गोरखपुर में दलितों के पुलिस उत्पीड़न की जाँच करने पहुंचे पूर्वआईजी व पूर्व आईएएस को डीएम ने दी जेल भेजने की धमकी !

गोरखपुर में दलितों के पुलिस उत्पीड़न की जाँच पहुंचे पूर्वआईजी व पूर्व आईएएस को जेल भेजने की डीएम की धमकी...

गोरखपुर में दलितों के पुलिस उत्पीड़न की जाँच पहुंचे पूर्वआईजी व पूर्व आईएएस को जेल भेजने की डीएम की धमकी

लखनऊ, 24 मई। पूर्व आईजी एसआर दारापुरी ने आरोप लगाया है कि कल गोरखपुर जिलाधिकारी विजयेंद्र पांडियन ने गोरखपुर जिले में दलितों के पुलिस उत्पीड़न की जांच हेतु मिलने गये उनके प्रतिनिधि मंडल को जेल में डालने की धमकी दी। जांच दल में शामिल थे : -

हरिश्चन्द्र (पूर्व आईएएस), एस.आर. दारापुरी- (पूर्व आईजी), रामकुमार (निदेशक डायनमिक एक्शन ग्रुप), दौलत राम (निदेशक भारतीय जनसेवा आश्रम), अरविन्द कुमार (एक्शन एड), रीता कौशिक (सचिव, एसकेवीएस), शोभना स्मृति ( राज्य संयोजिका उ.प्र., आल इण्डिया दलित महिला अधिकार मंच), रामदुलार ( प्रदेश संयोजक राष्ट्रीय दलित मानवाधिकार अभियान), आदर्श कुमार ( संयोजक नेटिव एजुकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी).

दारापुरी ने सवाल किया है कि यह लोकतंत्र है या तानाशाही?

एस.आर. दारापुरी द्वारा जारी ग्राम-अस्थौला,थाना–गगहा, जनपद–गोरखपुर में दलितों के पुलिस उत्पीड़न की जाँच रिपोर्ट का मूल पाठ

कल दिनांक 22.05.2018 को ग्राम अस्थौला थाना गगहा जनपद गोरखपुर में दिनांक 15 मई  2018 को दलित उत्पीड़न  की घटना की जांच हेतु हरिश्चन्द्रा पूर्व आई.ए.एस. के नेतृत्व में फैक्ट फाइंडिंग टीम द्वारा गाँव का भ्रमण किया गया जिसमें मुख्य रूप से एस.आर. दारापुरी- आई.पी.एस.(से.नि.)व पूर्व आईजी, रामकुमार- निदेशक डायनमिक एक्शन ग्रुप, दौलत राम- निदेशक भारतीय जनसेवा आश्रम, अरविन्द कुमार- एक्शन एड, रीता कौशिक-सचिव, एस.के.वी.एस., शोभना स्मृति- राज्य संयोजिका उ.प्र., आल इण्डिया दलित महिला अधिकार मंच, रामदुलार- प्रदेश संयोजक राष्ट्रीय दलित मानवाधिकार अभियान, आदर्श कुमार- संयोजक नेटिव एजुकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी,गोरखपुर थे. टीम द्वारा ग्राम अस्थौला में घटना स्थल का निरीक्षण किया गया तथा गांव में उपलब्ध दलित महिलाओं, बच्चों एवं बुजुर्गों से बातचीत की गयी तथा घटनाक्रम के बारे में जानकारी प्राप्त की गयी।

