बहुजन राजनेताओं का पूरा रेंज मनुवादी शक्तियों-सवर्णों की दलाली कर रहा है — सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार

''जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी भागीदारी'' का नारा देश के बहुजन लंबे समय से बुलंद करते रहे हैं। लेकिन अभी तक अतिपिछड़ों-पिछड़ों को संख्यानुपात में आरक्षण नहीं दिया गया।...

अतिथि लेखक

मोदी सरकार द्वारा कानून बनाकर आर्थिक आधार पर सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण (10% reservation for the upper castes on economic basis) लागू करने और इस पर बहुजन राजनेताओं (Bahujan politicians) द्वारा चुप्पी साधने पर प्रतिक्रिया स्वरूप 'सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार' (Social Justice Movement, Bihar) ने सवर्ण आरक्षण General reservation और संविधान पर हमले Attack on constitution के खिलाफ बहुजन समाज से सामाजिक न्याय आंदोलन तेज करने का आह्वान किया है और जननायक कर्पूरी ठाकुर संदेश यात्रा (Jananayak Karpuri Thakur Message Tour) की शुरुआत करते हुए पूरे बिहार में एक जागरण अभियान चलाया है। जिसकी शुरुआत गत 18 जनवरी से बिहार के भागलपुर जिले के नारायणपुर प्रखंड के भवानीपुर गांव से की गई।

भागलपुर से विशद कुमार

उक्त यात्रा चौक-चौराहों व नुक्कड़ों पर सभा एवं आम अवाम के साथ संवाद करते हुए आगे बढ़ रही है।

18 जनवरी की शुरू की गई यात्रा के दौरान जगह जगह की सभाओं को संबोधित करते हुए गौतम कुमार प्रीतम ने लोगों को बताया कि ''जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी भागीदारी'' का नारा देश के बहुजन लंबे समय से बुलंद करते रहे हैं। लेकिन अभी तक अतिपिछड़ों-पिछड़ों को संख्यानुपात में आरक्षण नहीं दिया गया। अतिपिछड़ों-पिछड़ों को केवल 27 प्रतिशत आरक्षण मिला हुआ है। जबकि आबादी के अनुपात में 52 प्रतिशत आरक्षण होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर ने मुख्यमंत्री रहते सामाजिक न्याय Social justice के लिए प्रतिबद्धता की मिसाल के साथ मनुवादी शक्तियों व सवर्णों की गाली झेलते हुए अतिपिछड़ों-पिछड़ों के लिए बिहार में आरक्षण लागू किया था। लेकिन आज जब सवर्ण आरक्षण के जरिए दलितों-अतिपिछड़ों-पिछड़ों के आरक्षण पर हमला बोला गया है, सामाजिक न्याय व आरक्षण की अवधारणा को निशाना बनाया गया है, तब बहुजन राजनेताओं का पूरा रेंज मनुवादी शक्तियों-सवर्णों की दलाली कर रहा है।

इस अवसर पर अंजनी ने कहा कि अतिपिछड़ों-पिछड़ों का आरक्षण बढ़ाने के बजाय सवर्णों को आरक्षण दिया जा रहा है। जबकि शासन-सत्ता की संस्थाओं में आज भी सवर्णों का वर्चस्व है। सवर्णों की आबादी से कई गुना ज्यादा भागीदारी है। सवर्णों का आरक्षण बहुजनों के आरक्षण पर हमला है। सवर्णो़ को आरक्षण देने के लिए संविधान बदलकर मनुविधान थोपने की कोशिश आगे बढ़ी है,इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि हमें जननायक कर्पूरी ठाकुर की विरासत को बुलंद करना होगा। आधा-अधूरा सामाजिक न्याय नहीं, बल्कि लड़कर पूरा-पूरा लेना है।

उक्त यात्रा के दौरान आगामी 27 जनवरी को पटना के गर्दनीबाग में आहुत दलितों-अतिपिछड़ों-पिछड़ों के महापंचायत में भी शामिल होने की अपील की गई।

यह यात्रा भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल के भवानीपुर गांव से शुरु होकर बलहा, सहौरी, जयरामपुर, झंडापुर काली कबूतर स्थान, अरसण्डी, अरसण्डी रविदास टोला, बिहपुर बाजार गोलम्बर चौक से गुजरते हुए बिहपुर ब्लाक चौक पर सभा के साथ सम्पन्न  हुई।

