गुजरात चुनाव की घोषणा न होने को माकपा ने बताया हैरतंगेज

बहुत हैरत की वाली बात है चुनाव आयोग ने कल हिमाचल प्रदेश के लिए चुनाव की घोषणा तो की, लेकिन गुजरात विधानसभा के चुनाव की घोषणा नहीं की, जबकि दोनों राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल अगले समाप्त हो रहा है...

हाइलाइट्स

पार्टी के पोलित ब्यूरो ने आज एक बयान में कहा कि यह बहुत हैरत की वाली बात है कि चुनाव आयोग ने कल हिमाचल प्रदेश के लिए चुनाव की घोषणा तो की, लेकिन गुजरात विधानसभा के चुनाव की घोषणा नहीं की, जबकि दोनों राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल अगले वर्ष जनवरी में समाप्त हो रहा है।

नई दिल्ली 13 अक्टूबर। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) – माकपा- ने हिमाचल प्रदेश विधान सभा के चुनाव की घोषणा के साथ गुजरात में चुनाव की घोषणा न करने के लिए चुनाव आयोग की तीखी आलोचना की है।

पार्टी के पोलित ब्यूरो ने आज एक बयान में कहा कि यह बहुत हैरत की वाली बात है कि चुनाव आयोग ने कल हिमाचल प्रदेश के लिए चुनाव की घोषणा तो की, लेकिन गुजरात विधानसभा के चुनाव की घोषणा नहीं की, जबकि दोनों राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल अगले वर्ष जनवरी में समाप्त हो रहा है।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल आगामी सात जनवरी और गुजरात का 22 जनवरी को समाप्त हो रहा है।

माकपा ने कहा कि आमतौर पर यह परम्परा रही है कि जब छह माह के भीतर राज्यों के चुनाव होने हों, तो उन राज्यों के चुनाव एक साथ कराये जाते हैं।

लेकिन कल हिमाचल के चुनाव की घोषणा के बाद वहां आदर्श चुनाव आचार संहिता तो लागू कर दी गई, पर गुजरात में यह लागू नहीं है।

माकपा ने यह भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने कल यह कहा कि गुजरात के चुनाव हिमाचल के चुनाव के नतीजे आने से पहले हो जायेंगे, यानी 18 दिसंबर से पहले होंगे ।

पार्टी ने कहा कि अगर हिमाचल प्रदेश के चुनाव को देखते हुए आदर्श आचार चुनाव संहिता लागू कर दी गयी, तो गुजरात के लिए भी इसे लागू किया जाना चाहिए था।

गौरतलब है कि कल चुनाव आयोग से संवाददाता सम्मेल्लन में यह पूछा गया कि क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गुजरात रैली के कारण वहां चुनाव की घोषणा नहीं की जा रही है, तो मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस आरोप को ख़ारिज कर दिया।

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