जांच से निम्नलिखित तथ्य प्रकाश में आये :-

  1. दिनांक 14.05.2018 को लालचन्द द्वारा बिरेन्द्र चन्द एवं अन्य के सहयोग से खलिहान की जमीन पर निर्माण करके कब्जा करने का प्रयास किया गया जिसका दलिटन  के द्वारा विरोध किया गया। सूचना मिलने पर पुलिस की 100 नम्बर की गाड़ी आयी तथा निर्माण कार्य को रोकवाकर चली गयी. इसके पश्चात थाना गगहा से दो सिपाही गांव में आये तथा उन्होंने दोनों पक्षों को अगले दिन प्रातः 10 बजे  थाने पर आने के लिए कहा।
  2.  पुनः दिनांक 15.05.2018 को दलित पक्ष के 10 से 15 महिलाएं तथा पुरुष  थाने पर गये  तथा दूसरे पक्ष के बिरेन्द्र चन्द, गुड्डू चन्द पुत्रगण कमलाचन्द रणधीर चन्द, तथा इन्दर चन्द थाने पर पहले से ही मौजूद थे। जैसे ही बातचीत शुरू हुयी तो बिरेन्द्र चन्द ने जातिसूचक गलियां देना शुरू कर  दिया और राम उगान  पुत्र बलिराज को पहले अपनी बन्दूक के कुंदे से और बाद में पुलिस के डंडे से मारना शुरू कर दिया. इस पर दलितों ने आपत्ति की तो थानाध्यक्ष सुनील कुमा सिंह व् अन्य पुलिस कर्मचारियों ने भी उन्हें मारना पीटना शुरू कर दिया तथा राम उगान को हवालात में बंद कर दिया तथा औरतों को थाने से भगाने के इरादे से  पीटना शुरू कर दिया. जब इसकी सूचना गाँव में पहुंची तो वहां से दलित बस्ती के 25-30 लोग थाने पर पहुंचे. वहां पर जब उन्होंने मारपीट करने पर आपत्ति की तो पुलिस वालों ने उन पर लाठी चार्ज किया तथा उसके बाद अकारण फायरिंग भी कर दी जिससे जीतू पुत्र सुखारी, भोलू पुत्र उमेश तथा दीपक पुत्र गोपाल को गोली लगी एवं काफी लोगों को लाठी डंडे की चोटें भी आयीं. ठाणे पर उपस्थित रही औरतों ने यह भी बताया कि फायरिंग के दौरान बिरेंदर चंद ने भी अपनी निजी बन्दूक से उन पर गोलियां चलाई थीं.

3. दिनांक 15/5/18 को गगहा थाना पर  उपरोक्त घटना के बाद पुलिस द्वारा दिनांक 16/5/18 को थाने पर 31 दलितों को नामज़द करते हुए मुकदमा दर्ज किया गया जिसमें संपत्ति को नुक्सान, आगजनी, हत्या का प्रयास सहित संगीन धारायों का उपयोग किया गया.

4.   इसके पश्चात उसी दिन पुलिस द्वारा बड़ी संख्या में ग्राम अस्थौला की दलित बस्ती पर चढ़ाई की गयी तथा 27 दलितों को दो औरतों सहित गिरफ्तार कर लिया गया. दलित बस्ती पर हमले के दौरान पुलिस द्वारा गाँव में उपस्थित महिलायों, बच्चों तथा वृद्धों की निर्मम पिटाई एवं घरों में तोफोड़ की गयी. इस हंगामे के दौरान अजोरा देवी पत्नी निवास, शांति पत्नी राम गोविन्द, लालमती पत्नी निर्मल,राजमती पत्नी जगदीश, पानमती पत्नी घूरन, सीमा पत्नी अनिल, ज्ञानमती पत्नी हरीश चंद, साधना देवी पत्नी राजेश, किस्मती पत्नी पुरुषोतम, हंसी पत्नी प्रभु, विमला पत्नी उदय, मन्नू पत्नी अमित, राम मिलन पुत्र जोखन, अमित पुत्र सुभाष तथा कुछ अन्य को पुलिस की मारपीट से गंभीर चोटें आयीं. इसमें अजोरा देवी का दाहिना हाथ टूट गया है. इसके अतिरिक्त पानमती  पत्नी घूरन राम के कान और गले का मंगल सूत्र भी छीन लिया गया.

इसके अतिरिक्त पुलिस द्वारा राजकुमारी पत्नी रामसकल, पान्मती पत्नी घूरन एवं  सीमा देवी पत्नी अनिल के घरों के दरवाजे तोड़े गये तथा घर के अन्दर नहाती हुयी महिलायों और बच्चियों के साथसाथ छेड़छाड़ की गयी. यह भी उल्लेखनीय है कि उस समय पुलिस के साथ कोई भी महिला पुलिस कर्मचारी नहीं थी. यह भी आश्चर्य की बात है कि उस समय पुलिस के साथ बिरेन्द्र चंद तथा उसके सहयोगी भी मौजूद थे.

5.    जांच के दौरान पाया गया कि अधिकतर दलितों के घरों में ताले लगे हुए हैं और लोग पुलिस के डर से भागे हुए हैं.

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि गगहा पुलिस द्वारा खलिहान की ज़मीन पर कब्ज़ा करने/ करवाने वाले पक्ष के साथ मिल कर थाने पर दलितों की पिटाई की गयी तथा अन्य करवाई गयी. इसके बाद गाँव में दलित महिलायों, बच्चों तथा बुजुर्गों के साथ मारपीट की गयी एवं महिलायों के साथ छेड़छाड़ की गयी.

उपरोक्त सभी तथ्यों तथा साक्ष्यों के परिपेक्ष्य में जांच टीम निम्नलिखित संस्तुतियां करती है:-

1.  खलिहान पर कब्जे का मामला राजस्व विभाग से सम्बंधित था परन्तु इसमें थानाध्यक्ष गगहा द्वारा बिना किसी अधिकार क्षेत्र तथा कब्ज़ा करने वाले पक्ष की सहायता करने के इरादे से अवैधानिक कार्यवाही की गयी, जिसके लिए उसके विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही की जानी चाहिए .