नवगछिया अनुमंडल में जननायक कर्पूरी ठाकुर संदेश यात्रा के दूसरे दिन 19 जनवरी को नुक्कड़ सभाओं को संबोधित करते हुए सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार की कोर कमिटी के सदस्य गौतम कुमार प्रीतम और अंजनी ने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर उत्पीड़ित जातियों के अलग-अलग जाति संगठनों के खिलाफ थे। वे उत्पीड़ित जातियों के संयुक्त संगठन और संगठित राजनीतिक ताकत को बुलंद करने के पक्षधर थे।आज के दौर में कर्पूरी ठाकुर के इस समझ-सोच के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है, तभी मनुवाद हमले का मुकाबला किया जा सकता है और सामाजिक न्याय की निर्णायक लड़ाई लड़ी जा सकती है।

दोनों नेताओं ने कहा कि यह साफ हो गया है कि मनुवादी शक्तियों के खिलाफ बहुजनों के सम्मान, न्याय व अधिकार की लड़ाई स्थापित दलित-पिछड़े नेतृत्व के भरोसे नहीं लड़ी जा सकती है। सवर्ण आरक्षण के मसले पर सबकी पोल खुल गई है। एक तरह से तमाम बहुजन नेताओं और कम्युनिस्ट पार्टियों तक ने भाजपा-आरएसएस के सामने समर्पण कर दिया है।

दोनों नेताओं ने कहा कि आज भी गांव-गांव में दलित-अतिपिछड़े भूमिहीन हैं, वासभूमि से वंचित हैं। नीतीश कुमार-सुशील मोदी की सरकार अविलंब भूमिसुधार आयोग की सिफारिशों को लागू करे। यह दलितों-अतिपिछड़ों के सम्मानजनक जीवन का बुनियादी सवाल है।

दोनों नेताओं ने कहा कि सरकारी स्कूलों-शैक्षणिक संस्थानों को बर्बाद कर सामाजिक न्याय की हत्या की जा रही है। सरकारें दलितों-पिछड़ों को शिक्षा से वंचित रखने की मनुवादी साजिश को आगे बढ़ा रही है।

दोनों नेताओं ने दलितों-अतिपिछड़ों-पिछड़ों के आरक्षण को 69 प्रतिशत करने , न्यायपालिका व निजी क्षेत्र में आरक्षण देने और जाति जनगणना कराने की मांग की।

यात्रा के दरम्यान सवर्ण आरक्षण व संविधान संशोधन करने के खिलाफ 27 जनवरी को गर्दनीबाग, पटना पहुंचने की अपील की गई।

यात्रा में मुख्यत: गौतम कुमार प्रीतम, नसीब रविदास, अंजनी, मो. शाकिब आलम, सूरज कुमार, मिथिलेश यादव, जयकिशोर शर्मा, पारस पासवान, दीपक कुमार दास, अनुपम दास, शशिकांत भूषण, बबलू साह, जब्बार आलम, श्याम सक्सेना, रमेश दास, चन्द्रदेव दास, नंदन पटेल, नंदलाल मंडल, बगैरह कई लोग शामिल रहे।

बताते चलें कि मोदी सरकार द्वारा आर्थिक आधार पर सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा और उसे दोनों सदनों में पारित हो जाने के बाद राष्ट्रीय स्तर इसका विरोध शुरू हुआ था और इसी कड़ी में देश के विभिन्न जन संगठनों द्वारा 12 जनवरी से 14 जनवरी 2019 तक तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी प्रतिवाद का आह्वान किया गया था। इन संगठनों में रिहाई मंच (यूपी), सामाजिक न्याय आंदोलन (बिहार), झारखंड जनतांत्रिक महासभा, बिहार फूले-अंबेडकर युवा मंच, इंडिजिनस आर्मी ऑफ इंडिया (गुजरात), बहुजन साहित्य संघ (जेएनयू, दिल्ली), अखिल भारतीय अंबेडकर महासभा, जमीयतुल कुरैशी उत्तर प्रदेश  (लखनऊ), भारतीय मूलनिवासी संगठन(इलाहाबाद), जनवादी छात्रसभा (इलाहाबाद),अवध विकास मंच (प्रतापगढ़), इंसानी बिरादरी (लखनऊ), यादव सेना(लखनऊ), आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम समाज (लखनऊ), पिछड़ा समाज महासभा उम्मीद (लखनऊ), ह्यूमन राइट वाच (लखनऊ), कारवां (आजमगढ़), फातिमा शेख सावित्री फूले काउंसलिंग और ट्रेनिंग (दिल्ली) शामिल थे।

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