दीपावली पर त्वचा को कैसे रखें सुरक्षित

दीपावली खुशियों और रोशनी का पर्व है, लेकिन इस पर्व पर आतिशबाजी के प्रचलन के चलते असावधानियां बरतने पर प्रतिवर्ष हजारों लोग और बच्चे घायल हो जाते हैं।...

दीपावली पर त्वचा को कैसे रखें सुरक्षित

नई दिल्ली/ कौशाम्बी, (गाजियाबाद) 6 नवंबर 2018.

दीपों का पर्व दीपावली आ गया है। इसके आगमन की खुशियों के बीच ही दीपावली पर पटाखों से से होने वाले प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की जाने लगी है।

पटाखे जलाने से निकले धुएं में सल्फर डाईऑक्साइड, नाइट्रोजन डाईऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, सीसा, आर्सेनिक, बेंजीन, अमोनिया जैसे कई ज़हर सांस के जरिये शरीर में घुलते हैं। इनका कुप्रभाव परिवेश में मौजूद पशु-पक्षियों पर भी होता है। यही नहीं इससे उपजा करोड़ों टन कचरे का निबटान भी बड़ी समस्या है। यदि इसे जलाया जाए तो भयानक वायु प्रदूषण होता है। यदि इसके कागज वाले हिस्से को रिसाइकल किया जाए तो भी जहर प्रकृति में समाता है और यदि इसे डंपिंग में यूं ही पड़ा रहने दिया जाए तो इसके विषैले कण जमीन में जज्ब होकर भूजल और जमीन को स्थाई और लाइलाज स्तर पर जहरीला कर देते हैं। वरिष्ठ पत्रकार व पर्यावरणविद् पंकज चतुर्वेदी कहते हैं कि वैसे तो ढेर सारी कानून पहले से मौजूद हैं लेकिन आतिशबाजी एक सामाजिक कुरीति है और इसका हल समाज के पास ही है।

खुशियों और रोशनी का पर्व है दीपावली, लेकिन न बरतें असावधानी

DR PN Arora Yashoda Hospitalयशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशाम्बी,गाज़ियाबाद के वरिष्ठ प्लास्टिक, बर्न एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जन डॉ मुकेश कुमार एवं डॉ मनोज बंसल ने दीपावली के अवसर पर लोगों को जागरूक करते हुए कहा है कि दीपावली खुशियों और रोशनी का पर्व है, लेकिन इस पर्व पर आतिशबाजी के प्रचलन के चलते असावधानियां बरतने पर प्रतिवर्ष हजारों लोग और बच्चे घायल हो जाते हैं।

असावधानी बरतने के कारण होती हैं आतिशबाजी से जलने की लगभग 95 प्रतिशत घटनाएं

यशोदा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशाम्बी (गाज़ियाबाद) के प्रबंध निदेशक डॉ. पी. एन. अरोड़ा जी कहा कि दीपावली पर आतिशबाजी से जलने की लगभग 95 प्रतिशत घटनाएं असावधानी बरतने के कारण होती हैं। आतिशबाजी को सावधानी से चलाकर जलने की अधिकांश दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि दीपावली के उपलक्ष्य में पटाखे चलाने के वक्त क्या करें और क्या नहीं करें, इस बारे में कुछ सुझावों पर अमल करना आपकी दीपावली को सुरक्षित मनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है...

दीपावली पर सुझाव

- फुस्स हो चुके पटाखों को दोबारा आग न लगाएं। भले ही उनका पलीता पूरा न जला हो, किंतु वह फिर भी फट सकता है। कुछ मिनट तक इंतजार करें और फिर उस पर पानी डाल दें।

- बंद जगह में पटाखे न चलाएं।

- पटाखे जेब में न रखें। ये विस्फोटक हैं और जलाए बगैर भी फट सकते हैं।

- धातु या शीशे की किसी चीज में पटाखे न जलाएं।

- आतिशबाजी के लेबल पर लिखे दिशा-निर्देशों को पढ़ें।

- ज्वलनशील चीजों और जगहों से काफी दूर पटाखे चलाएं। जैसे पेड़, सूखी घास और भवन आदि से दूर स्थानों पर।

- ज्वलनशील पदार्थों से दूर, रेत भरी बाल्टी में कम से कम आधी गहराई पर जले पटाखों के अवशेषों को दबा दें।

-नल से लगी पाइप या बाल्टी के जरिए पानी को पास ही रखें ताकि पटाखे छूटने के बाद उन्हें पानी में भिगोया जा सके।

- फुलझड़ी आदि रोशनी करने वाले पटाखों को अपने से एक हाथ दूर रखें और अपना चेहरा परे कर लें।

- फुलझड़ी आदि चिंगारियों को पानी से ठंडा करें और बच्चों से सुरक्षित दूरी पर रखें।

पटाखों से जलने पर क्या करें

What to do if fireworks burn

वरिष्ठ प्लास्टिक, बर्न एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जन डॉ मुकेश कुमारवरिष्ठ प्लास्टिक, बर्न एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जन डॉ मुकेश कुमार बताते हैं कि किसी भी व्यक्ति के पटाखों से या अन्य किसी स्थिति में आग से जल जाने पर पटाखों की जलन के लिए जली हुई जगह पर शीतल जल डालें (पानी बहुत ठंडा नहीं होना चाहिए)। अगर पानी उपलब्ध न हो, तो कोई भी पिए जा सकने वाले तरल पदार्थ का इस्तेमाल किया जा सकता है।