 2.  थाने पर अवैध कब्ज़ा करने वाले पक्ष के सहयोगी वीरेन्द्र चन्द द्वारा अनधिकृत ढंग से राम उगान की थाने पर पिटाई की गयी तथा बाद में अपनी निजी बन्दूक से दलितों पर फायरिंग भी की गयी परन्तु थानाध्यक्ष द्वारा उसे ऐसा करने से रोकने हेतु कोई भी कार्यवाही नहीं की गयी . जिससे यह स्पष्ट है कि इस कार्य में उसकी पूर्ण सहमति थी. वास्तव में इस कारण ही दलितों में आक्रोश पैदा हुआ तथा उन्होंने इसका विरोध विरोध जताया.  यदि थानाध्यक्ष ने थाने पर ऐसा न होने दिया होता तो  संभवतः थाने पर टकराव की कोई घटना घटित ही नहीं होती. अतः इस परिघटना की उच्चस्तरीय जाँच कर थानाध्यक्ष को त्वरित निलंबित  कर थाने से हटाया जाए एवं दण्डित किया जाय.थानाध्यक्ष का यह कृत्य अपने कर्तव्य की घोर उपेक्षा है , जिसके लिए उसके विरुद्ध  एससी/एसटी एक्ट की धारा 4 के अंतर्गत अभियोग चलाया जाय .इसके साथ ही बिरेन्द्र चंद द्वारा थाने पर पिटाई करने तथा अपनी निजी बन्दूक सर फायरिंग करने के लिए भी  एस/एसटी एक्ट के अंतर्गत केस दर्ज करके कार्रवाही की जाये.

3.  जैसा कि उपरांकित है कि थाने पर टकराव की घटना के बाद पुलिस द्वारा उसी दिन दलित बस्ती पर बड़ी संख्या में चढ़ाई की गयी जिसके दौरान महिलाओं, बच्चियों , बुजुर्गों को चोटें आई हैं, लूटपाट की गयी तथा उनकी बेइज्जती की गयी जिसके लिए दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर जाँच कर कानूनी कार्यवाही सुनुश्चित की जाय.

 4.  थाना गगहा पर पुलिस द्वारा दर्ज किया गया मुकदमा अपराध संख्या 152/18 की प्रथम सूचना रिपोर्ट के अवलोकन से विदित है कि यद्यपि थाने पर घटना तथा गाँव से दलितों की गिरफ्तारी दिनांक 15/5/18 को ही कर ली गयी थी परन्तु थानाध्यक्ष द्वारा थाने पर दिनांक 16/5/18 को प्रथम सूचना दर्ज करायी गयी. इससे स्पष्ट है कि पुलिस द्वारा जानबूझ कर प्रथम सूचना दर्ज करने में विलंब किया गया तथा 15/5/18 को ही  पुलिस द्वारा गाँव से 27 दलितों को गिरफ्तार कर लिया गया था परन्तु थानाध्यक्ष ने इनकी गिरफ्तारी 16/5 को दिखाई गयी है. इस प्रकार 27 दलितों को थाने पर एक दिन अवैध अभिरक्षा में रखा गया तथा उनके साथ मारपीट की गयी जो कि दंडनीय अपराध है. इसके लिए थानाध्यक्ष के विरुद्ध एससी /एसटी एक्ट के अंतर्गत केस दर्ज कर कार्रवाही की जानी चाहिए.

5.  जांच के दौरान यह ज्ञात हुआ है कि 29.05.2018 को चन्द्रावती की पुत्री की शादी है परन्तु उसे वीरेंदर चन्द व् उसके सहयोगियों की तरफ से धमकियाँ दी जा रही हैं . अतः चन्द्रावती को शादी के दौरान सभी प्रकार की सुरक्षा मुहैया कराई जाय .

6.  जाँच के दौरान ज्ञात हुआ हैकि गांव में दलित बस्ती में जलापूर्ति हेतु लगे हुए सरकारी नलकूप आधे से अधिक ख़राब पड़े हैं , जिन्हें तुरंत ठीक कराया जय  एवं इसके साथ ही गांव की सफाई हेतु नियुक्त सफाई कर्मचारी द्वारा सफाई न करने करने के कारण नालियों में गन्दगी व्याप्त है.  इस सम्बन्ध में त्वरित आवश्यक कार्यवाही की जाय .

7.  जांच के दौरान यह ज्ञात हुआ कि गांव में मनरेगा के अंतर्गत लोगों को काम नहीं मिला है जिससे उन्हें आर्थिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है . अतः उन लोगों को तुरंत मनरेगा के तहत कार्य उपलब्ध कराया जाय .

