क्या है वायु प्रदूषण और फेफड़ों का संबंध

वायु प्रदूषण में कुछ क्षेत्रों में प्रसार अस्थमा बढ़ा सकता है।...

क्या है वायु प्रदूषण और फेफड़ों का संबंध

नई दिल्ली, 15 अक्तूबर। वायु प्रदूषण में कुछ क्षेत्रों में प्रसार अस्थमा बढ़ा सकता है। कई शोध में अमेरिका के लॉस एंजिल्स जैसे क्षेत्रों में वायु प्रदूषण का एलर्जी श्वसन रोग पर प्रभाव देखने को मिला। इसमें गैसोलीन इंजन और डीजल कणों दोनों से उत्पन्न वायु प्रदूषण शामिल है।

हार्ट केयर फाउंडेशन के अध्यक्ष पद्म श्री डॉ. केके अग्रवाल के मुताबिक वायु प्रदूषण और फेफड़ों की बीमारी के बीच संबंध तो पहले से मालूम है, लेकिन वायु प्रदूषण और अस्थमा के बीच संबंध के विषय में तथ्य कम स्पष्ट हैं।

उदाहरण के तौर पर अमेरिका के छह शहरों में किए गए एक अध्ययन में प्रदूषण के स्तर और क्रोनिक खांसी व ब्रोंकाइटिस के बीच सीधा संबंध पाया गया। लेकिन कण एकाग्रता और अस्थमा, लगातार नाक बहना, या हे फीवर के बीच सीधा संबंध देखने को नहीं मिला। यह इसलिए भी हो सकता है कि अस्थमा का संबंध विशेष प्रकार के प्रदूषण से है, जबकि अन्य श्वसन रोग का संबंध कुल वायु प्रदूषण से है।

जबकि एक अन्य अध्ययन में पूर्वी जर्मनी में सल्फर डाईऑक्साइड (SO2) व अन्य कणों का स्तर लगातार उच्च था जबकि पश्चिमी जर्मनी में SO2 का स्तर कम था, हालाँकि वहां नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) का स्तर थोड़ा अधिक था।

पश्चिमी जर्मनी के कस्बों में अस्थमा और एटॉपी की प्रसार की दर कम थी, जबकि पूर्वी जर्मनी के कस्बों में ब्रोंकाइटिस की दर अधिक थी।

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