केन्द्र सरकार की पदोन्नति में आरक्षण देने की कोशिशों के विरोध में 17 जून को लखनऊ में चेतावनी दौड़

देश भर में सभी प्रांतों की राजधानियों में विरोध प्रदर्शन की तैयारी चेतावनी दौड़ का नेतृत्व भारतीय वायु सेना के 80 वर्षीय सेवानिवृत्त एयर मार्शल  करेंगे...

केन्द्र सरकार की पदोन्नति में आरक्षण देने की कोशिशों के विरोध में 17 जून को लखनऊ में चेतावनी दौड़

देश भर में सभी प्रांतों की राजधानियों में विरोध प्रदर्शन की तैयारी

चेतावनी दौड़ का नेतृत्व भारतीय वायु सेना के 80 वर्षीय सेवानिवृत्त एयर मार्शल  करेंगे

लखनऊ, 15 जून। केन्द्र सरकार की पदोन्नति में आरक्षण देने की कोशिशों के विरोध में सर्वजन हिताय संरक्षण समिति , उप्र द्वारा 17 जून को लखनऊ में चेतावनी दौड़  आयोजित की गयी है।  समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि पदोन्नति में आरक्षण के विरोध में देश भर में सभी प्रांतों की राजधानियों में विरोध प्रदर्शन किये जाएंगे और काला दिवस मनाया जाएगा। लखनऊ में 17 जून को प्रातः 06 बजे गोमतीनगर स्थित 1090 चौराहा से  राजीव चौक  तक चेतावनी दौड़ होगी। लखनऊ में चेतावनी दौड़ का नेतृत्व भारतीय वायु सेना के 80 वर्षीय सेवानिवृत्त एयर मार्शल श्री आर के दीक्षित करेंगे।

सर्वजन हिताय संरक्षण समिति, उप्र ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय की नौ जजों की संविधान पीठ ने इन्द्रा साहनी मुकदमे में 1992 में स्पष्ट निर्णय दिया था कि पदोन्नति में आरक्षण पूरी तरह असंवैधानिक है। इसी के बाद वोट की सस्ती राजनीति के चलते 17 जून 1995 को संविधान संशोधन कर पदोन्नति में आरक्षण लागू किया गया था। इसीलिये 17 जून को देशव्यापी विरोध कर काला दिवस मनाया जा रहा है। इसी क्रम में लखनऊ में चेतावनी दौड़ आयोजित की गई है।

समिति ने चेतावनी दी है कि यदि 05 जून के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की गलत व्याख्या कर पदोन्नति में आरक्षण लागू करने की कोशिश की गई तो इसका प्रबल विरोध किया जाएगा और राष्ट्रव्यापी आन्दोलन होगा।

समिति की आज यहां हुई सभा में प्रदेश के अनेक सरकारी विभागों व निगमों के कर्मचारी-अधिकारी व शिक्षक बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए और केन्द्र सरकार द्वारा पदोन्नति में आरक्षण लागू करने की कोशिशों के प्रति आक्रोश व्यक्त किया।

समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद उप्र, राजस्थान और कर्नाटक में पदोन्नति में आरक्षण समाप्त हो चुका है और आरक्षण का लाभ पाकर पदोन्नति पाये कनिष्ठ कार्मिक पदावनत किए जा चुके है। 05 जून को सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस सम्बन्ध में जारी आदेश को लेकर अनावश्यक भ्रम फैलाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में केवल यह कहा है कि सरकार कानून के अनुसार पदोन्नति कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने एम नागराज मामले में निर्णय दिया है कि पदोन्नति में आरक्षण देने के पहले संख्यात्मक आकड़े देखकर, नौकरियों में समुचित प्रतिनिधित्व व प्रशासनिक दक्षता पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े यह प्रमाणित करना होगा। 05 जून के निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने एम नागराज के निर्णय को बरकरार रखा है ऐसे में यही आज का कानून है जिसके चलते देश में कहीं भी पदोन्नति में आरक्षण नहीं दिया जा सकता है।

समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और बताना चाहिए कि केन्द्र व प्रदेश सरकार पदोन्नति में आरक्षण के पक्ष में है या नहीं। समिति ने भाजपा व कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों से भी इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

समिति की आज यहां हुई सभा में यह निर्णय लिया गया कि 17 जून,2018 से पदोन्नति में आरक्षण के विरोध में ज्ञापन दो अभियान चलाया जायेगा। ज्ञापन दो अभियान के तहत सभी सांसदों व विधायकों को ज्ञापन देकर मांग की जायेगी कि वे सार्वजनिक तौर पर यह घोषणा करें कि वे पदोन्नति में आरक्षण का विरोध करेंगे अन्यथा देश की तीन करोड़ कर्मचारी, अधिकारी व शिक्षक वोट की राजनीति का आने वाले लोकसभा चुनाव में वोट से करारा जवाब देंगे।

समिति की आम सभा में शैलेन्द्र दुबे, ए ए फारूकी, एच एन पाण्डेय, राजीव सिंह, राम प्रकाश, एस एस निरंजन, अजय तिवारी, रीना त्रिपाठी, राजीव श्रीवास्तव, प्रताप चन्द्र, ए पी सिंह, एस पी त्रिपाठी, विनोद राय, सुनील कुमार, आर बी एल यादव, शिव प्रकाश दीक्षित, अश्वनी उपाध्याय, देवेन्द्र द्विवेदी, आर के पाण्डेय मुख्यतया उपस्थित थे।

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