महोबा से लखनऊ तक पहुंचा रोटी बैंक

रोटी बैंक का उद्देश्य है कि, शहर के हर गरीब-बेबस को तक कम से कम एक वक्त का खाना पहुंचे और किसी को भी भूखे पेट न सोना पड़े।...

देशबन्धु
हाइलाइट्स
  • गोमतीनगर विस्‍तार के कुछ समाज सेवियों ने शुरू किया है राजधानी में गरीबों का पेट भरने का अभिनव प्रयास
  • रोटियां जुटाने के लिए आधुनिक मीडिया का भी किया जा रहा इस्‍तेमाल

लखनऊ 30 जून। दुनिया के हर जीव का भूख से रिश्‍ता होता है। अगर पेट न भरे तो जीवन चल नहीं सकता। देश भर में अब भी लाखों लोग हैं जो भूखे पेट सोते हैं लेकिन समाज में बहुत कम लोग हैं जो इस पीड़ा को भांप पाते हैं। जिन कुछ लोगों ने गरीबों की इस समस्‍या को महसूस किया, वह नए तरीके से उनका पेट भरने की कोशिश में जुट गए। पहल बुंदेलखंड के महोबा से हुई जहां घर घर जाकर बची हुई रोटियां मांगकर रोटी बैंक की स्‍थापना की गई।

महोबा निवासी तारा पाटकर और उनके कुछ साथियों ने पिछले साल रोटी बैंक की शुरुआत की थी जो अब और जगहों से होते हुए राजधानी लखनऊ तक पहुंची है।

समाज के गरीब लोगों का पेट भरने के लिए रोटी बैंक की शुरुआत यहां ओमेक्‍स अपार्टमेंट गोमतीनगर विस्तार में रहने वाले आशुतोष चौबे, पिंकी गोस्वामी और शोभा ठाकुर ने की है।

इन लोगों ने देखा कि कालोनी के हर घर में रोज खाने का कुछ न कुछ सामान बच जाता है जो कि निष्प्रयोज्य रह जाता है। इसे देखते हुए इन्होनें तय किया कि वे इस भोजन को घर-घर जाकर इकठ्ठा करेंगे और जरुरतमंदों तक पहुंचाएंगे। इस तरह तीन माह पूर्व गरीबी के मारे और बेबस लोगों की भूख मिटाने के लिए पहल करते हुए ‘रोटी बैंक’ की स्थापना की गई। घर-घर जाकर खाना इकठ्ठा करके बस्तियों में गरीबों तक पहुंचाना शुरु किया। धीरे-धीरे इस मुहिम को कालोनी के दूसरे निवासियों का सहयोग मिलना भी आरम्भ हो गया और आज यह ओमेक्स आर-1 के लोगों की दिनचर्या का एक नियमित हिस्सा बन चुका है।

रोटी बैंक के सदस्य आशुतोष चौबे बताते हैं कि, इस काम में अब शहर के अन्य हिस्सों से भी लोग जुड़ रहे हैं जिसमें सोशल मीडिया फेसबुक, ट्वीटर, इंस्टाग्राम आदि के जरिए भी लोग इस रोटी बैंक से जुड़ रहे हैं।

लोगों से ज्यादा से ज्यादा तादाद में साथ आने का आग्रह करते हुए आशुतोष कहते हैं कि, इस काम से जहां भूखे पेट को भोजन मिलेगा वहीं इस काम में सहयोग करने वाले को मानसिक शांति और गरीबों की दुवाएं मिलती है।

उन्होंने कहा कि, रोटी बैंक का उद्देश्य है कि, शहर के हर गरीब-बेबस को तक कम से कम एक वक्त का खाना पहुंचे और किसी को भी भूखे पेट न सोना पड़े।

आशुतोष बताते हैं कि, रोटी बैंक की ही तरह जल्दी ही कपड़ा बैंक भी आरम्भ किया जाएगा जिससे जरूरतमंदों की दो मूल आवश्यकताओं रोटी और कपड़ा की पूर्ति हो सकेगी।

 रोटी बैंक की एक अन्य सदस्य पिंकी गोस्वामी आगे की योजनाओं के बारे में बताती हैं कि, उन्हें इस बात की हार्दिक प्रसंन्नता है कि, राटी बैंक तीन महीनों के छोटे से अंतराल में ही ओमेक्स के साथ ही अब अंसल और राजाजीपुरम से भी प्रारम्भ होने जा रहा है। जल्दी ही इसका विस्तार शहर के अन्य हिस्सों में भी किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि, हमारा प्रयास है कि, शहर के हर कोने में एक रोटी बैंक की स्थापना हो जाए।

शोभा ठाकुर कहती हैं कि, आज के समय में हर घर में ही खाने का सामान बच जाता है अगर वह भोजन हमें मिल जाए तो शहर में कोई भी भूखा नहीं रह सकता।

 

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