नई दिल्ली। नेशनल पैंथर्स पार्टी के संस्थापक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता प्रो.भीमसिंह ने कश्मीर में मासूम पुलिसकर्मियों के कत्लेआम पर भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की चुप्पी पर सवाल किया कि भारतीय संविधान की धारा 370 के अन्तर्गत राष्ट्रपति को पूरा कानूनी अधिकार दिया गया है कि वे जम्मू-कश्मीर के मासूम लोगों के बचाव के लिए कभी भी राज्यपाल शासन लगा सकते हैं और राष्ट्रपति को यह भी कानूनी अधिकार है कि वे जम्मू-कश्मीर विधानसभा को तुरंत भंग करने के लिए वहां के राज्यपाल को आदेश दे सकते हैं। यह कानून राष्ट्रपति को जम्मू-कश्मीर के संविधान की धारा 53 अन्तर्गत जम्मू-कश्मीर विधानसभा को भंग कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का संविधान यह भी कहता है कि जम्मू-कश्मीर में मानव अधिकारों की रक्षा के लिए राष्ट्रपति वहां की सरकार को तुरंत भंग कर सकते हैं।

प्रो.भीमसिंह के राजनीतिक सचिव सुदेश डोगरा ने कहा,

“प्रो.भीमसिंह जो 15 साल जम्मू-कश्मीर में विधायक और विधानपरिषद के सदस्य भी रहे, जम्मू-कश्मीर में मानव अधिकारों के लिए 50 साल से सरकार के खिलाफ कानूनी युद्ध करते हैं। जब जम्मू-कश्मीर सरकार ने पैंथर्स पार्टी कार्यकर्ताओं पर पुलिस द्वारा हमले करवाए, मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और कुछ महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने पैंथर्स पार्टी की महासचिव सुश्री अनीता ठाकुर को दो लाख रुपये सरकार से मुआवजा दिलवाया, यह घटना 7 अगस्त, 2007 की है, इसी दिन पैंथर्स पार्टी के सचिव श्री हरिचंद जलमेरिया और उपाध्यक्ष श्री प्रद्यूमन कृष्ण गंजू को एक-एक लाख मुआवजा मिला। यह तीनों सामाजिक कार्यकर्ता थे और मानवाधिकारों की लड़ाई लड़ते आये हैं। ये लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शत करते हुए जम्मू प्रदेश के विस्थापितों को पैदल रियासी से संसद तक ले जा रहे हैं। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि उस समय के जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री श्री गुलाम नबी आजाद थे और पैंथर्स पार्टी का सरकार के साथ सही तालमेल था।

कांग्रेस ने जम्मू के लोगों के साथ वहीं व्यवहार किया जो नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी और बाकी हुक्मरान टोले व्यवहार करते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से भारत के सभी नेताओं को सबक सीखना जरूरी है कि जम्मू-कश्मीर के न्याय मांगने वाले लोगों के साथ क्या-क्या बदसलूकी होती रही या हो रही है।“

प्रो.भीमसिंह ने कहा कि श्रीनगर अस्पताल में 6 फरवरी, 2018 को पुलिस कांस्टेबल मुस्ताक अहमद और बाबर अहमद को किन हालात में शहीद कर दिया गया और महबूबा मुफ्ती और आरएसस की सरकार का अपनी ड्यटी पर शहीद होने पुलिसकर्मियों के बारे में क्यों खामोश रही। प्रो.भीमसिंह ने घोषणा की है कि जो पुलिसकर्मी पीडीपी-आरएसएस सरकार के दौरान शहीद हुए हैं, उनको परिवारों को पैंथर्स पार्टी उचित सहायता प्रदान करेगी। प्रो.भीमसिंह ने उसी दिन सोपोर में चार पुलिसकर्मियों की शहादत पर भी गहरा दुख प्रकट करते हुए भारत के राष्ट्रपति से पुरजोर अपील की है कि जम्मू-कश्मीर में गैरकानूनी सरकार को बर्खास्त कर दिया जाय, जम्मू-कश्मीर में तुरंत राज्यपाल शासल लागू कर दिया जाय और हजारों जेलों में बंद मासूम नागरिकों को जेलों से रिहा किया जाय। प्रो.भीमसिंह ने सोपोर में धमाकें में शहीद होने वाले पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी, जिनमें डोडा इरसाद अहमद, एएसआई, गुलाम नबी, मोहम्मद अमीन और परवेज अहमद भी शामिल हैं।

प्रो.भीमसिंह ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की खामोशी पर आश्चर्य प्रकट करते हुए उनसे भी यह उम्मीद जाहिर की है कि वे भी जम्मू-कश्मीर में न्याय और अधिकार के लिए युद्ध करने वाले लोगों की आवाज सुनेंगे और वर्तमान सरकार को बर्खास्त करके राज्यपाल शासन लागू करेंगे।

 

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