निजीकरण के निर्णय के विरोध में बिजली कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन जारी

शासन और ऊर्जा विभाग के उच्च अधिकारियों के दमनकारी रवैये से बिजली उद्योग में अशांति का माहौल –...

शासन और ऊर्जा विभाग के उच्च अधिकारियों के दमनकारी रवैये से बिजली उद्योग में अशांति का माहौल –

23 मार्च की वीडिओ कान्फ्रेंसिंग का बहिष्कार होगा

05 शहरों के फ्रेंचाइजीकरण के पहले आगरा की समीक्षा और सी ए जी आडिट की मांग

लखनऊ, 21 मार्च। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र ने प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ को पत्र भेजकर कहा है कि निजीकरण के विरोध में सरकार का ध्यानाकर्षण करने हेतु बिजली कर्मचारियों द्वारा चलाये जा रहे शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन को कुचलने के लिए प्रदेश शासन एवं ऊर्जा विभाग के उच्च अधिकारीयों द्वारा जिस प्रकार का दमनात्मक रवैया अपनाया जा रहा है उससे बिजली उद्योग में अनावश्यक तौर पर टकराव का वातावरण बन रहा है। समिति ने पत्र में लिखा है कि निजीकरण के विरोध में समिति द्वारा दी गयी नोटिस में 27 मार्च को कार्य बहिष्कार की सूचना दी गयी है। कार्य बहिष्कार से बिजली उत्पादन घरों, 765 /400 के वी ट्रांसमिशन और सिस्टम आपरेशन की पाली में कार्यरत कर्मचारियों को अलग रखा गया है जिससे आम जनता को बिजली ठप्प होने वाली कठिनाई का सामना न करना पड़े। किन्तु अत्यंत दुर्भाग्य का विषय है कि मुख्य सचिव ने इस बाबत जारी सर्कुलर में सामान्य लोकतान्त्रिक विरोध को हड़ताल बताकर दमनात्मक कार्यवाही आदि के आदेश जारी कर दिए हैं जिससे बिजली निगमों में कार्य का माहौल ख़राब हो रहा है। संघर्ष समिति ने मुख्य मंत्री जी को सूचित कर दिया है कि ऐसे माहौल में 23 मार्च को पावर कार्पोरेशन के चेयरमैन की वीडिओ कान्फ्रेसिंग का बहिष्कार किया जाएगा।

विद्युत् कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के प्रमुख पदाधिकारियों शैलेन्द्र दुबे, राजीव सिंह, गिरीश पाण्डे, सदरुद्दीन राना, सुहेल आबिद,राजेन्द्र घिल्डियाल,बिपिन प्रकाश वर्मा,महेंद्र राय,परशुराम,करतार प्रसाद,मो इलियास,पी एन तिवारी,पी एन राय,पवन श्रीवास्तव,पूसे लाल,ए के श्रीवास्तव ने आज जारी बयान में 05 शहरों के फ्रेंचाइजीकरण की नीति और नीयत पर सवाल खड़ा करते हुए दावा किया कि जिन पांच शहरों के निजीकरण का फैसला लिया गया है उन शहरों में बिजली राजस्व में वृद्धि और मिलने वाला राजस्व आगरा फ्रेंचाइजी टोरेंट से मिलने वाले राजस्व से अधिक है ऐसे में सरकार को यह बताना चाहिए कि इन शहरों के निजीकरण का आधार क्या है ?

संघर्ष समिति ने यह सवाल भी उठाया कि आगरा में निजी कंपनी की उपलब्धि के विषय में एक निजी सलाहकार की रिपोर्ट को आधार मान कर ढिंढोरा पीटना कितना उचित है। उन्होंने कहा कि टोरेंट कंपनी के विगत 08 साल के आगरा के कार्यों का सी ए जी से निष्पक्ष आडिट कराया जाये तब असलियत सामने आएगी और आम जनता को पता चलेगा कि निजीकरण के नाम पर अरबों रु का घोटाला हो रहा है। समिति ने यह भी मांग की है कि बिजली बेंचने वाली निजी कंपनियों रिलायंस, बजाज, लैंको, जे पी, जी वी के आदि का भी सी ए जी आडिट कराया जाये जिससे इनसे काफी महंगी बिजली खरीद का फर्जीवाड़ा उजागर हो सके। समिति ने आरोप लगाया कि निजी कंपनियों का सी ए जी आडिट कराने को सरकार तैयार नहीं है इसीलिये बड़े घोटालों को अंजाम देने हेतु बड़े औद्योगिक व् वाणिज्यिक शहरों के बिजली वितरण का निजीकरण किया जा रहा है।

इस बीच आज तीसरे दिन भी लखनऊ सहित प्रदेश भर में जिला व परियोजना मुख्यालयों पर बिजली कर्मचारियों की विरोध सभा व प्रदर्शन जारी रहे।

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