भारत-चीन फिर सीमा विवाद में

आइये भारत-चीन सीमा विवाद को समझने की कोशिश करते हैं-...

India Vs China| Rajeev Ranjan Srivastava | घूमता हुआ आईना

राजीव रंजन श्रीवास्तव

बीते एक महीने से चल रहे गंभीर तनाव और युद्ध की आशंका बढ़ाने वाली खबरों के बीच भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की हाथ मिलाती तस्वीरें सुकून देने वाली हैं।

दरअसल भारत-चीन एक बार फिर सीमा विवाद के कारण तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहे हैं और बात इतनी गंभीर हो चुकी है कि दोनों देशों ने सीमा पर सैन्य बल बढ़ा दिया है। तनाव की इस आग को मीडिया में प्रसारित कुछ भ्रामक खबरों और तस्वीरों से भड़काया भी जा रहा है।

जब-जब भारत चीन के बीच तनाव बढ़ता है तब-तब भारत में चीनी सामानों के बहिष्कार का मुद्दा ज़ोर पकड़ता है, लेकिन तमाम तनावों के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार में बढ़ोत्तरी होती रही है।

आइये सबसे पहले भारत की अर्थव्यवस्था में चीन की भागीदारी पर एक नज़र डालते हैं-

पिछले दो वर्षों में भारत-चीन के बीच तनाव और मतभेद के बावजूद भारत में चीन काप्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ा है। भारत में एफडीआई के मामले में चीन सबसे तेजी से उभरता हुआ देश बन गया है, जहाँ 2011 में एफडीआई के मामले में चीन 35वें और 2014 में 28वें स्थान पर था अब 2016 में 17वें स्थान पर आ गया है।

औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) के अनुमान के अनुसार, अप्रैल 2000 और दिसंबर 2016 के बीच चीन से कुल 1.6 अरब डॉलर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया था, लेकिन भारतीय बाजार विश्लेषकों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह आंकड़ा दो अरब डॉलर से भी अधिक है।

इस बात से कोई भी इनकार नहीं कर सकता है कि भारत चीन को एक अच्छा खासा बाजार उपलब्ध करवाता है, जहां पर चीन का हर छोटा बड़ा सामान बेचा और खरीदा जाता है।

तो भले ही सामरिक दृष्टिकोण से चीन काफी मजबूत है लेकिन व्यापारिक परिस्थिति भारत के पक्ष में है जो चीन को सीमा पर युद्ध से रोकती है। .... लेकिन सीमा पर खींचतान का बराबर बने रहना दोनों देशों के रिश्ते को कमजोर करता रहता है।

आइये भारत-चीन सीमा विवाद को समझने की कोशिश करते हैं-

भारत-चीन के बीच 3,500 किमोलीटर लंबी सीमा है, जिसके कुछ हिस्से हमेशा विवाद में रहे हैं।

सीमा के निर्धारण पर असहमति के कारण ही दोनों देश 1962 में युद्ध के मैदान में भी आमने-सामने खड़े हो चुके हैं। भारत के लिए यह युद्ध एक कड़वी याद है, क्योंकि इसमें उसे हार का सामना करना पड़ा था। इस युद्ध में ज्यादातर लड़ाई 4250 मीटर (14,000 फीट) से अधिक ऊंचाई पर लड़ी गईं। चीन इलाके का लाभ उठाने में सक्षम था क्योंकि चीनी सेना का चोटी क्षेत्रों पर कब्जा था, जबकि भारतीय सैनिकों को इतनी ऊंचाई पर लड़ाई न लड़ने का अनुभव और हथियारों की आपूर्ति में कमी हमारी हार का कारण बनी।

दोनों देशों के कई सैनिक हताहत हुए। इस युद्ध में वायुसेना व नौसेना का इस्तेमाल नहीं किया गया।

चीन जीत तो गया, लेकिन यह जीत अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर उसकी निंदा का कारण बनी। दोनों देशों के बीच साढ़े तीन हज़ार किलोमीटर की लम्बी सीमा है और हर समय किसी न किसी क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी ही रहती है।

ताजा विवाद पठारी क्षेत्र डोकलाम में चीन के सड़क बनाने की कोशिश पर शुरु हुआ है।

इस इलाके को चीन में डोंगलोंग नाम से जाना जाता है। डोकलाम में चीन, सिक्किम और भूटान की सीमाएं मिलती हैं। भूटान और चीन दोनों इस इलाके पर अपना दावा करते हैं और भारत भूटान के दावे का समर्थन करता है। भारत को चिंता है कि इस सड़क का काम पूरा हो गया तो सिक्किम की ओर से उत्तर पूर्वी राज्यों को देश से जोड़ने वाली 21 किलोमीटर चौड़ी कड़ी पर चीन की पहुंच बढ़ जाएगी। चीन की चुंबी घाटी के पास भारत की इस गर्दननुमा सड़क को 'सिलीगुड़ी नेक’ भी कहते हैं। सिक्किम की यह सड़क भारत को सेवन सिस्टर्स से जोड़ती है और सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।

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