यूएन पर्यावरण प्रमुख की भारत सरकार को नसीहतनुमा झिड़की, पोलियो से निपटने वाला देश वायु प्रदूषण से क्यों नहीं निपट सकता

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यूएन पर्यावरण प्रमुख की भारत सरकार को नसीहतनुमा झिड़की, पोलियो से निपटने वाला देश वायु प्रदूषण से क्यों नहीं निपट सकता

UN environment chief’s note of hope for India’s rising air pollution

नई दिल्ली, 13 नवंबर। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण प्रमुख ने जहां एक ओर पोलियो से निपटने में भारत की प्रशंसा की है वहीं वायु प्रदूषण पर अपरोक्ष रूप से सरकार की नसीहतनुमा आलोचना की है।

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण प्रमुख एरिक सोलहम UN Environment chief Erik Solheim ने कहा है कि दिल्ली सहित कई उत्तर भारतीय शहर खतरनाक वायु प्रदूषण स्तर से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा है कि भारत ने पोलियो को खत्म करने और अन्य स्वास्थ्य आपात स्थिति से निपटने में सफलता हासिल की है और ऐसा कोई कारण नहीं है कि वायु प्रदूषण से निपटने के लिए देश ऐसा नहीं कर सकता है।

एरिक सोलहम से भारत के वायु प्रदूषण पर एक बातचीत अंग्रेज़ी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित हुई है। जिसे ट्विटर पर शेयर करते हुए उन्होंने कहा है

“हवा की खराब गुणवत्ता दुनिया के सबसे बड़े हत्यारों और वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल में से एक है।  इसका कोई जादुई समाधान नहीं है, बल्कि कई प्रकार की कार्रवाइयां हैं जिन्हें व्यक्तियों, शहर के अधिकारियों और सरकारों द्वारा किया जा सकता है। #BreatheLife”

बता दें दिवाली पश्चात् दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता में खतरनाक गिरावट दर्ज की गई थी। उत्तरी भारत में पीएम 2.5 स्तर 2000 दर्ज किया गया। लोगों ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के रात्रि 8 बजे से 10 बजे तक पटाखे जलाने की समय सीमा के आदेश की खुलकर अवहेलना की।

अंतरराष्ट्रीय संस्था सफर यानी सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फॉरकास्टिंग एंड रिसर्च का कहना था कि दिल्ली एनसीआर के हालात एक्यूआई के मापदंड से कही बहुत अधिक खराब हैं।

दिल्ली में हवा की गुणवत्ता खतरनाक, ऑक्सीजन के लिए राष्ट्रीय राजधानी का घुट रहा है दम

Delhi chokes for oxygen as air quality slips to 'hazardous'

केंद्र सरकार द्वारा संचालित वायु गुणवत्ता और मौसम पूर्वानुमान और अनुसंधान (सफर) System of Air Quality and Weather Forecasting And Research (SAFAR) के आंकड़ों का हवाला देते हुए वरिष्ठ पत्रकार व पर्यावरणविद् डॉ. सीमा जावेद ने बताया कि वाहन प्रदूषण और कोयला जलने की वजह से दिल्ली-एनसीआर वायु गुणवत्ता फिर से 'खतरनाक' हो गई है और ऑक्सीजन के लिए राष्ट्रीय राजधानी का दम घुट रहा है। उन्होंने बताया कि सोमवार को सफर ने वायु गुणवत्ता में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 स्तर 231 पर दर्ज किया, जबकि पीएम 10 को नई दिल्ली में 402 पर दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि 401-500 के बीच एक एक्यूआई को गंभीर / खतरनाक के रूप में चिह्नित किया जाता है।

वायु प्रदूषण बच्चों के स्वास्थ्य के लिये सबसे बड़ा खतरा बन गया है। पांच साल से कम उम्र के 10 बच्चों की मौत में से 1 बच्चे की मौत प्रदूषित हवा की वजह से हो रही है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की वायु प्रदूषण और बच्चों के स्वास्थ्य पर जारी नई रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में 18 साल से कम उम्र के 93% प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। ‘वायु प्रदूषण और बाल स्वास्थ्य: स्वच्छ वायु निर्धारित करना’ नाम से जारी इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2016 में, वायु प्रदूषण से होने वाले श्वसन संबंधी बीमारियों की वजह से दुनिया भर में पांच साल से कम उम्र के 5.4 लाख बच्चों की मौत हुई है।

याद दिला दें विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने प्रदूषण पर अपनी ताज़ा ग्लोबल रिपोर्ट में आगाह किया है कि दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में से 14 भारत में हैं। भारत दुनिया का सबसे प्रदूषित देश है जहां हर साल 20 लाख से ज़्यादा लोग प्रदूषित हवा की वजह से मरते हैं। ये तादाद दुनिया में सबसे ज़्यादा है।

वायु प्रदूषण से संबंधित मृत्यु दर और बीमारी का बोझ भारत में दुनिया में सबसे ज्यादा है। भारत में खराब हवा की गुणवत्ता के कारण हर साल दो मिलियन से अधिक मौतें होती हैं, जो वैश्विक मौतों का 25% है।

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण प्रमुख की नसीहत के बाद शायद सरकार जागे और स्वच्छ ऊर्जा व स्वच्छ वायु के लिए आवश्यक कदम उठाकर जलवायु परिवर्तन से हो रहे पर्यावरणीय नुकसान को रोकने के लिए अपनी जिम्मेदारी समझे। नागरिकों को भी जागरूर होना पड़ेगा नहीं तो आने वाली पीढ़ियां वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम झेलेंगी

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