#सवर्ण_आरक्षण_वापस_लो राष्ट्रव्यापी प्रतिवाद, भागलपुर में हुआ जोरदार विरोध! सैकड़ों उतरे सड़क पर...

भागलपुर में बिहार फुले-अंबेडकर युवा मंच और सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार के बैनर तले सवर्ण आरक्षण व संविधान संशोधन के खिलाफ तीन दिवसीय (12-13-14 जनवरी) राष्ट्रव्यापी प्रतिवाद के तहत विरोध मार्च हुआ....

भागलपुर 13 जनवरी। भागलपुर में बिहार फुले-अंबेडकर युवा मंच और सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार के बैनर तले सवर्ण आरक्षण व संविधान संशोधन के खिलाफ तीन दिवसीय (12-13-14 जनवरी) राष्ट्रव्यापी प्रतिवाद के तहत विरोध मार्च हुआ.

मार्च तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय परिसर के डॉ. भीमराव अंबेडकर कल्याण छात्रावास संख्या -2 से शुरू होकर शहर के खलीफाबाग चौक से गुजरते हुए स्टेशन चौक स्थित डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा तक पहुंचा. स्टेशन चौक पर सभा हुई.

सवर्ण आरक्षण और संविधान संशोधन का भागलपुर में हुआ, जोरदार विरोध!

इस मौके पर डॉ. विलक्षण रविदास ने कहा कि केन्द्र सरकार की समूह ए की नौकरियों में सवर्ण -74.48%, ओबीसी - 8.37% व एससी- 12.6% है.अभी भी एससी, एसटी व ओबीसी की भागीदारी आबादी के अनुपात में काफी कम है. लेकिन आरक्षण आर्थिक आधार पर सवर्णों को दिया जा रहा है. जबकि सत्ता व शासन की विभिन्न संस्थाओं और क्षेत्रों में बहुजनों की संख्यानुपात में भागीदारी की गारंटी के लिए आरक्षण की सीमा 50% से बढ़ाकर कम से कम 69% करना चाहिए.

आरएसएस के संविधान बदलने और दलितों-पिछड़ों के आरक्षण को खत्म करने का आरएसएस का एजेंडा

सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार की कोर कमिटी सदस्य अंजनी और बिहार फुले-अंबेडकर युवा मंच के अजय कुमार राम ने कहा कि आर्थिक आधार पर सवर्ण आरक्षण के जरिए संविधान की मूल संरचना व वैचारिक आधार को बदलने का काम किया गया है. नरेन्द्र मोदी सरकार ने आरएसएस के संविधान बदलने और दलितों-पिछड़ों के आरक्षण को खत्म करने के एजेंडा पर आगे बढ़ने का काम किया है.

मिथिलेश विश्वास और गौतम कुमार प्रीतम ने कहा कि सवर्णों को आरक्षण देने के जरिए दलितों-आदिवासियों-पिछड़ों के आरक्षण को खत्म करने की साजिश आगे बढ़ी है. शासन-सत्ता की संस्थाओं में दलितों-आदिवासियों-पिछड़ों की भागीदारी घटेगा. यह खतरनाक है.

सौरभ राणा और त्रिलोकी कुमार ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने और राष्ट्र निर्माण के लिए जरूरी है कि शासन-सत्ता की विभिन्न संस्थाओं व क्षेत्रों में दलितों-आदिवासियों-पिछड़ों की संख्यानुपात में भागीदारी हो. लेकिन नरेन्द्र मोदी सरकार ने सवर्णों को आरक्षण देकर लोकतंत्र को कमजोर करने और एक आधुनिक राष्ट्र के निर्माण को रोकने का काम किया है. इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

सौरभ तिवारी और अभिषेक आनंद ने कहा कि आरक्षण आर्थिक विषमता मिटाने व गरीबी दूर करने का एजेंडा नहीं है. नरेन्द्र मोदी सरकार आरक्षण की गलत व्याख्या कर रहा है. समाज को बरगलाने का काम कर रहा है.

रामानंद पासवान और अंशदेव निराला ने कहा कि दलितों-आदिवासियों-पिछड़ों के राजनीतिक नेतृत्व ने विश्वासघात व गद्दारी का इतिहास बनाया है. बहुजन समाज को बड़ी एकजुटता के साथ सड़कों पर उतर कर अपनी सामाजिक-राजनीतिक दावेदारी को बुलंद करना होगा. सड़कों पर निर्णायक लड़ाई लड़नी होगी.

सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार कोर कमिटी सदस्य रिंकु यादव और विभूति ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार इतिहास का चक्का पीछे की और घुमाना चाह रही है. यह कतई संभव नहीं है. बहुजन समाज सड़कों पर लड़ेगा और इस सरकार को उखाड़ फेंककर डॉ. अंबेडकर के सपनों का नया भारत बनाने के लिए आगे बढ़ेगा. गद्दार बहुजन नेताओं समय भी हिसाब-किताब लिया जाएगा.

मार्च व सभा में अर्जुन शर्मा, वीरेंद्र गौतम, दीपक, सुधांशु, अमित यादव, विष्णुदेव दास, महेश अंबेडकर, राजेश रौशन, विजय कुमार दास, चंद्रहास यादव, प्रियरंजन, रंजीत, विकास, राकेश, अनिकेत, रूपेश विश्वास, नंद किशोर, दिलीप, गोलू, शंभु मांझी, सूरज, सुंदन, ऋषि, दीध्र, लक्ष्मण,सोनम कुमार सहित सैंकड़ों मौजूद थे.

सभा का संचालन बिहार फुले-अंबेडकर युवा मंच के अजय कुमार राम ने किया.

क्या यह ख़बर/ लेख आपको पसंद आया ? कृपया कमेंट बॉक्स में कमेंट भी करें और शेयर भी करें ताकि ज्यादा लोगों तक बात पहुंचे

कृपया हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब करें

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।