कौन सही बोल रहा है ? प्रधानमंत्री ग़लत बोल रहे हैं या उन्हें ग़लत जानकारी दी जा रही है

पटना में प्रधानमंत्री के बयान के बाद से इस खोजबीन में लगा था कि दस हज़ार करोड़ की बात कहां से आई? क्या इसका ज़िक्र बजट में है?...

हाइलाइट्स

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने एक दिवसीय दौरे के तहत शनिवार 14 अक्टूबर को बिहार की राजधानी पटना पहुंचे थे जहाँ उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह में भाग लिया था। प्रधानमंत्री ने 10 निजी और 10 सरकारी यूनिवर्सिटी को दस हजार करोड़ रुपए देने का ऐलान करतेहुए कहा था कि

– देश की दस प्राइवेट और सरकारी यूनिवर्सिटी को विश्व स्तर का बनाना होगा।

– हमारे देश की कोई भी यूनिवर्सिटी पहले दुनिया की 200 यूनिवर्सिटीज में नहीं थी। लेकिन इस कलंक को अब मिटाना होगा।

नई दिल्ली। चर्चित एंकर रवीश कुमार ने पटना में पटना विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में दिए गए उनके भाषण पर घेरा है।

बता दें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने एक दिवसीय दौरे के तहत शनिवार 14 अक्टूबर को बिहार की राजधानी पटना पहुंचे थे जहाँ उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह में भाग लिया था। प्रधानमंत्री ने 10 निजी और 10 सरकारी यूनिवर्सिटी को दस हजार करोड़ रुपए देने का ऐलान करतेहुए कहा था कि

– देश की दस प्राइवेट और सरकारी यूनिवर्सिटी को विश्व स्तर का बनाना होगा।

– हमारे देश की कोई भी यूनिवर्सिटी पहले दुनिया की 200 यूनिवर्सिटीज में नहीं थी। लेकिन इस कलंक को अब मिटाना होगा।

–  लेकिन मैं पटना यूनिवर्सिटी को एक कदम आगे ले जाने के लिए न्योता देने आया हूं।

– केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना गुजरे वक्त की बात हो गई।

– पहले भारत को सांप-संपेरों के देश के रूप में देखा जाता था। मगर हम अब आईटी सेक्टर हब के रूप में अपनी पहचान बना चुका हैं।

– इस क्षेत्र में हमारी सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं, इस सरकार ने कुछ हिम्मत दिखाई है।

– हमारे देश में शिक्षा क्षेत्र में बदलाव बहुत धीमी गति से किए गए।

प्रधानमंत्री के इसी भाषण पर रवीश कुमार ने पड़ताल करते हुएअपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर “प्रधानमंत्री जी कौन सा आँकड़ा सही है- 50 करोड़, 10,000 करोड़ या 20,000 करोड़ ?” शीर्षक से टिप्पणी पोस्ट की है। आइए देखते हैं रवीश की टिप्पणी -

पटना में प्रधानमंत्री के बयान के बाद से इस खोजबीन में लगा था कि दस हज़ार करोड़ की बात कहां से आई? क्या इसका ज़िक्र बजट में है?

आप जानते हैं कि 2016-17 के बजट में कहा गया था कि 20 भारतीय यूनिवर्सिटी को दुनिया की सौ टॉप यूनिवर्सिटी में पहुंचाने के लिए रेगुलेटरी आर्किटेक्टर बनाया जाएगा। इससे ज़्यादा कुछ नहीं कहा गया है। 2017-18 के बजट में उच्च शिक्षा के खंड में इसका ज़िक्र नहीं है मगर व्यय वाले हिस्से में यानी पेज 186 पर इसके लिए 50 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

हम यही सोच रहे थे कि बजट में 50 करोड़ है तो 10,000 करोड़ जितनी बड़ी राशि का ज़िक्र कैसे आ गया ? क्या इतनी बड़ी राशि के लिए संसद की मंज़ूरी ज़रूरी नहीं है?

