सवर्णों को आरक्षण का फैसला जुमला नहीं;संविधान, सामाजिक न्याय व बहुजनों पर बड़ा हमला!

आर्थिक आधार पर सवर्णों को 10% आरक्षण (10% Reservation to Upper castes on Economic Basis) देने के केन्द्र सरकार के फैसले के खिलाफ भागलपुर स्टेशन चौक (Bhagalpur Station Chowk) पर जोरदार प्रतिवाद प्रर्दश...

भागलपुर। आर्थिक आधार पर सवर्णों को 10% आरक्षण (10% Reservation to Upper castes on Economic Basis) देने के केन्द्र सरकार के फैसले के खिलाफ भागलपुर स्टेशन चौक (Bhagalpur Station Chowk) पर जोरदार प्रतिवाद प्रर्दशन हुआ. इस मौके पर सामाजिक न्याय आंदोलन (Social justice movement), बिहार के कोर कमिटी सदस्य रिंकु यादव और Ramanand Paswan Paswan ने कहा कि सवर्णों को 10% आरक्षण देने का केन्द्र सरकार का फैसला संविधान विरोधी (Anti-constitutional decision) है. यह जुमला नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और बहुजनों पर बड़ा हमला है. इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है.

सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार के कोर कमिटी सदस्य अर्जुन शर्मा और बिहार फुले-अंबेडकर युवा मंच के Ajay Kumar Ram ने कहा कि सवर्णों को आरक्षण देकर केन्द्र सरकार बहुजनों के आरक्षण पर हमला (Attack on the reservation of the Bahujans) बोल रही है. सत्ता व शासन की संस्थाओं में पहले से ही सवर्णों की भागीदारी आबादी के अनुपात से कई गुणा ज्यादा है. इसलिए सवर्णों को आरक्षण देना सत्ता-शासन की संस्थाओं में उसके वर्चस्व को बनाये रखने की गारंटी की कोशिश है. इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है.

सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार की कोर कमिटी सदस्य अंजनी और बिहार फूले-अंबेडकर युवा मंच के अंश देव निराला ने कहा कि आरक्षण गरीबी उन्मूलन व रोजगार गारंटी कार्यक्रम नहीं है. यह तो दलितों-पिछड़ों व आदिवासियों का सत्ता-शासन व शैक्षणिक संस्थाओं में भागीदारी व प्रतिनिधित्व की संवैधानिक व्यवस्था है. इसलिए सवर्णों को आरक्षण देना कहीं से उचित नहीं है.

न्याय मंच के Sonam Kumar और पीएसओ के Mithilesh Bishwas ने कहा कि सवर्णों के साथ संपूर्ण समाज से गरीबी उन्मूलन के लिए आर्थिक विषमता बढ़ानेवाली और पूंजीपति पक्षधर नई आर्थिक नीति का खात्मा जरूरी है.गरीबी उन्मूलन का जवाब आरक्षण नहीं है.

सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार की कोर कमिटी सदस्य Abhishek Anand और पीएसओ के Bibhuti Kumar ने कहा कि केन्द्र सरकार यह फैसला घोर मनुवादी है. बहुजन विरोधी है. सबसे पहले तो बहुजनों को सभी क्षेत्रों में संख्यानुपात में प्रतिनिधित्व की गारंटी के लिए आरक्षण की सीमा 50% से बढ़ाकर कम से कम 69% करने की जरूरत है. निजी क्षेत्र सहित न्यायपालिका व अन्य क्षेत्रों में आरक्षण की गारंटी करने की जरूरत है. लेकिन केन्द्र सरकार बहुजनों के खिलाफ सवर्णों के पक्ष में खड़ा होकर सामाजिक न्याय पर हमला कर रही है और सवर्णों को ही आरक्षण दे रही है.

महेश अंबेडकर और विजय कुमार दास ने कहा कि सवर्ण आरक्षण के पक्ष में खड़े बहुजन नेताओं को बहुजन समाज माफ नहीं करेगा. मनुवादी शक्तियों के इन दलालों को भी सबक सिखाया जाएगा.

Rajesh Roshan और नंदकिशोर ने कहा कि कांग्रेस और आप जैसी पार्टियों ने भी अपना मनुवादी चरित्र सामने ला दिया है. भाजपा के विपक्ष में सामाजिक न्याय पक्षधर होने का दावा करनेवाली पार्टियां भी सवर्णों को आरक्षण देने के मसले पर गोल-मटोल बात कर रही है. जो भी सामाजिक न्याय व बहुजनों के पक्ष में हैं, उन्हें खुलेतौर पर सवर्णों के आरक्षण का विरोध करना होगा.

मौके मौजूद थे - संजीव,प्रकाश पासवान, अनिल लकड़ा, कैलाश, मनोज कुमार दास, छब्बू कुमार, सुरेश दास, सीताराम दास,छोटू कुमार, श्रृषि दास, राजेश दास, सौरभ राणा, सुधांशु, सार्थक भरत सहित दर्जनों.

क्या यह ख़बर/ लेख आपको पसंद आया ? कृपया कमेंट बॉक्स में कमेंट भी करें और शेयर भी करें ताकि ज्यादा लोगों तक बात पहुंचे

कृपया हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब करें

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।