कश्मीरी महिलाओं का श्रीनगर में ज्वालामुखी उबाल, महबूबा मुफ्ती भागने पर मजबूर, केन्द्र को चेतावनी

​​​​​​​कश्मीर के बच्चे-बच्चे, के दिलोदिमाग में बैठ गया है कि वे जम्मू-कश्मीर की आरएसएस से जुड़ी सरकार को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।...

नई दिल्ली। नेशनल पैंथर्स पार्टी के मुख्य संरक्षक प्रो. भीमसिंह ने भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को चेतावनी दी है कि वे यदि जम्मू-कश्मीर को भारत के साथ भावुकता से जोड़कर रखना चाहते हैं तो कश्मीर की महिलाओं की पिछले कल की चेतावनी और भावनाओं को तुरंत पहचानने की कोशिश करें। पिछले कल कश्मीर में शेरे-कश्मीर इंटरनेशनल कांफ्रेंस सैंटर में हजारों कश्मीर की भोलीभाली महिलाओं ने एक तूफानी आंधी चला दी, जैसे कि कश्मीर की खामोश, सर्द हवाओं से जुड़ी हुई कश्मीर घाटी में अचानक जलता हुआ लावा उस हाथ से उबालकर बाहर आ गया।

प्रो. भीमसिंह ने कहाकि मोदी और भारत सरकार को चाहिए कि वे जम्मू-कश्मीर के भ्रातृभाव से सदियों से लिपटे हुए माहौल में यह अंतर कैसे आ गया है, जबकि कश्मीर की बहिने और माताएं, जिन्होंने लगभग 200 साल के संघर्ष में कभी भी पत्थर नहीं उठाये, चाहे वह पंजाब की सरकार के अधीन थे या डोगरा सरकार के या 1947 के बाद जब जम्मू-कश्मीर की लोकतांत्रिक सरकार की स्थापना हुई। यह कितने आश्चर्य की बात है कि पहली बार कश्मीर के इतिहास में एक महिला मुख्यमंत्री (शासक) बनी और उसके खिलाफ हजारों महिलाएं एक आवाज बिना किसी हिसंक कार्रवाई के। कश्मीर की महिला मुख्यमंत्री को बैठक के कांफ्रेंस हॉल से भागने पर मजबूर कर दिया।   

प्रो. भीमसिंह ने प्रधानमंत्री मोदी को याद दिलाया कि यह कश्मीर के बच्चे-बच्चे, जिसमें महिलाएं भी शामिल हैं, के दिलोदिमाग में बैठ गया है कि वे जम्मू-कश्मीर की आरएसएस से जुड़ी सरकार को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।

प्रो. भीमसिंह ने मोदी जी से कहा कि उन्हें बड़ी जुर्रत के साथ फैसला लेना होगा कि वे कश्मीर को भारत के साथ रखना चाहते हैं या नहीं।

उन्होंने कहा कि मुझे पूरा यकीन है कि मोदी जी कश्मीर को भारत में रखने के लिए कोई भी कदम उठा सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि मोदी जी के पास एक ही रास्ता है जम्मू-कश्मीर को इस ज्वालामुखी से बाहर निकालने का वह है तुरंत राज्यपाल शासन, जम्मू-कश्मीर विधानसभा को बर्खास्त और जम्मू-कश्मीर के तीनों क्षेत्रों के राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ तुरंत बातचीत शुरू करनी चाहिए, ताकि जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्रवाद को जिंदा रखा जा सके।

प्रो. भीमसिंह ने कहा कि सभी जानेमाने राजनीतिक और सामाजिक नेताओं को बुलाना चाहिए, जिनमें हुर्रियत काफ्रेंस के सभी नेताओं को भी बातचीत में शामिल करना होगा।

प्रो. भीमसिंह ने कहा कि इस प्रक्रिया की कामयाबी के लिए प्रो. भीमसिंह ने श्री मोदी जी को अपने समर्थना का पूरा भरोसा दिलाया।

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