सुविधा की राजनीति कर रहे नीतीश, क्या ज़हर का घूँट पिएंगे लालू ?

टूटा महागठबंधन तो भाजपा को होगा लाभ .... हंगामा है क्यूँ बरपा, तेजस्वी तो बच्चा था जी.... जदयू ऐसा कोई भी संकेत देना नहीं चाहता, कि महागठबंधन तोड़ने की पहल वह कर रहा है।...

देशबन्धु

डीबी लाइव

बिहार देश में होने वाले राजनैतिक बदलाव का हमेशा अगुवा रहा है। बात चाहें इंदिरा गांधी के खिलाफ उठे जय प्रकाश नारायण के आंदोलन की हो या देश भर में भाजपा की जीत के रथ को रोकने की। भाजपा के 2019 के अभियान में भी बिहार की भाजपा को सबसे बड़ा रोड़ा नजर आ रहा है। यही कारण है, भाजपा बिहार में राजद जदयू महागठबंधन तो लगातार अस्थिर करने में लगी है।

टूटा महागठबंधन तो भाजपा को होगा लाभ

वर्तमान में बिहार में महागठबंधन की स्थिति काफी नाजुक नजर आ रही है, जो भाजपा के लिए सबसे लाभकारी स्थिति होगी। राजनैतिक दांव पेंच दोनों तरफ से चल रहे हैं, महागठबंधन के दल लगातार बयानबाजी कर रहे हैं, भाजपा दबाव बनाए हुए है और मीडिया लगातार ट्रायल में लगा है।

माना जा रहा है आने वाले दिन देश की राजनीति के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं, जो बताएंगे, विपक्ष की एकता बनी रहेगी या भाजपा उसमें दरार डालने में सफल हो जाएगी। अगर ऐसा होता है, जो साल 2019 में विपक्ष के बीच होने वाली किसी भी एकता की धूमिल पड़ जाएगी। हालांकि राजद और जदयू के इस झगड़े में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हस्तक्षेप किया है।

हंगामा है क्यूँ बरपा, तेजस्वी तो बच्चा था जी

सारा हंगामा राज्य के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर भ्रष्टाचार के लगे आरोप और सीबीआई छापे के बाद खड़ा हुआ है, जिसमें राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, बेटी मीसा भारती, पत्नी राबड़ी देवी के साथ राज्य के उपमुख्मंत्री और बेटे तेजस्वी यादव पर आय से अधिक संपत्ति मामले को लेकर सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से की गई कार्रवाई की गई है।

अगर बिहार की राजनीति को देखें, तो भाजपा लगातार लालू परिवार पर पिछले कुछ समय से हमलावर थी, हालांकि इस दौरान वह नीतीश कुमार पर कोई भी टिप्पणी करने से बचती नजर आ रही थी।

क्या बरकरार रहेगा महागठबंधन?

पर हाल की स्थिति में बिहार में जो राजनीतिक हालात बने हैं, उससे यह सवाल खड़ा हो गया है, कि क्या महागठबंधन बरकरार रहेगा?

अब तक की खबरों को देखें, तो राजद ने साफ कर दिया है, कि तेजस्वी यादव उप मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र नहीं देंगे, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मसले पर अपनी चुप्पी भले नहीं तोड़ रहे, लेकिन उनके दल लगातार बयानबाजी कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स यह बताने की कोशिश कर रही हैं, कि अगर तेजस्वी यादव सरकार से बायकाट करते हैं तो महागठबंधन का बिखराव तय हैं, लेकिन फिलहाल अभी सब कुछ इतना जल्द होने वाला नहीं है।

जदयू ऐसा कोई भी संकेत देना नहीं चाहता, कि महागठबंधन तोड़ने की पहल वह कर रहा है। तेजस्वी प्रकरण को लेकर नीतीश सरकार के लिए संकट खड़ा हो गया है। क्योंकि उनकी राजनीतिक छवि सुशासन बाबू की है। उनकी पार्टी भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस रखती है। वह कई नेताओं को बाहर का रास्ता भी दिखा चुकी है।

भाजपा चाहती है, अगर महागठबंधन टूटता है, तो वह आसानी से नीतीश सरकार को समर्थन दे देगी, क्योंकि वे पहले भी साथ रहे हैं।

सुविधा की राजनीति कर रहे हैं नीतीश

नीतीश भी फिलहाल सुविधा की राजनीति कर रहे हैं, राष्ट्रपति चुनाव में वे राजग के साथ हैं और उपराष्ट्रपति चुनाव में संप्रग के साथ। इसके बाद भी नीतीश यह कभी नहीं चाहेंगे कि उनकी राजनीति भाजपा के हाथ का खिलौना बने। वह जिस तरह का दबाव महागठबंधन पर बना सकते हैं, वैसा भाजपा के साथ कभी नहीं हो सकता है। लिहाजा, वह इस तरह का कोई जोखिम नहीं उठाना चाहेंगे, जिससे की उनकी सियासत पर खतरा हो।

दूसरी तरफ महागबंधन टूटने से मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण लालू और कांग्रेस की तरफ हो सकता है, क्योंकि 2019 में महागठबंधन के लिए नीतीश प्रधानमंत्री का चेहरा बन सकते हैं।

किसी से डरने वाले नहीं लालू

लालू यादव ने साफ कहा है, "मुझे भाजपा और आरएसएस के खिलाफ बोलने की सजा दी जा रही है, मैं किसी से डरने वाला नहीं हूं।"

बिहार की राजनीति में लालू की अहमियत को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। यहां की पिछड़ी जातियों में उनकी अच्छी पकड़ है। महागठबंधन ने नीतीश को सत्ता दिलाने में अहम भूमिका निभाई है, इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता है। हालांकि मुख्यमंत्री लगातार महागठबंधन के बाहर जाते रहे, मामला नोटबंदी का हो या जीएसटी के विरोध का।

नीतीश लालू और कांग्रेस की निगाह में यह कत्तई साबित नहीं होने देना चाहते हैं कि महागठबंधन उनकी मजबूरी है। वह विकल्प खुला रखना चाहते हैं।

क्या ज़हर का घूँट पिएंगे लालू ?

2019 के चुनाव कांग्रेस के लिए भी महत्वपूर्ण हैं, इसलिए वह महागठबंधन बचाए रखने के लिए लालू पर दबाव भी बना सकती है। उस स्थिति में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को सारे जहर पीने पड़ सकते हैं, क्योंकि महागठबंधन के बिखराव से जहां बिहार के साथ राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा मजबूत होगी। ऐसे में दूर की राजनीति के लिए लालू यादव तात्कालिक स्वार्थ से हट कर महामहागठबंधन की एकता के लिए सब कुछ न्यौछावर कर सकते हैं।

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