आरएसएस-भाजपा कर रही आदिवासियों का आखेट, 29 नवम्बर को दिल्ली कूच करेंगे आदिवासी-वनाश्रित - दारापुरी

वनाधिकार पर हाईकोर्ट के फैसले का अनुपालन कराए प्रशासन...

आरएसएस-भाजपा कर रही आदिवासियों का आखेट, 29 नवम्बर को दिल्ली कूच करेंगे आदिवासी-वनाश्रित - दारापुरी

पूर्व आई जी, उ प्र पुलिस और स्वराज अभियान के नेता एस आर दारापुरी की पत्रकार वार्ता

भाजपा सरकारों ने किया वनाधिकार कानून को विफल

29 नवम्बर को दिल्ली कूच करेंगे आदिवासी-वनाश्रित

वनाधिकार पर हाईकोर्ट के फैसले का अनुपालन कराए प्रशासन

सोनभद्र, 30 अक्टूबर 2018, आरएसएस के राजनीतिक संगठन भाजपा की केन्द्र व राज्य सरकार आदिवासियों और वनाश्रितों का आखेट कर रही है। कारपोरेट घरानों के हितों को साधने के लिए आरएसएस के लोग कारपोरेट के चंदें से बनी विभिन्न एनजीओ और संस्थाओं के माध्यम से आदिवासियों में धुसपैठ करते है और जब इनकी सरकारें बन जाती है तब आदिवासियों व वनाश्रितों की जबरन जमीन से बेदखली, प्रशासन के जरिए उत्पीड़न, फर्जी मुठभेड़ों में हत्याएं कराते है। इनकी जहां भी सरकारें है वहां आदिवासियों व वनाश्रितों के वनभूमि पर पुश्तैनी अधिकार के लिए बने वनाधिकार कानून को विफल कर दिया गया। बगल के झारखण्ड़ में तो हमने खुद जाकर देखा कि जिस राज्य में अकेले आदिवासी 87 लाख की संख्या में रहते हो वहां महज एक लाख तीस हजार दावा ही जमा किया गया है। उ.प्र. में भी इनकी सरकार बनने के बाद नौगढ़ से लेकर दुद्धी तक आदिवासियों व वनाश्रितों पर दमन ढ़ाया गया। लिलासी काण्ड में ही आरएसएस के निर्देशन में आदिवासियों का उत्पीड़न किया है। इसलिए आरएसएस-भाजपा की सरकार के खिलाफ वनाधिकार कानून को लागू कराने, कोल को आदिवासी का दर्जा देने और आदिवासियों की लोकसभा सीट के लिए 29 नवम्बर को देशभर के आदिवासी व किसान दिल्ली कूच करेंगे। यह बातें आज राबर्ट्सगंज के सिंचाई विभाग डाक बंगले में पूर्व आई0 जी0 व स्वराज अभियान के नेता एस आर दारापुरी ने ग्रामीणों से कहीं।

उन्होंने वनाधिकार कानून में आए हाईकोर्ट के फैसले के बारें में बताते हुए कहा कि हमारे संगठन आदिवासी वनवासी महासभा की तरफ से दाखिल जनहित याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की खण्ड़पीठ ने दस महीने चली सुनवाई के बाद 11 अक्टूबर को वनाधिकार कानून की प्रक्रिया पुनः शुरू करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने वादी संगठन आदिवासी वनवासी महासभा के सदस्यों को यह अवसर दिया है कि वह वनाधिकार कानून के तहत 6 हफ्तें में अपना दावा व अपील दाखिल करें और प्रशासन से कहा है कि यदि ऐसे दावा व अपील आते है तो अगले 12 हफ्तें में वह उस पर निर्णय लंे। हाईकोर्ट ने इन 18 हफ्तें के दौरान दावाकर्ताओं के उत्पीड़न पर रोक लगा दी है। उन्होंने बताया कि इस फैसले के अनुपालन के लिए उ0 प्र0 शासन और जिला प्रशासन को पत्रक भी दिया गया है और उनसे इसके अनुपालन की अपील की गयी है।

उन्होंने कहा कि सोनभद्र, मिर्जापुर व नौगढ़ में तनाव का बड़ा कारण वनभूमि विवाद है। वनभूमि विवाद के कारण है कानून व व्यवस्था का संकट खड़ा होता रहा है। ऐसे में जब वनाधिकार कानून बना तो आदिवासियों और वनाश्रितों में बड़ी उम्मीद पैदा हुई थी। पर यहां वनाधिकार कानून को पूर्ववर्ती सरकारों ने विफल कर दिया। जमा किए गए अस्सी प्रतिशत दावें बिना विधिक प्रक्रिया का अनुपालन किए खारिज कर दिए गए। योगी सरकार बनने के बाद तो जर्बदस्त दमन शुरू हो गया। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि म्योरपुर के गम्भीरपुर गांव में 90 वर्षीय वंश रूप पठारी जिन्हें वनाधिकार पट्टा तक मिला है उन पर भी वन विभाग ने मुकदमा कर दिया है। ऐसे हालत में हमें हाईकोर्ट जाना पड़ा लेकिन अब सरकार को हाईकोर्ट फैसले का सम्मान करना चाहिए और इसके अनुपालन के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। पत्रकार वार्ता में स्वराज अभियान के नेता दिनकर कपूर, राजेश सचान, राजाराम भारती, मनोज भारती, रमेश सिंह खरवार आदि लोग शामिल रहे।

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