डीएम ने खोला राज कौन करता है दंगे ? सरकार की धमकी के बाद पोस्ट गायब... गलियों में कौन खोज रहा है DM को ?

ट्रोल होने और सरकार की अप्रत्यक्ष धमकी (नसीहत) के बाद डीएम साहेब को भी अप्रत्याशित भय सताने लगा। क्या जज लोया मिसाल बनते जा रहे हैं।...

हाइलाइट्स

सरकार की अप्रत्यक्ष धमकी के बाद श्री सिंह ने आज दोपहर फिर एक बार पोस्ट करके विवाद से माफी मांगी।

त्तर प्रदेश के कासगंज में हुई साम्पद्रायिक हिंसा के बीच बरेली के जिलाधिकारी राघवेन्द्र विक्रम सिंह की सोशल मीडिया पर आई एक पोस्ट ने एक नई बहस शुरु कर दी है।

उत्तर प्रदेश के बरेली में जिलाधिकारी पद पर तैनात आईएएस राघवेंद्र विक्रम सिंह ने लिखा था कि, समाज में इस तरह के बेवजह विवाद खड़े करने का रिवाज बन चुका है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर लिखा कि,

अजब रिवाज बन गया है, मुस्लिम मौहल्लों में ज़बरदस्ती जलूस ले जाओ और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाओ, क्यों भाई वे पकिस्तानी हैं क्या ? यही यहां बरेली में खैलम में हुआ था। फिर पथराव हुआ, मुकदमे लिखे गए …”

सिंह की इस पोस्ट पर प्रतिक्रियायें आनी शुरु हो गयी हैं।

देशबन्धु में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक श्री सिंह ने कहा कि उन्होंने किसी की भावना को आहत करने के लिये यह नहीं लिखा था, बल्कि उनका आशय था कि ऐसे कार्यो से कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है। प्रशासन के साथ जनता भी परेशान होती है। विकास कार्य बाधित होते हैं।

देशबन्धु में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक राज्य सरकार ने श्री सिंह के बयान को गम्भीरता से लिया है। राज्य सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा कि अधिकारियों को स्थिति ठीक करने में अपनी ऊर्जा लगानी चाहिये, बयानबाजी से बचना चाहिये। सोशल मीडिया के जरिये बयान देना गलत है। स्थिति ठीक करने में सहयोग करें।

उनकी यह पोस्ट मीडिया में सुर्खी बनी तो अब यह पोस्ट उनकी फेसबुक टाइमलाइन पर दिख नहीं रही, लगता है ट्रोल होने और सरकार की अप्रत्यक्ष धमकी (नसीहत) के बाद डीएम साहेब को भी अप्रत्याशित भय सताने लगा। क्या जज लोया मिसाल बनते जा रहे हैं।

उन्होंने एक अन्य पोस्ट में इशारा दिया –

'कोई गलियों में तुम्हे खोज रहा है शायद

जाओ सो जाओ ज़माना बड़ा ज़ज्बाती है.'

सरकार की अप्रत्यक्ष धमकी के बाद श्री सिंह ने आज दोपहर फिर एक बार पोस्ट करके विवाद से माफी मांगी। उन्होंने फेसबुक पर लिखा –

“हमारी पोस्ट बरेली में कांवर यात्रा के दौरान आई Law n order की समस्या से सम्बंधित थी. I had hoped there will be academic discission but unfortunately it had taken a different turn . Extremely sad .हम आपस में चर्चा इस लिए करते हैं कि हम बेहतर हो सकें। ऐसा लगता है कि इस से बहुत से लोगों को आपत्ति भी है और तकलीफ भी। हमारी मंशा कोई कष्ट देने की नही थी। सांप्रदायिक माहौल सुधारना प्रशासनिक एवं नैतिक ज़िम्मेदारी है हम लोगों की। हमारे मुस्लिम हमारे भाई हैं.. हमारे ही रक्त.. DNA एक ही है हमारा। हमें उन्हें वापस लाना नहीं आया। इस पर फिर कभी... एकीकरण व समरसता के भाव को ज़ितनी जल्दी हम समझें उतना बेहतर है देश के लिए हमारे प्रदेश हमारे जनपद के लिए। पाकिस्तान शत्रु है ...इसमे कोई सन्देह नही। हमारे मुस्लिम हमारे हैं.. इसमें भी कोई संदेह नहीं। मैं चाहता हूँ यह विवाद खत्म हो। I do apologise if our freinds न brothers r pained because of me .”

डीएम साहब भी पढ़ ले ये नज़्म, आगे काम आएगी क्योंकि अब सच बोलना गुनाह है

“उसके दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा

वो भी मेरी तरह शहर में तनहा होगा

इतना सच बोल कि होठों का तबस्सुम न बुझे

रोशनी ख़त्म न कर आगे अँधेरा होगा

प्यास जिस नहर से टकरायी वो बंजर निकली

जिसको पीछे कहीं छोड़ आये वो दरिया होगा

एक महफ़िल में कई महफ़िलें होती हैं शरीक

जिसको भी पास से देखोगे अकेला होगा

मेरे बारे में कोई राय तो होगी उसकी

उसने मुझको भी कभी तोड़ के देखा होगा”

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