विराट कोहली शायद समझ पाएं बहुत कुछ चाहिए गावस्कर जैसा लेजेंड बनने के लिए

गावस्कर एक महान खिलाड़ी होने के साथ साथ कितने शानदार इन्सान और शालीनता के साथ बेबाक टिप्पणी करने वाले विशेषज्ञ हैं।...

अतिथि लेखक
विराट कोहली शायद समझ पाएं बहुत कुछ चाहिए गावस्कर जैसा लेजेंड बनने के लिए

अमिताभ श्रीवास्तव

आज तक पर सुनील गावस्कर के साथ विक्रांत गुप्ता की बातचीत नयी पीढ़ी के जिन टीवी दर्शकों और क्रिकेट प्रशंसकों ने देखी होगी उन्हें अंदाज़ा हो गया होगा कि गावस्कर एक महान खिलाड़ी होने के साथ साथ कितने शानदार इन्सान और शालीनता के साथ बेबाक टिप्पणी करने वाले विशेषज्ञ हैं। जिस शख्स ने डॉन ब्रैडमैन का रिकॉर्ड तोड़ा हो, सबसे ज़्यादा रनों का रिकॉर्ड बनाया हो, वेस्टइंडीज और आस्ट्रेलिया के खूंखार तेज़ गेंदबाजों का बिना हेलमेट पहने सामना करते हुए शतक ठोंके हों, वह अपने योगदान के ज़िक्र पर झेंपते हुए मुस्कुराए और बड़ी सहज विनम्रता से कहे कि उससे पहले भी विजय मर्चेंट, विजय हज़ारे, सी के नायडू और लाला अमरनाथ जैसे धाकड़ बल्लेबाज हो चुके हैं, तो वह शालीनता आपको अनायास ही मुग्ध कर जाती है। उन्होंने चेतन चौहान के गाने से लेकर इमरान खान के न्योते पर खुलकर बात की, कपिल देव से तनातनी की खबरों पर चुटकी भी ली और बताया कि सिर्फ एक बार वो गुस्से में बोले जिसमें अपनी ही गलती मानी‌। बर्मिघम टेस्ट हारने पर टीम की खिंचाई भी की।

लेकिन सबसे मनोरंजक था कार्यक्रम का शुरुआती हिस्सा जिसमें उन्होंने स्वागत के लिए खड़े एक बच्चे से पूछा कि बल्ला कैसे पकड़ते हैं। फिर उसको ग्रिप बनाने की तरकीब भी बताई।

विराट कोहली भी यह इंटरव्यू देख सकें तो बेहतर। शायद वो समझ पाएं कि विस्फोटक बल्लेबाजी और आक्रामक रवैए से आगे भी बहुत कुछ चाहिए गावस्कर जैसा लेजेंड बनने के लिए।

(अमिताभ श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार हैं, उनकी एफबी टाइमलाइन से साभार)

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