यूजीसी ने 12 सिंतबर 2017 तक बीस संस्थानों से 90 दिनों के भीतर आवेदन जमा करने का विज्ञापन निकाला है। इसके बाद हमने और अमितेश ने यूजीसी की गाइडलाइन्स चेक की। गाइडलाइन्स के पारा 6.2 पढ़ा जिसमें कहा गया है कि 20 संस्थानों को उनकी योजना का 50 से 70 फीसदी दिया जाएगा या 1000 करोड़ तक दिया जाएगा। यह राशि प्रत्येक संस्थान को पांच साल में दी जाएगी। इस हिसाब से इस योजना का कुल बजट होता है 20,000 करोड़।

लेकिन प्रधानमंत्री ने तो 10,000 करोड़ बोला था। क्या प्रधानमंत्री ने अपने स्तर पर बजट कम कर दिया? यूजीसी की वेबसाइट पर एक और गाइडलाइन्स मिलती है। इसी मामले की गाइडलाइन्स मानव संसाधन मंत्रालय की है और 2016 की है। दोनों ही गाइडलाइन्स यूजीसी और मानव संसाधन मंत्रालय की वेबसाइट पर है। 2016 की गाइडलाइन्स में लिखा है कि अपनी योजना सौंपने वाले हर संस्थान को पांच साल तक 500 करोड़ की राशि दी जा सकती है। इस हिसाब से इस योजना का कुल बजट हुआ 10,000 करोड़।

यानी प्रधानमंत्री ने जो बोला, वो 2016 के मानव संसाधन मंत्रालय की गाइडलाइन्स के अनुसार है। फिर यूजीसी ने 500 करोड़ से बढ़ाकर 1000 करोड़ कब कर दिया, किया तो क्या प्रधानमंत्री को पता नहीं चला?

यही नहीं, इस मामले में भारत सरकार ने एक गजट भी प्रकाशित किया है। इसकी तारीख है 29 अगस्त 2017। इस गजट के अनुसार निजि विश्वविद्यालयों को किसी राशि का आवंटन नहीं किया जाएगा। लेकिन परियोजना के लिए जो सरकारी राशि होगी, उसका इस्तमाल वो कर सकती हैं। इससे यही समझ आता है कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी भी सरकार से रिसर्च के लिए ग्रांट ले सकती हैं या उन्हें मिलने लगेगा। मगर चोटी की 20 यूनिवर्सिटी में पहुंचने के लिए सरकारी यूनिवर्सिटी के साथ उन्हें पैसा नहीं मिलेगा।

फिर वही बात। प्रधानमंत्री ने तो कहा है कि 10,000 करोड़ में से 10 प्राइवेट यूनिवर्सिटी को भी मिलेगा। यही बात यूजीसी और मानव संसाधन मंत्रालय की वेबसाइट पर भी है। तो सरकार का गजट, जो अंतिम और प्रमाणिक दस्तावेज़ माना जाता है, उसमें क्यों लिखा है कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी को पैसा नहीं देंगे। यह गजट भी यूजीसी की वेबसाइट UGC.AC.IN पर मौजूद है। मतलब एक ही संस्थान की वेबसाइट पर तीन तीन तरह के दस्तावेज़ हैं। पैसे को लेकर तीन-तीन तरह के दावे हैं।

समझना मुश्किल है कि कौन सही बोल रहा है। प्रधानमंत्री ग़लत बोल रहे हैं या उन्हें ग़लत जानकारी दी जा रही है, यूजीसी और मानव संसाधन मंत्रालय ने अलग अलग गाइडलाइन्स क्यों जारी की है, अगर गाइडलाइन्स एक ही है तो एक में राशि 500 करोड़ क्यों है और एक में 1000 करोड़। क्या इतनी आसानी से 10,000 करोड़ से 20,000 करोड़ हो जाता है? सिम्पल सा सवाल है प्रधानमंत्री जी, क्या आप मानव संसाधन मंत्री से पूछ सकते हैं?

तीनों दस्तावेज़ का स्क्रीन शाट दे रहा हूँ ।

पहले ग़जट का हिस्सा है। ग़जट का मुखड़ा और जो हिन्दी में लिखा है। तीसका यूजीसी की गाइडलाइन्स का हिस्सा है और चौथा, मानव संसाधन विकास मंत्रालय का।“

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