8.  जैसा कि थानाध्यक्ष द्वारा लिखी गयी प्रथम सूचना रिपोर्ट से स्पष्ट हैकि 31 दलितों को प्रथम सूचना रिपोर्ट में नामजद किया गया है जिनमें से  27 गिरफ्तार किये जा चुके हैं और 250  अज्ञात दलितों के विरुद्ध मुक़दमा दर्ज किया गया है , पुलिस की यह कार्यवाही साफ तौर पर दलित उत्पीड़न की कार्यवाही है. अतः इस मामले में कोई भी अग्रिम गिरफ़्तारी नहीं की जानी चाहिए तथा गिरफ्तार शुदा दलितों को जमानत पर रिहा किया जाय .

9.  यह ज्ञात हुआ है कि जिन दलितों की गांव तथा थाने पर पिटाई की गयी थी, उनके शारीर पर जेल में दाखिले के समय कोई भी चोट नहीं दिखाई गयी है.इसके लिए दलितों की चोटों जो कि ठाणे पर पिटाई के कारण आई हैं की मेडिकल बोर्ड द्वारा जांच करायी जाये तथा मारपीट के दोषी पुलिस कर्चारियों को दण्डित किया जाये.

10.   जांच के दौरान पाया गया कि दलितों के अधिकतर घरों में ताले लगे हुए हैं और लोग पुलिस के डर से भागे हुए हैं , गांव वालों ने बताया  कि पुलिस गांव में बराबर दबिश  दे रही है. अतः पुलिस के इस आतंक को तुरंत समाप्त किया जाय ताकि लोग अपने घरों में वापस लौट सकें .

11.   पुलिस द्वारा थाने पर घटना के दिन अस्थौला गांव की दलित बस्ती पर बड़ी संख्या में चढ़ाई की गयी जिसके दौरान महिलाओं, बच्चों तथा बुजुर्गों की निर्ममता की पिटाई की गयी जिससे एक दर्जन से अधिक लोगों को चोटें आई हैं . पुलिस द्वारा उन्हें न तो कोई डाक्टरी सहायता के लिए अस्पताल भेजा गया और न ही उनकी तरफ से कोई रिपोर्ट लिखी गयी और न ही शिवहरी पुत्र जीतू द्वारा इस सम्बन्ध में दिनांक 17.05.18 को पुलिस अधीक्षक/जिला अधिकारी/आयुक्त गोरखपुर/ डीआईजी गोरखपुर को दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर प्रथम सूचना ही दर्ज की गयी. अतः इसके आधार पर तुरंत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की जाये.  यह भी उल्लेखनीय है की जिस समय पुलिस ने गाँव में दबिश दी तो उनके साथ कोई भी महिला पुलिस नहीं थी. अतः इस लापरवाही के लिए दोषी अधिकारीयों/कर्मचारियों को दण्डित किया जाए.

12.   जैसाकि उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि इस मामले में पुलिस द्वारा घोर गैर कानूनी एवं पक्षपातपूर्ण कार्रवाही की गयी है. अतः इस मामले से सम्बंधित मुकदमे की विवेचना सीबीसीआईडी द्वारा की जाये तथा इस घटना की जांच मैजिस्ट्रेट  द्वारा करवाई जाये.

नोट: आज जब हमारा प्रतिनिधि मंडल इस मामले के सम्बन्ध में जिलाधिकारी गोरखपुर विजयेन्द्र पांडियन से उनके कार्यालय में मिलने के लिए गया  तो उसने  हमारी बात सुनने से बिलकुल मना कर दिया और कहा कि आप लोग मेरा समय बर्बाद कर रहे हैं और गलत तथ्य पेश कर रहें हैं. इतना ही नहीं उसने इसके लिए एस.आर. दारापुरी को उनके विरुद्ध कार्रवाही  करने की धमकी भी दी. इस पर प्रतिनिधि मंडल बिना कोई अग्रिम बात किये उसके कार्यालय से बाहर निकल आया. जिलाधिकारी का यह व्यवहार बिलकुल तानाशाहीवाला एवं अमर्यादित था. इस संबंध में जिलाधिकारी के विरुद्ध  मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश से शिकायत की जाएगी तथा पांडियन को गोरखपुर से हटाने की मांग की जाएगी.

 

हo/                                             हo/

हरिश्चन्द्रा आई.ए.एस.(से.नि.) पूर्व सचिव भारत सरकार                        

 

एस.आर. दारापुरी- आई.पी.एस.(से.नि.) पूर्व आईजी                                                                                                                                

दिनांक: 23/5/2018

 

 

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