सरकार के दरवाज़े पर दस्‍तक देगा शिक्षा-रोज़गार अधिकार अभियान

18 से 29 वर्ष के लोगों में हर 1000 व्‍यक्तियों पर प्रदेश में 148 बेरोज़गार हैं, यानी रोज़गार तलाशने की उम्र में लगभग हर छठा व्यक्ति बेरोज़गार है।...

लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश में शिक्षा और रोज़गार की बदहाल स्थिति को देखते हुए तीन जनसंगठनों ने प्रदेशव्‍यापी 'शिक्षा-रोज़गार अधिकार अभियान' शुरू किया है। यहाँ प्रदेश के विभिन्‍न भागों के प्रतिनिधियों की बैठक में आन्‍दोलन को गति देने के लिए कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की गई।

नौजवान भारत सभा, दिशा छात्र संगठन और जागरूक नागरिक मंच के साझा बैनर तले चलाये जा रहे इस अभियान के तहत 10-सूत्री माँगपत्रक पर प्रदेश भर में लाखों हस्‍ताक्षर कराये जा रहे हैं। भगतसिंह के शहादत दिवस 23 मार्च से शुरू हुए इस अभियान के तहत भगतसिंह के 111वें जन्‍मदिवस 28 सितम्‍बर को हज़ारों छात्र-युवा और नागरिक शिक्षा और रोज़गार से जुड़ी अपनी माँगों को लेकर सरकार के दरवाज़े पर दस्‍तक देंगे।

अभियान की समन्‍वय समिति के सदस्‍यों, प्रसेन, तपीश मैन्‍दोला तथा आनन्‍द सिंह ने कहा कि राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के पौने तीन लाख पद बरसों से खाली पड़े हैं। प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा तक अन्धाधुन्ध निजीकरण ने शिक्षा का ऐसा बाज़ार बना दिया है जहाँ आम घरों के बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा पाना नामुमकिन होता जा रहा है। रोज़गार विभाग के अधिकारियों के अनुसार उत्तर प्रदेश में बेरोज़गारों की संख्या एक करोड़ तक पहुँच चुकी है जबकि अर्द्धबेरोज़गारों को जोड़ लें तो यह आँकड़ा 4 करोड़ से ऊपर चला जायेगा। नये रोज़गार पैदा करना तो दूर, पहले से खाली लाखों पदों पर भी भर्तियाँ नहीं हो रही हैं। सरकारी आँकड़ों के अनुसार यहाँ बेरोज़गारी की दर 6.5 प्रतिशत है जोकि राष्ट्रीय दर 5.8 प्रतिशत से काफ़ी ज़्यादा है। 18 से 29 वर्ष के लोगों में हर 1000 व्‍यक्तियों पर प्रदेश में 148 बेरोज़गार हैं, यानी रोज़गार तलाशने की उम्र में लगभग हर छठा व्यक्ति बेरोज़गार है।

स्कूल जाने वाले प्रदेश के करीब 2.74 करोड़ बच्चों में से आधे से अधिक सरकारी स्कूलों में जाते हैं जिनकी दशा बेहद खराब है। 10,187 प्राथमिक और 4895 उच्चतर प्राथमिक स्कूल तो ऐसे हैं जो केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। 55 प्रतिशत विद्यार्थी स्कूल जाते ही नहीं।

स्कूलों की हालत सुधारने के बजाय सरकार अब हज़ारों सरकारी स्कूलों को ही बन्द करने की कोशिश कर रही है। अधिकांश प्राइवेट स्‍कूलों में भारी फीस चुकाने के बाद भी बच्‍चों को ढंग की शिक्षा नहीं मिल पाती। कुकुरमुत्ते की तरह खुल रहे निजी मेडिकल-डेंटल, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेज मोटी फीस वसूलने के बाद भी ऐसी घटिया शिक्षा देते हैं जो किसी काम की नहीं होती। इतनी बुरी स्थिति के बावजूद प्रदेश में शिक्षा पर व्यय में लगातार कटौती की जाती रही है।

अभियान ने भर्ती परीक्षाओं में पास उम्‍मीदवारों को तत्‍काल नियुक्ति देने, विभिन्न विभागों में खाली पड़े लाखों पदों को भरने की प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू करने, सरकारी विभागों में ठेका प्रथा खत्‍म करके नियमित नियुक्ति देने, सरकारी स्‍कूलों में शिक्षकों के सभी पदों को भरने तथा निजी स्कूलों-कॉलेजों, मेडिकल-डेंटल, इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों में फ़ीस, सुविधाएँ और शिक्षकों के वेतन के मानक तय करने के लिए क़ानून बनाने की माँग की है। इसके साथ ही नौकरियों के लिए आवेदन के भारी शुल्कों को ख़त्म करने और साक्षात्कार तथा परीक्षा के लिए यात्रा को निःशुल्क करने, प्राइवेट ट्यूशन और कोचिंग सेण्टरों की मनमानी और लूट को रोकने के लिए नियमवाली बनाने तथा प्रदेश में रोज़गार और खाली पदों की स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करने की माँग भी की गई है। अभियान की एक प्रमुख माँग यह है कि ‘हरेक काम करने योग्य नागरिक को स्थायी रोजगार व सभी को समान और निःशुल्क शिक्षा’ के अधिकार को संवैधानिक संशोधन करके मूलभूत अधिकारों में शामिल किया जाये। प्रदेश सरकार इस बाबत विधानसभा में प्रस्ताव पारित करके केन्द्र को भेजे। प्रदेश में शहरी और ग्रामीण बेरोज़गारों के पंजीकरण की व्यवस्था की जाये और रोज़गार नहीं मिलने तक कम से कम 10,000 रुपये बेरोज़गारी भत्ता दिया जाये। इसे सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार ‘भगतसिंह रोज़गार गारण्टी क़ानून’ पारित करे।।

प्रदेश के 9 ज़िलों लखनऊ, इलाहाबाद, वाराणसी, गोरखपुर, गाज़ियाबाद, मऊ, अम्‍बेडकरनगर, उरई और चित्रकूट में शिक्षा-रोज़गार अधिकार अभि‍यान शुरू किया जा चुका है और अन्‍य ज़िलों में भी इसे विस्‍तारित किया जा रहा है।

'शिक्षा-रोज़गार अधिकार अभियान' की प्रेस विज्ञप्ति

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