बहादुरशाह ज़फर के अवशेष रंगून से वापस लाये जाएं - सोशलिस्ट पार्टी

अंग्रेजों ने बादशाह पर फौजी आदालत में मुकदमा चलाया और अक्तूबर 1858 में उन्हें कैद में दिल्ली से रंगून भेज दिया। वहां 7 नवंबर 1862 को 87 साल की उम्र में उनकी मृत्यु हुई ...

बहादुरशाह ज़फर के अवशेष रंगून से वापस लाये जाएं - सोशलिस्ट पार्टी

नई दिल्ली। इस 10 मई को 1857 की क्रांति यानी भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की 161वीं सालगिरह है. 10 मई 1857 को भारत के जांबाज़ सैनिकों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका था. देश को गुलामी की जंजीरों से आजाद कराने के मकसद से वे मेरठ से 10 मई को चलकर 11 मई को दिल्ली पहुंचे और बादशाह बहादुरशाह जफर से आजादी की जंग का नेतृत्व करने का निवेदन किया. बादशाह ने सैनिकों और उनके साथ जुटे नागरिकों की पेशकश का मान रखा और 82 साल की उम्र में आजादी की पहली जंग का नेतृत्व स्वीकार किया. भारत की आजादी के संघर्ष और सम्मिलित हिंदू-मुस्लिम विरासत का वह महान दिन था.  कई कारणों से सैनिक वह जंग जीत नहीं पाए, जिनमें कुछ भारतीयों द्वारा की गई गद्दारी भी शामिल है. दिल्ली में करीब 6 महीने और बाकी देश में साल भर से ऊपर चले पहले स्वतंत्रता संग्राम में लाखों की संख्या में सैनिक और असैनिक भारतीय वीरगति को प्राप्त हुए.  अंग्रेजों ने बादशाह पर फौजी आदालत में मुकदमा चलाया और अक्तूबर 1858 में उन्हें कैद में दिल्ली से रंगून भेज दिया। वहां 7 नवंबर 1862 को 87 साल की उम्र में उनकी मृत्यु हुई और ‘बदनसीब जफर’ को वहीं गुमनामी के अंधेरे में दफना दिया गया.

सोशलिस्ट पार्टी पहली जंगे आजादी के महान नेता, उस जमाने के धर्मनिरपेक्ष शासक और अपनी तरह के बेहतरीन शायर बहादुरशाह जफर के अवशेष वापस लाने की मांग भारत के राष्ट्रपति से 2013 में कर चुकी है. पार्टी ने इस बाबत राष्ट्रपति महोदय को ज्ञापन दिया था. सोशलिस्ट पार्टी के वरिष्‍ठ सदस्‍य जस्टिस राजेंद्र सच्‍चर ने राष्ट्रपति से मुलाकात करके प्रार्थना की थी कि वे बादशाह के अवशेष वापस भारत लाने के लिए सरकार से कहें. पिछले साल, पहली जंगे आज़ादी की 160वीं सालगिरह पर सोशलिस्ट पार्टी के अध्यक्ष डॉक्टर प्रेम सिंह ने एक बार फिर राष्ट्रपति को वह ज्ञापन भेज कर अपील की कि वे अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों में ज़फ़र के अवशेष वापस लाने का जरूरी काम करें.

सोशलिस्ट पार्टी प्रवक्ता डॉ. अभिजीत वैद्य ने कहा कि अपने प्रयास की निरंतरता में सोशलिस्ट पार्टी ने देश के वर्तमान राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद को ज्ञापन देकर यह मांग पूरी करने का निवेदन किया है. सोशलिस्ट पार्टी का मानना है कि इससे देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की सम्मिलित विरासत का सम्मान होगा और वह मज़बूत होगी.   

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