सपा-बसपा गठबंधन के लिए पहली बुरी खबर बदायूँ से

सद्य: निर्मित सपा-बसपा गठबंधन SP-BSP combine के लिए कांग्रेस खेमे से पहली बुरी खबर बदायूँ Badaun से आने वाली है, जहाँ से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव Akhilesh Yadav के भाई धर्मेन्द्र यादव सांसद हैं।...

लखनऊ, 14 जनवरी। सद्य: निर्मित सपा-बसपा गठबंधन SP-BSP combine के लिए कांग्रेस खेमे से पहली बुरी खबर बदायूँ Badaun से आने वाली है, जहाँ से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव Akhilesh Yadav के भाई धर्मेन्द्र यादव Dharmendra Yadav सांसद हैं। सूत्रों के हवाले से खबर है कि पूर्व मंत्री सलीम इकबाल शेरवानी Saleem Sherwani को कांगेस नेतृत्व की तरफ से बदायूँ से लोकसभा चुनाव  Lok Sabha Elections लड़ने की हरी झण्डी मिल गई है।

बता दें बता दें धर्मेन्द्र यादव दूसरी बार बदायूँ से सपा के टिकट पर चुने गए हैं, जबकि सलीम इकबाल शेरवानी 1996 से 2009 तक सपा के टिकट पर बदायूँ से चुने जा चुके हैं। 2009 में जब सपा ने बदायूँ से सलीम इकबाल शेरवानी का टिकट काटकर धर्मेन्द्र यादव को मैदान में उतारा तो शेरवानी ने बगावत कर दी और पूरे लोकसभा क्षेत्र में उस समय शेरवानी समर्थकों ने मुलायम सिंह यादव के पुतले जलाए थे। सलीम शेरवानी इस चुनाव में कांग्रेस से लड़ गए और बहुत कम अंतर से चुनाव हारे। कहा जाता है कि इस चुनाव में भाजपा ने धर्मेंद्र यादव का अंदरूनी समर्थन किया था।

कहा जाता है कि सलीम शेरवानी का टिकट कटवाने में तत्कालीन सपा जिला अध्यक्ष बनवारी सिंह यादव की बड़ी भूमिका थी। हालांकि बाद में बनवारी सिंह के धर्मेन्द्र यादव से भी संबंध अच्छे नहीं रहे। और चर्चा है कि 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले मुलायम सिंह यादव के सामने ही दोनों में तल्खी से बात हुई थी और धर्मेन्द्र यादव ने यहाँ तक कह दिया था कि अगर आपकी इच्छा न हो तो मैं बदायूँ छोड़ दूँ। लेकिन तब दोनों में मुलायम सिंह यादव ने समझौता करा दिया था।

चर्चा यह भी है कि बनवारी सिंह को सबक सिखाने के लिए ही धर्मेन्द्र यादव ने उन्हें मंत्री नहीं बनने दिया और उनके समधी ओमकार सिंह यादव को मंत्री बनवा दिया। चर्चा है कि बनवारी सिंह यादव, जो कभी मिनी मुख्यमंत्री कहे जाते थे, अपने आखिरी दिनों में यह सदमा झेल नहीं सके।

अब अगर सलीम शेरवानी कांग्रेस से मैदान में उतरते हैं तो धर्मेन्द्र यादव के लिए बदायूँ से दिल्ली बहुत दूर हो जाएगा।

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