भारत में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में रोजगार के कम से कम तीन लाख अवसर

भारत में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में रोजगार के कम से कम तीन लाख अवसर

सूर्य मित्र कार्यक्रम के तहत देश में तैयार हो रहे 50 हजार टेक्‍नीशियंस

नई दिल्ली, 31 अक्तूबर। भारत के विकेन्द्रित अक्षय ऊर्जा (डीआरई) क्षेत्र के लिये घरेलू सौर ऊर्जा प्रणालियों, हरित मिनी ग्रिड तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सम्‍बन्‍धी उपकरणों की बड़े पैमाने पर स्‍थापना का मौका दरअसल अरबों डॉलर के निवेश का सुनहरा अवसर है। इससे घरेलू ऊर्जा उद्योग का निर्माण होगा। साथ ही इससे भारत के दो प्रमुख लक्ष्‍यों (खासकर महिलाओं एवं युवाओं के लिये रोजगार के ज्‍यादा अवसर और अधिक बिजली उत्‍पादन) को एक साथ साधा जा सकता है।

यह निष्कर्ष 31 अक्टूबर को पॉवर फॉर आल नामक अंतर्राष्ट्रीय संगठन द्वारा तैयार “न्यू एनर्जी एस्सेस जॉब्स” नामक रिपोर्ट से निकले। हालांकि ऐसी स्थिति पैदा करने के लिये नयी पीढ़ी की ऊर्जा श्रमशक्ति पर और अधिक ध्‍यान केन्द्रित करना होगा। ऐसी श्रमशक्ति जो ग्रामीण उपभोक्‍ताओं को समझे और उन्‍हें प्रोत्‍साहित करे। साथ ही उस सौर तथा कृषि मूल्‍य श्रंखला का वितरण करे, जिससे देश के 40 प्रतिशत से ज्‍यादा लोगों को रोजगार मिलता है। तंगी से जूझ रही वे बिजली वितरण कम्‍पनियां ग्रामीण उपभोक्‍ताओं को अक्‍सर वरीयता नहीं देती, जो ग्रामीण, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक उपभोक्‍ताओं को सेवा देने की क्षमताओं से सबसे बेहतर तरीके से लैस होती हैं।

क्या होगा सूर्य मित्र कार्यक्रम

सूर्य मित्र कार्यक्रम के तहत 50 हजार टेक्‍नीशियंस को सोलर पैनल लगाने और उनका रखरखाव करने का प्रशिक्षण दिये जाने का लक्ष्‍य तय किया गया है। उनमें से करीब 30 हजार को प्रशिक्षित भी किया जा चुका है। यह स्किल काउंसिल फॉर ग्रीन जॉब्‍स के गठन की दिशा में पहला महत्‍वपूर्ण कदम है। इस काउंसिल का लक्ष्‍य राष्‍ट्रीय स्‍तर पर उद्योग-नीत विकास एवं उद्यमिता विकास को धरातल पर उतारना है।

वर्ष 2022 तक सभी भारतीयों तक चौबीसों घंटे किफायती दर पर बिजली पहुंचाने के मार्ग में अनेक चुनौतियां हैं। इनमें प्रौद्योगिकी, वित्‍त तथा नीति सम्‍बन्‍धी चुनौतियां भी शामिल हैं।

हम अक्‍सर एक चुनौती के बारे में ज्‍यादा बात नहीं करते, या फिर उसे उतनी गम्‍भीरता से नहीं लेते। वह यह कि क्‍या ग्रामीण क्षेत्रों में हमारे पास पर्याप्‍त मानव पूंजी (एक कार्यकुशल श्रमशक्ति और उद्यमिता सम्‍बन्‍धी प्रतिभा) है, ताकि हम उन करोड़ों घरों और छोटी औद्योगिक इकाइयों तक बिजली की आपूर्ति का प्रबंधन, उसकी स्‍थापना एवं उसे वित्‍तपोषित कर सकें, जिन्‍हें बिजली की सुचारु व्‍यवस्‍था उपलब्‍ध नहीं है।

