झारखंड को बचाने के लिए जनसंघर्ष की शक्तियों के प्रतिनिधियों का संसद पहुंचना जरूरी

To save Jharkhand, representatives of the forces of mass struggle must reach the Parliament....

अतिथि लेखक

झारखंड (Jharkhand) में देशी-विदेशी पूंजीपतियों द्वारा जल-जंगल-जमीन की आक्रामक लूट (grabbing of land, water and forest by capitalists), राजकीय दमन (political suppression) और सांप्रदायिक उन्माद (communal mania)-उत्पात, सामाजिक न्याय व संविधान पर हमले (attack on social justice and constitution) के खिलाफ सामाजिक संगठनों व जन संगठनों ने लगातार मोर्चा लिया है. जुझारू आंदोलन (belligerent movement)-अभियान चलाने के साथ दमन का मुकाबला किया है.जनता के आक्रोश-आकांक्षा को मजबूती से बुलंद किया है. केन्द्र व राज्य सरकारों के खिलाफ जनता के पक्ष से असली विपक्ष की भूमिका निभाई है.

To save Jharkhand, representatives of the forces of mass struggle must reach the Parliament.

भाजपा विरोधी कोई भी मोर्चा असली विपक्ष-जनसंघर्ष की शक्तियों को इग्नोर कर नहीं बन सकता है. असली विपक्ष-जनसंघर्ष की शक्तियों को छोड़कर बनने वाला भाजपा विरोधी मोर्चा (anti-BJP front) के पास भाजपा-आरएसएस को निर्णायक शिकस्त देने की ताकत व कूवत नहीं हो सकती है.

भाजपा विरोधी मोर्चा-गठबंधन के जनपक्षधर व लोकतांत्रिक चरित्र के लिए जरूरी है कि यह जनसंघर्षों की ऊर्जा व ताकत से लैस हो. मोर्चा-गठबंधन का आधार जनता का सवाल और नीति हो! इसके बगैर भाजपा विरोधी कोई भी मोर्चा भाजपा-आरएसएस को सत्ता के साथ-साथ जमीनी स्तर पर बेदखल नहीं कर सकता है!

आगामी लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर अन्य राज्यों के तरह झारखंड में भी राजनीतिक माहौल गर्म हो रहा है और मुख्य विपक्षी राजनीतिक पार्टियाँ ( काँग्रेस, JMM, JVM, RJD) भाजपा को हराने के नाम पर महागठबंधन बनाने और सीट बंटबारे को लेकर उठा-पटक कर रहे हैं, लेकिन,एजेंडा व नीति का सवाल महागठबंधन का आधार नहीं बन पा रहा है.

वर्तमान में विपक्षी राजनीतिक पार्टियों के नेता सामाजिक संगठनों एवं जनांदोलनों के साझा मंच पर मंचासीन जरूर हो रहे हैं, लेकिन सभी विपक्षी पार्टियां झारखंड के जनता के सवालों व नीतियों के प्रश्न से किनारा लेते हुए, झारखंडी जनता के आक्रोश और आकांक्षा से कटते हुए और अंततः जनसंघर्षों की ताकत को साथ में लिए बिना संयुक्त रूप से भाजपा को हराने के लिए मोर्चाबंदी में उठा-पटक कर रहे हैं.

साथ ही साथ, सामाजिक संगठनों तथा जनांदोलनों के साझा मंच से ये विपक्षी पार्टियाँ ऐसा माहौल और दबाव बना रही हैं कि मानो सामाजिक संगठनों तथा जनांदोलनों को भाजपा को हराने की पूरा का पूरा जिम्मेदारी हो, वो भी बिना किसी सवाल-जवाब के या दूसरी तरह से यूँ कहें कि इन्हीं जनसंगठनों के गलतियों के वजह से केंद्र और राज्य में भाजपा अपने विकराल रूप में आया हो और इसलिए इन जनसंगठनों को ही भाजपा को हराने और विपक्षी पार्टियों को जिताने का काम बिना जनमुद्दों को उठाए व नीतियों पर बात किये करना चाहिए!

मतलब जनसंघर्ष की शक्तियों-सामाजिक संगठन व जनसंगठनों को चुप-चाप भाजपा को हराने के लिए महागठबंधन के पीछे ख़ड़ा हो जाना चाहिए!

 

ठीक वहीं दूसरी तरफ ये विपक्षी पार्टियां और उनके नेता अपने-अपने निजी स्वार्थ को प्राथमिकता देते हुए एक-एक सीट के लिए आपस में छीना-झपटी कर रखे हैं, मानो उनके लिए भाजपा को हराना प्राथमिकता नहीं है!

और इन सबसे अलग इधर सामाजिक संगठन और जनांदोलन विपक्ष के द्वारा महागठबंधन के अंदर सीट के इस बंदर बाँट का खेल देखने के लिए मजबूर बने हुए हैं!

