कैंसर रहित ट्यूमर है, तुरंत कराएं इलाज वरना हो सकते हैं गंभीर परिणाम

इलाज से आमतौर पर इसके रोगी के ठीक होने की पूरी संभावना होती है लेकिन ऐसे ट्यूमर का इलाज न कराने पर यह गंभीर नतीजे का कारण बन सकता है।...

देशबन्धु

कैंसर रहित ट्यूमर है, तुरंत कराएं इलाज वरना हो सकते हैं गंभीर परिणाम

क्या है नॉन-कैंसर ट्यूमर

नई दिल्ली, 4 अगस्त। नॉन-कैंसर ट्यूमर या नॉन-मेलिग्नेंट ट्यूमर कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि हैं जो न तो आस-पास के ऊतकों में बढ़ती हैं और न ही फैलती हैं। इलाज से आमतौर पर इसके रोगी के ठीक होने की पूरी संभावना होती है लेकिन ऐसे ट्यूमर का इलाज न कराने पर यह गंभीर नतीजे का कारण बन सकता है।

आर्टेमिस अस्पताल के एग्रिम इंस्टीट्यूट फॉर न्यूरो साइंसेज के न्यूरोसर्जरी एंड साइबरनाइफ सेंटर के निदेशक डॉ. आदित्य गुप्ता ने कहा,

"कैंसर रहित ट्यूमर कई प्रकार के होते हैं जैसे कि एडेमोना, श्वान्नोमा व मेलेनोमा।"

डॉ. आदित्य गुप्ता ने कहा कि एडेमोना सबसे आम प्रकार का नॉन कैंसरस ट्यूमर है जो ग्रंथियों की पतली उपकला परत से उत्पन्न हो सकता है। ऐसे ट्यूमर बनने के लिए सबसे आम स्थान यकृत, पिट्यूटरी ग्रंथियां, थायराइड ग्रंथियां, कोलन या गर्भाशय गुहा में पॉलीप्स हैं।

उन्होंने बताया कि श्वान्नोमा जो कि ऊतक नॉन-मेलिग्नेंट ट्यूमर होते हैं जो तंत्रिकाओं को कवर करते हैं, जिन्हें नर्व शीथ कहा जाता है। यह ट्यूमर एक प्रकार की कोशिका से विकसित होते हैं जिसे श्वान कोशिका कहा जाता है। यह आंतरिक कान में बहरापन का कारण बन सकता है क्योंकि हीयरिंग और बैलेंस नर्व एक साथ चलती है।

त्वचा कैंसर का सबसे खतरनाक रूप है मेलेनोमा

डॉ. गुप्ता ने कहा कि मेलेनोमा त्वचा कैंसर का सबसे खतरनाक रूप है। यह कैंसर ग्रोथ तब विकसित होती है जब त्वचा कोशिकाओं की ठीक नहीं होने वाली डीएनए क्षति (अक्सर धूप या टैनिंग बेड्स से पराबैंगनी विकिरण के कारण) आनुवांशिक दोष पैदा करती है, जो त्वचा कोशिकाओं को तेजी से द्विगुणित होने और मेलिग्नेंट ट्यूमर बनाने के लिए प्रेरित करती है। मेलेनोमा अक्सर मस्सा जैसा दिखता है, कुछ मस्सा से विकसित होते हैं। यह खास तौर पर उन लोगों में होता है जो आनुवांशिक रूप से रोग के प्रति संवदेनशील होते हैं।

सबसे उन्नत, नॉन इंवेसिव रेडियेशन थेरेपी है साइबरनाइफ रेडियेशन सर्जरी

डॉ. गुप्ता ने कहा,

"साइबरनाइफ रेडियेशन सर्जरी सबसे उन्नत, नॉन इंवेसिव रेडियेशन थेरेपी उपाय है, जिससे अधिक डोज वाले रेडियेशन की सटीक बीम की सहायता से कैंसरजन्य के साथ-साथ कैंसर रहित ट्यूमर का इलाज किया जाता है। नॉन-इंवेसिव होने के कारण, इसमें एनीस्थीसिया की जरूरत नहीं पड़ती है और न ही रक्त का नुकसान होता है।"

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