हालांकि डीआरई द्वारा ऊर्जीकृत ग्रामीण आर्थिक विकास से जुड़ी बाजार सम्‍बन्‍धी ज्‍यादातर सम्‍भावनाओं का उपयोग नहीं हो सका है। सीईईडब्‍ल्‍यू की एक ताजा रिपोर्ट में पाया गया है कि ग्रामीण भारत में स्‍वच्‍छ ऊर्जा आधारित आजीविका उपकरणों का बाजार 50 अरब डॉलर का है। इसमें 30 अरब डॉलर का सोलर वॉटर पम्‍प का बाजार शामिल नहीं है।

भारत में वर्ष 2022 तक 175 गीगावॉट सौर तथा वायु ऊर्जा उत्‍पादित करने का लक्ष्‍य है। कुछ अनुमानों के मुताबिक भारत में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में रोजगार के कम से कम तीन लाख अवसर उत्‍पन्‍न हो सकते हैं, जो कि वर्तमान मौकों के मुकाबले कहीं ज्‍यादा हैं। इस वक्‍त 30 करोड़ लोगों को बिजली उपलब्‍ध नहीं है। उन उपभोक्‍ताओं की सेवा करने और इन लक्ष्‍यों की प्राप्ति के लिये प्रतिभा कहां से आएगी?

अगर हम सभी भारतीयों को दिन-रात बिजली देने के लक्ष्‍य को प्राप्‍त करना चाहते हैं, तो हमें निम्‍नांकित क्षेत्रों पर अतिरिक्‍त ध्‍यान देने की जरूरत है :

●       दूरदराज इलाकों में प्रशिक्षण एवं ई-लर्निंग का बेहतर ढांचा-- अक्‍सर ग्रामीण या सुदूर क्षेत्रों में प्रतिभा समाप्‍त हो जाती है। ऐसा होने से रोकने के लिये इस ढांचे की आवश्‍यकता होती है।

●       लास्‍ट-माइल विद्युतीकरण के लिये जरूरी क्षमताओं का बेहतर एकीकरण-- जैसे कि वितरित प्रणालियां, उपकरण सर्विसिंग‍ तथा कृषि प्रसंस्‍करण।

●       स्‍थानीय स्‍तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन-- जो स्‍थानीय स्‍तर पर मिलने वाली प्रतिभाओं को प्रशिक्षण उपलब्‍ध कराने के लिये निजी क्षेत्र के कारोबारों तथा स्‍थानीय स्‍वैच्छिक संगठनों के साथ कार्य करने का परिणाम हों।

●       ग्रामीण विद्युतीकरण के क्षेत्र में रोजगार के अवसरों को लेकर जागरूकता बढ़ाना।

●       क्षमता तथा प्रशि‍क्षण (तकनीकी के साथ-साथ बैंकिंग, बिक्री एवं विपणन आदि) के लिये पारिस्थितिकीय तंत्र वाले दृष्टिकोण को बढ़ाना और उसे व्‍यापक करना।

●       प्रशिक्षण कार्यों में महिलाओं एवं युवाओं को केन्‍द्र में रखना, क्‍योंकि उनमें ग्रामीण बाजार को संचालित करने की बेहतर क्षमता होती है।

इसके अलावा, भारत में ऊर्जा क्षेत्र की नयी श्रमशक्ति के निर्माण के मामले में निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्रों के बीच करीबी समन्‍वय बेहद जरूरी है। पिछले अनुभव यह बताते हैं कि इनमें से किसी एक पक्ष का ढिलाईपूर्ण रवैया उम्‍मीद से कम नतीजों के रूप में सामने आता है।

Skill Council for Green Jobs के सीईओ डॉ. प्रवीण सक्सेना का लेख यहां पढ़ा जा सकता है . Why “Saubhagya” and skills are inseparable

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