जबकि यह जरूरी है कि सामाजिक संगठनों व जनसंगठनों को भी झारखंडी जनता के आक्रोश-आकांक्षा के साथ सामाजिक-राजनीतिक दावेदारी को ऊंचाई देते हुए चुनावी राजनीतिक हस्तक्षेप की दिशा में मजबूती से बढ़ना चाहिए और झारखंडी समाज और राजनीति को लोकतांत्रिक दिशा देने के लिए आगे बढ़ना चाहिए.

जनसंघर्ष की ऊर्जा व ताकत झारखंड के नवनिर्माण में लगाने के लिए यह जरूरी है.सामाजिक संगठनों व जनसंगठनो को आधी-अधूरी के बजाय झारखंड में पूरी भूमिका लेनी होगी.

हम लोगों ने झारखंड भ्रमण के दौरान हासिल तथ्य व जानकारी के आधार पर सामाजिक- राजनीतिक परिस्थिति के विश्लेषण के बाद यह पाया कि आगामी लोकसभा चुनाव में RSS-भाजपा जैसी फासीवादी, पूँजीवादी, जनविरोधी, सामाजिक न्याय विरोधी ताकत को हराने के लिए या यूँ कहें समाज से RSS और सत्ता से भाजपा को बेदखल करने के लिए झारखंड में सामाजिक संगठनों तथा जनांदोलनों के बगैर कोई सशक्त मोर्चा-महागठबंधन नहीं बन सकता है!

आगामी लोकसभा चुनाव में जनसंघर्ष से जुड़े लोगों को भी मैदान में आना ही चाहिए!

सामाजिक संगठनों तथा जनांदोलनों को शामिल किए बिना, इनको चुनाव में प्रतिनिधित्व दिए बिना भाजपा को हराने के नाम पर विपक्षी पार्टियों द्वारा बनाया जाने वाला महागठबंधन खोखला होगा और झारखंडी जनता, जनसवालों, झारखंडी स्वाभिमान तथा जनता के लड़ाकू परंपरा से दूर होगा.ऐसे किसी महागठबंधन जनपक्षधर-सेकुलर-लोकतांत्रिक चरित्र कमजोर होगा. भाजपा से मुकाबला की धार कमजोर होगी.

इन चार-पांच सालों में भाजपा के द्वारा दमन और लूट झारखंड में दो जगहों पर सबसे ज्यादा हुआ है. पहला खूँटी और दूसरा गोड्डा.

और इसलिए हम लोगों का मानना है कि सामाजिक संगठनों तथा जनांदोलनों को सिर्फ मूकदर्शक नहीं बने रहना चाहिए बल्कि तमाम ज्वलंत जनसवालों को चुनाव का एजेंडा बनाने और आगामी लोकसभा चुनाव में खूँटी और गोड्डा लोकसभा सीट पर अपने चुनाव लड़ने की तैयारी करनी चाहिए, दावा जतलाना चाहिए !

साथ ही साथ विपक्षी पार्टियों को भी ये दो सीट (खूँटी और गोड्डा) पर सामाजिक संगठनों तथा जनांदोलनों के लोगों को स्वतंत्र रूप से प्रत्याशी बनाकर अपने जनपक्षधर होने का मिशाल पेश करना चाहिए.

खूँटी और गोड्डा लोकसभा सीट सामाजिक संगठनों तथा जनांदोलनों को देना झारखंड में RSS-भाजपा के खिलाफ सड़कों पर लड़ रहे जनता को सम्मान देना जैसा होगा. जनता के आक्रोश-आकांक्षा से जुड़ना होगा. भाजपा विरोधी मोर्चा का जनसंघर्ष की ऊर्जा से लैस होने के लिए यह जरूरी है.

दूसरी बात गोड्डा लोकसभा सीट सामाजिक संगठनों तथा जनांदोलनों को देने से महागठबंधन के अंदर काँग्रेस और JVM के बीच चल रहे नूरा कुश्ती, रस्साकसी को भी विराम मिलेगा, जिससे महागठबंधन के सेहत पर भी अच्छा असर पड़ेगा तथा जनता के बीच भाजपा के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ने का एक मजबूत संदेश भी जाएगा और इस लड़ाई में झारखंडी जनता भाजपा के खिलाफ अपने आप को मजबूत और ताकतवर भी महसूस कर पाएगा और भाजपा विरोधी मोर्चा भी ताकतवर होगा!

:- बीरेन्द्र कुमार,दीपक रणजीत,लक्ष्मी पूर्ति, सुनील हेम्ब्रम, अनूप महतो द्वारा संयुक्त रूप से जारी

इंकलाब जिंदाबाद

उलगुलान जिंदाबाद

झारखंडी एकता जिंदाबाद

क्या यह ख़बर/ लेख आपको पसंद आया ? कृपया कमेंट बॉक्स में कमेंट भी करें और शेयर भी करें ताकि ज्यादा लोगों तक बात पहुंचे

कृपया हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब करें

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।