प्रतिबंध के बावजूद लखनऊ में बलात्कार पीड़िताओं का हो रहा टू फिंगर टेस्ट "दो उंगली जांच"!

आरोप है कि तमाम वैज्ञानिक तकनीक होने बावजूद बलात्कार पीड़िताओं का टू फिंगर टेस्ट उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जारी है....

लखनऊ, 22 मार्च। मा. उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार बलात्कार पीड़िताओं का बलात्कार हुआ है कि नहीं, इस बात की पुष्टि के लिए टू फिंगर टेस्ट नहीं किया जाएगा. लेकिन आरोप है कि तमाम वैज्ञानिक तकनीक होने बावजूद बलात्कार पीड़िताओं का टू फिंगर टेस्ट उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जारी है. 

ह्यूमन राईट मानिटरिंग कमेटी की टीम ने टू फिंगर टेस्ट हो रहा है या नहीं, इस बात का पता करने के लिए लखनऊ की नाबालिग बलात्कार पीड़िताओं से उनकी मेडिकल जांच की प्रक्रियाओं के बारे मे पूछा तो बलात्कार पीड़िताओं ने जो बताया वो काफी चिंताजनक स्थिति को बयां करता है।

ह्यूमन राईट मानिटरिंग कमेटी के अमित अंबेडकर ने एक विज्ञप्ति में बताया कि बलात्कार पीड़िताओं से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि उनका बलात्कार हुआ कि नहीं ये जांचने के लिए डाक्टर ने टू फिंगर टेस्ट किया था। बलात्कार पीड़िता की मेडिकल जांच दो उंगली से करने के कारण बलात्कार पीड़िता ने बताया की जांच के दौरान उन्हें तकलीफ हुई और उन्होंने विरोध किया, लेकिन बलात्कार की जांच करने वाली डॉक्टर ने पीड़िताओं का हाथ दूसरे से पकड़वा दिया फिर जबरदस्ती दो उंगली टेस्ट किया। 

बलात्कार पीड़िता की मेडिकल जांच करने से पहले डाक्टर पीड़िता की ना तो सहमति लेते हैं और ना ही पीड़िता के पास उसके परिवार के लोग रहते हैं।

इस सम्बंध में ह्यूमन राईट मानिटरिंग कमेटी नें लखनऊ के लोकबन्धु हास्पिटल में तैनात महिला डाक्टर ज्योति जयसवाल से बात किया तो उन्होंने बताया कि वह बलात्कार पीड़िताओं का बलात्कार हुआ है कि नहीं इसके लिए वह टू फिंगर टेस्ट करती हैं लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में टू फिंगर टेस्ट का उल्लेख नहीं करतीं।

उपरोक्त के सम्बंध मे लोकबन्धु राजनारायण अस्पताल एलडीए कालोनी, कानपुर रोड़ लखनऊ के अधीक्षक सुरेश चौहान से बात की तो उन्होंने ऐसे मामलों की जानकारी ना होने की बात कहते हुए टालने की कोशिश किया तो उन्हें महिला डाक्टर का इन्टरव्यू दिखाया गया, तब उन्होंने पीड़िता के लिखित शिकायत पर ही डॉक्टर के ऊपर कोई कार्यवाही करनें की बात की।

अमित अंबेडकर ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों से स्पष्ट है कि सिर्फ मात्र आदेश से ही कुछ नहीं होगा हमें बलात्कार की शिकार पीड़िताओं की मेडिकल जांच के दौरान उनकी मानवीय गरिमा का पूरा ख्याल करते हुए वैज्ञानिक तकनीक से बलात्कार पीड़िताओं की जांच करनी होगी नहीं तो उन्हें ऐसी तकलीफों से गुजरना पड़ेगा।

ह्यूमन राईट मानिटरिंग कमेटी ने प्रतिबंधित टू फिंगर टेस्ट के बाद भी हो रही जांच की शिकायत बाल आयोग, महिला आयोग उत्तर प्रदेश, राष्ट्रीय महिला आयोग को पत्र भेज कर हस्तक्षेप कर बलात्कार पीड़िताओं के गरिमा सम्मान और सुरक्षा का ध्यान देते हुए तत्काल जांच के नाम पर टू फिंगर टेस्ट पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने की अपील की है।

ह्यूमन राईट मानिटरिंग कमेटी ने जांच के दौरान लिए गये सबूतों (वीडियो ) को सुरक्षित रखा है ताकि समय पर काम आएं।

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