- जले हुए स्थान से तुरंत कपड़ा हटाएं।

- साफ व शीतल पदार्थ से जली हुई जगह को 3 से 5 मिनट तक दबाएं। बर्फ का इस्तेमाल न करें, क्योंकि उससे चोट को ठीक होने में ज्यादा समय लग सकता है।

- जले हुए भाग पर मक्खन, चिकनाई, पावडर या अन्य इस तरह की कोई चीज न लगाएं, क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

- यदि जला हुआ स्थान छोटा है, तो उस पर ढिलाई के साथ स्टेराइल गॉज पैड या पट्टी लगाएं।

- यदि चोटिल स्थान का दायरा कम है, तो उसे साफ रखें और निरंतर शीतल पदार्थ से दबाव देते रहें। अगले 24 घंटों तक ढीली पट्टी बांधे रखें।

शीघ्र ही चिकित्सकीय मदद लें - जब जलन का आकार बड़ा हो। जले हुए भाग को साफ व कोमल कपड़े या तौलिए से ढकें।

डॉ मुकेश कुमार ने बताया कि

"अगर कोई गंभीर रूप से जल गया है तो उसे फौरन कंबल में लपेटें और अस्पताल ले जाएं। जले हुए व्यक्ति के कपड़े उतारने का प्रयास न करें, इससे जली हुई त्वचा पर बुरा प्रभाव पड़ने की संभावना होती है। जली त्वचा पर केले का पत्ता बांधना कारगर होता है, क्योंकि इससे ठंढक मिलती है और आराम भी।"

जलन में पहले त्वचा की बाहरी पर्त चोटिल होती है और फिर अंदरूनी परतों पर असर होता है। जलन की गहराई गर्मी की प्रचंडता पर और उस समयावधि पर निर्भर करती है, जब तक त्वचा गर्मी के संपर्क में रही। उदाहरण के लिए जब हाथ जले हों, तो यह हो सकता है कि हाथ के पृष्ठभाग की त्वचा पतली होने की वजह से पूरी जल गई हो, जबकि हथेली की ओर का भाग मोटी त्वचा होने के कारण पूरा न जला हो। सतही तौर पर जली त्वचा तेजी से ठीक हो जाती है, जबकि पूरी तरह से जली त्वचा स्किन ग्राफ्ट (त्वचा प्रत्यारोपण - skin grafts) ऑपरेशन के बगैर ठीक नहीं हो सकती। सतही तौर पर जली त्वचा में फफोले पड़ जाते हैं और उनमें से रंगहीन द्रव निकलता है। ये बर्न पीड़ा देते हैं, लेकिन यदि संक्रमण से होने वाली जटिलताओं से बचा जा सके, तो ये कुछ ही हफ्तों में ठीक हो जाते हैं। बिजली, विकिरण, तेज असर वाले रसायनों और आग से होने वाली जलन के मामलों में घाव स्किन ग्राफ्टिंग (त्वचा प्रत्यारोपण) के बगैर ठीक नहीं होते। यदि चोटिल स्थान पर नई त्वचा प्रत्यारोपित न की जाए, तो वहां काफी विकृति आ जाती है और बड़ा निशान भी रह जाता है। स्किन ग्राफ्टिंग जलने के पहले हफ्ते में ही की जा सकती है।

दीपावली पर क्या बरतें सावधानी

Care tips on Deepawali

दीपावली उत्सव के लिए आप सभी काफी उत्साहित होंगे। मगर दीपावली में पटाखे जलाने के कारण प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, जिसका असर सेहत के साथ-साथ त्वचा पर भी पड़ता है। पटाखों में मौजूद हानिकारक तत्व त्वचा के लिए हानिकारक होते हैं, जिससे पिंपल्स, मुंहासे और दाग-धब्बे जैसी समस्या हो सकती है। इस दिन घर में बंद रहना तो संभव नहीं लेकिन इस दौरान आप कुछ सावधानियां तो बरत ही सकते हैं। इस त्यौहार के मौसम में अपने शरीर पर बॉडी फाउंडेशन या क्रीम का इस्तेमाल करें। इससे त्वचा में निखार आएगा और साथ ही खुले छिद्र भी बंद होंगे। इस बात का ध्यान रखे कि चेहरे और बॉडी फाउंडेशन शेड एक ही हो।

डॉ मुकेश कुमार ने कहा,

"पटाखों में कई तरह के रसायन प्रयोग किए जाते हैं, जिसकी वजह से अगर हम न भी जलें तो भी उसका धुंआ हमारी त्वचा को बहुत नुकसान पहुंचता है और हमारी त्वचा रूखी हो जाती है। इससे बचने के लिए दिन में कम से कम आठ-10 ग्लास पानी पीएं, इसके अलावा अच्छे मॉइश्चराइजर का प्रयोग करें तथा चेहरे और शरीर के अन्य अंग जो खुले हों, उनको किसी अच्छे रसायन मुक्त क्लिंजर से साफ करें।"

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दीपावली पर प्रदूषण : एक सामाजिक कुरीति है आतिशबाजी

 

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Not burn firecrackers in diwali in hindi

 

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