अखिलेश की विपक्षी एकता की मुहिम को “हाथ” और “हाथी” का झटका

अखिलेश की बैठक में नहीं पहुंचे बसपा और कांग्रेस... ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से मतदान कराने के पर विचार-विमर्श के लिए अखिलेश ने बुलाई थी बैठक......

अखिलेश की बैठक में नहीं पहुंचे बसपा और कांग्रेस

ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से मतदान कराने के पर विचार-विमर्श के लिए अखिलेश ने बुलाई थी बैठक

2019 में बीजेपी के विजय रथ को रोकने के लिए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार विपक्षी एकता को मजबूत करने पर जुटे हैं, लेकिन लगता है कि कांग्रेस और बसपा को अखिलेश की ये कोशिश कुछ रास नहीं आ रही, तभी तो अखिलेश की ओर से ईवीएम के मुद्दे पर बुलाई सर्वदलीय बैठक में न पहुंचकर कांग्रेस और बसपा दोनों ही पार्टियों ने शुरूआती दौरे में ही अखिलेश की मुहिम को झटका दिया है, जिसके बाद विपक्षी एकता की राह आसान नहीं दिख रही है।

दरअसल शनिवार को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट में सभी दलों के नेताओं की बैठक बुलाई थी, जिसमें कांग्रेस, बसपा समेत सभी गैरबीजेपी दलों को न्यौता भेजा गया था। लेकिन व्यस्तता का बहाना बनाकर बीएसपी और कांग्रेस के प्रतिनिधि इस बैठक में नहीं पहुंचे, जिसके बाद से ही सवाल उठ रहे हैं कि क्या 2019 से पहले ही विपक्षी एकता को किसी की नज़र लग गई है। हालांकि इस बैठक में कई अन्य दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने पर सहमति जताई लेकिन प्रदेश में दो बड़े राजनीतिक दलों का इससे दूर रहना बड़ा सवाल छोड़ गया।

वैसे कुछ राजनीतिक दल यह दावा कर रहे हैं कि बैठक सिर्फ ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से मतदान कराने के मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए थी, इसलिए इससे विपक्षी एकता को जोड़ना ठीक नहीं। लेकिन विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद ईवीएम में गड़बड़ी का मुद्दा उठाने वाली मायावती ही थीं, जिन्होंने कोर्ट में इस मुद्दे पर याचिका भी दायर की थी ऐसे में उन्हीं की पार्टी का बैठक से दूर रहना बड़े सवाल खड़े करता है...

वैसे बसपा को अगर छोड़ दिया जाए तो कांग्रेस का अखिलेश की बैठक से दूर रहना भी हैरान करने वाला है, क्योंकि विधानसभा के चुनाव दोनों पार्टियों ने साथ मिलकर लड़े थे और चुनाव के नतीजों के बाद भी दोनों तरफ से गठबंधन के स्थायी रहने के दावे किए गए थे। लेकिन जिस तरह बैठक से कांग्रेस दूर रही, उससे सपा और कांग्रेस के संबंधों के भविष्य पर भी सवाल खड़ा हो गया है और साथ ही विपक्षी एकजुटता पर भी। कयास लगाया जा रहा है कि गुजरात में कांग्रेस की सफलता के बाद शीर्ष नेतृत्व में मंथन चल रहा हैकि यूपी में सपा के बजाए बसपा से गठबंधन किया जाए।

 

 

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।