स्टेच्यू ऑफ यूनिटी में भी घोटाला ! कैग ने सरकारी कंपनियों के सीएसआर पर धन देने पर सवाल उठाए

कैग ने स्टेच्यू के लिए सरकारी कंपनियों की ओर से कॉरपोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत धनराशि उपलब्ध कराने  को गलत बताया है तथा इसे निर्धारित प्रावधानों का उल्लंघन करार दिया है।...

स्टेच्यू ऑफ यूनिटी में भी घोटाला ! कैग ने सरकारी कंपनियों के सीएसआर पर धन देने पर सवाल उठाए

Scam in the Statue of Unity! CAG questions on giving government funding to CSR

नई दिल्ली 08 अगस्त। गुजरात में नर्मदा के मुहाने पर स्थापित की जा रही सरदार वल्लभ भाई पटेल की  182 फुट ऊंची प्रतिमा स्टेच्यू ऑफ यूनिटी पर कैग ने घोटाला खोला है। कैग ने स्टेच्यू के लिए सरकारी कंपनियों की ओर से कॉरपोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत धनराशि उपलब्ध कराने  को गलत बताया है तथा इसे निर्धारित प्रावधानों का उल्लंघन करार दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की संसद में पेश एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 31 मार्च 2017 को समाप्त हुए वित्त वर्ष में प्रतिमा और संबंधित स्थल का निर्माण करने के लिए पांच केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों ने 146.83 करोड़ रुपए की धन राशि सीएसआर के तहत उपलब्ध कराई है। इनमें से तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम ने 50 करोड रुपए, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम निगम लिमिटेड ने 25 करोड़ रुपए, भारत पेट्रोलियम निगम लिमिटेड ने 25 करोड़ रुपए, इंडियन ऑयल निगम लिमिटेड ने 21.83 करोड़ रुपए, और ऑयल इंडिया लिमिटेड ने 25 करोड़ रुपए की राशि दी है।

रिपोर्ट के अनुसार सभी कंपनियों ने इस सीएसआर राशि को राष्ट्रीय ऐतिहासिक परिसंपत्तियों, कला तथा संस्कृति का संरक्षण के तहत दर्शाया है। कैग का कहना है कि इस परियोजना में कंपनियों के योगदान को कंपनी अधिनियम 2013 की सातवीं अनुसूची के अनुसार सीएसआर नहीं माना जा सकता क्योंकि यह ऐतिहासिक परिसंपत्ति नहीं है।        

गुजरात सरकार ने सरदार पटेल की याद में प्रतिमा बनाने के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट संगठन की स्थापना की है। इस संगठन ने स्टेच्यू ऑफ यूनिटी परियोजना की शुरुआत की। अक्टूबर 2018 तक पूर्ण होने के लक्ष्य के साथ 2989 करोड़ रुपए की इस परियोजना का ठेका अक्टूबर 2014 में लार्सन एंड टूब्रो को दिया गया। 

परियोजना के तहत सरदार पटेल की 182 फुट ऊंची कांस्य प्रतिमा का निर्माण होना है। यह विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा होगी। इसके अलावा एक स्मारक स्थल तथा आगंतुक केंद्र तथा बागीचा और श्रेष्ठ भारत भवन का निर्माण किया जाना है। 

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