दंगाइयों-अपराधियों के मुकदमे वापस लेने वाले योगी दलितों पर लगवा रहे हैं रासुका - रिहाई मंच

यूपी में आईएस के नाम पर मुस्लिम नौजवानों को फंसाने को लेकर ‘रेडिकलाईजेशन के नाम पर, और ‘जिन्दाबाद-मुर्दाबाद के बीच फंसी देशभक्ति’ रिपोर्ट जारी की जाएगी...

यूपी में आईएस के नाम पर मुस्लिम नौजवानों को फंसाने को लेकर ‘रेडिकलाईजेशन के नाम पर, और ‘जिन्दाबाद-मुर्दाबाद के बीच फंसी देशभक्ति’ रिपोर्ट जारी की जाएगी

जातीय-सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ 7 अप्रैल को सम्मेलन

लखनऊ 5 अप्रैल 2018। जातीय-सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ रिहाई मंच 7 अप्रैल को ढाई बजे से यूपी प्रेस क्लब लखनऊ में सम्मेलन करेगा। इस मौके पर यूपी में आईएस के नाम पर मुस्लिम नौजवानों को फंसाने को लेकर ‘रेडिकलाईजेशन के नाम पर, और ‘जिन्दाबाद-मुर्दाबाद के बीच फंसी देशभक्ति’ रिपोर्ट जारी की जाएगी। इस कार्यक्रम में इलाहाबाद के वरिष्ठ अधिवक्ता फरमान अहमद नकवी, अरविंद मूर्ति, सामाजिक कार्यकर्ता असद हयात, एपीसीआर के अबू बकर सब्बाक, लेखक शरद जायसवाल, अम्बेडकवादी छात्र सभा से अमर पासवान, एनसीएचआरओ के अंसार इंदौरी अपनी बात रखेंगे।

रिहाई मंच प्रवक्ता शाहनवाज आलम ने कहा कि एक तरफ योगी मुकदमें वापस ले रहे हैं तो दूसरी तरफ दलितों, पिछड़ों और मुसलमानों को फर्जी मुठभेड़ में मारकार कानून के राज की वकालत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सामंती करणी सेना को संरक्षित करने वाली भाजपा सरकार ने हक-हूकूक की मांग कर रहे दलितों पर गोली चलाई और अब उनको खतरा बताते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कारवाई कर रही है। उन्होंने योगी सरकार से 2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान दलितों के ऊपर दर्ज मुकदमें तत्काल वापस लेने की मांग की।

शाहनवाज आलम ने बताया कि ‘रेडिकलाईजेशन के नाम पर’ रिपोर्ट जहां भारत में मुस्लिम युवाओं को आईएस के नाम पर फंसाने के षडयंत्र पर बहस खड़ी करती है वहीं ‘जिन्दाबाद-मुर्दाबाद के बीच फंसी देशभक्ति’ क्रिकेट जैसे खेलों के माध्यम से समाज की विभाजनकारी शक्तियों शिनाख्त करती है। ‘रेडिकलाईजेशन के नाम पर’ रिपोर्ट कानपुर, आजमगढ़, बिजनौर, लखनऊ, कुशीनगर, उन्नाव के उन युवाओं के परिवारों की सिर्फ आपबीती सामने लाने का ही नहीं बल्कि उन झूठे आरोपों को भी सामने लाने का प्रयास है जिसके सहारे खुफिया-सुरक्षा एजेंसियां उनके जीवन के बेशकीमती साल बर्बाद कर रही हैं। ये रिपोर्ट मुसलमानों की एक खतरनाक छवि बनाने और बहुसंख्यक समाज को उसके खिलाफ खड़ा करने की राजनीति का भी ये रिपोर्ट पर्दाफाश करती है।

कार्यक्रम में जातीय-सांप्रदायिक हिंसा के पीड़ित व ‘जिन्दाबाद-मुर्दाबाद के बीच फंसी देशभक्ति’ के लेखक शरद जायसवाल, नरेश गौतम, यदुवंश प्रणय भी शामिल रहेंगे। रिहाई मंच ने गुजारिश की कि इंसाफ पसन्द अवाम 7 अप्रैल को यूपी प्रेस क्लब लखनऊ में होने वाले कार्यक्रम में जरूर पहुंचें।

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