अमरीकी डॉक्टर का विचार: मैक्स हॉस्पिटल दिल्ली ने डॉक्टर को बर्खास्त कर अपना पल्ला छुड़ाया.

मीडिया को जांचना चाहिए और तथ्यों को प्रस्तुत करना चाहिए। फैसले का वितरण मीडिया का काम नहीं हैI...

शिकागो, 8 दिसंबर। हाल ही में हुई नई दिल्ली में मैक्स अस्पताल में प्री-टर्म शिशुओं की मृत्यु की घटना के संदर्भ में, शिकागो में कार्यरत एक बोर्ड सर्टिफाइड अभ्यासरत नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. मुनीश कुमार रायजादा ने कहा है कि मैक्स हॉस्पिटल दिल्ली ने डॉक्टर को बर्खास्त कर अपना पल्ला छुड़ाया है।

डॉ. मुनीश कुमार रायजादा ने कहा कि उन्होंने मीडिया में इस कवरेज का अध्ययन किया और मैक्स अस्पताल में जुड़वा बच्चों को संभालने वाले नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. एपी मेहता से भी बात की।

डॉ. मुनीश कुमार रायजादा ने कहा कि

1. इन नवजात शिशु का 22-23 सप्ताह गर्भकालीन (gestation) पर प्री टर्म का जन्म हुआI पश्चिमी मेडिकल समुदाय में भी, यह माना जाता है कि इस गर्भकालीन आयु में जीवित रहने की संभावना बहुत कम है। 22-24 गर्भकालीन उम्र के बीच के भ्रूण को बॉर्डर लाइन viability  का माना जाता है। 22 सप्ताहों में पैदा होने वाले बच्चों में 2% जीवित रहने की संभावना है और ऐसे बच्चों में न्यूरोदेवमेंटैनल समस्याएं होने का 85% से 9 0% जोखिम होता है।

2. इस केस में शुरुआत से ही, परिवार को मेडिकल निर्णय लेने में शामिल किया गया था। प्रसव के पहले और बाद में परिवार से इन होने वाले बच्चों की जिन्दा रहने की संभावना, लंबी अवधि के complications, और उपचार विकल्पों पर चर्चा की गई। पूरी समझ के बाद परिवार ने डीएनआर (Do Not Resusciate) कागजात पर हस्ताक्षर किए।

3. इन शिशुओं के पैदा होने पर Comfort Care शुरू की गयी, जो देखभाल का मानक हैI

4. डॉ ए पी मेहता के अनुसार, उन्होंने नवजात मृतकों को घोषित नहीं किया।

5. किसी स्टेज पर नर्सों द्वारा इन शिशुओं को परिवार को सौंप दिया गया (मीडिया खबरों के हिसाब से एक प्लास्टिक की थैली में)I डॉ. मेहता के अनुसार यह कदम उनको सूचित किए बिना लिया गया।

डॉ. मुनीश कुमार रायजादा ने कहा कि मैं यह मान रहा हूं कि यह मैक्स हॉस्पिटल में कोई पहली प्री टर्म डिलीवरी तो होगी नहीं ! अस्पताल के पास परिवार में पूर्वकाल नवजात शिशुओं के निर्वहन और सौंपने के संबंध में एक नीति तो रही होगी? क्या नर्स ने मौजूदा अस्पताल की नीति का पालन नहीं किया ?

6. डॉ. मुनीश कुमार रायजादा ने कहा कि परिवार ने हस्पताल के बाहर पाया कि नवजात शिशु का शरीर हिल रहा है। इस गर्भकालीन आयु के शिशुओं में जन्म के बाद, घंटों के लिए ह्रदय का धडकना या सांस का अनियमित चलना या हाथ पाँव का कभी कभी चलना असामान्य नहीं है। हालांकि, बच्चे को मृतक घोषित करने से पहले परिवार के पास नहीं सौंपा जाना चाहिए था। यह अति असंवेदनशील हैI

7. डॉ. मुनीश कुमार रायजादा ने कहा कि जब यह तथ्य मैक्स अस्पताल के नोटिस में लाया गया था, तो चिकित्सकों, नर्सों, अस्पताल प्रशासन, उच्च जोखिम समिति (high risk committee) और नैतिकता समिति (ethical committee) को एक-दूसरे के साथ संवाद करना चाहिए था और उन्हें परिवार से मिल कर इस मुद्दे को लिया जाना चाहिए थाI हालांकि यह एक दर्दनाक अनुभव था, लेकिन यह भी सच है कि 22- 23 सप्ताह के इस शिशु के लिए भाग्य बदलने वाली परिस्तिथि नहीं थी।

8. डॉ. मुनीश कुमार रायजादा ने कहा कि पूरा केस सुनने व समझने से लगता है कि नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ की क्रिमिनल लापरवाही का संकेत नहीं हैI

9. डॉ. मुनीश कुमार रायजादा ने कहा कि मीडिया ने - इस मामले पर गंभीर रूप से देखे बिना - फैसला सुनाने वाले अंदाज में डॉक्टर को दोषी और लापरवाह ठहरा दिया।

10. डॉ. मुनीश कुमार रायजादा ने कहा कि यह पूरी घटना परिवार के लिए और साथ ही स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं के लिए भी दर्दनाक है। अस्पताल ने अपनी जान छुड़वा, डॉक्टरों को बलि का बकरा बना दिया व उन्हें बर्खास्त कर दिया!

डॉ. मुनीश कुमार रायजादा ने अपील की है कि :

डॉ. ए पी मेहता और उनके सहयोगी डॉ. विशाल गुप्ता के समर्थन में डॉक्टरों को आगे आना चाहिए!

उन्होंने अपील की कि मैक्स अस्पताल को प्रोफेशनल एप्रोच लेते हुए इन चिकित्सकों को बहाल करना चाहिए।

डॉ. मुनीश कुमार रायजादा ने अपील की है कि :

डॉ. मुनीश कुमार रायजादा ने स्वास्थ्य मंत्रालय से भी अपील की है कि मंत्रालय को जिम्मेदारी से कार्य करना चाहिए और पूर्ण निष्पक्ष जांच के पहले बयान जारी करने की जल्दी नहीं करना चाहिए।

डॉ. मुनीश कुमार रायजादा ने अपील की है कि मीडिया को जांचना चाहिए और तथ्यों को प्रस्तुत करना चाहिए। फैसले का वितरण मीडिया का काम नहीं हैI

डॉ. मुनीश कुमार रायजादा ने कहा है कि डॉक्टरों को बर्खास्त करना समाधान नहीं है, सिस्टम और नीतियों / दिशा निर्देशों का विश्लेषण करना, सीखना और बदलाव लाना - यह उद्देश्य होना चाहिएI

बता दें कि दिल्ली के मैक्स अस्पताल में महिला ने समय से पूर्व दो बच्चों को जन्म दिया था। इनमें से एक बच्चे की मृत्यु जन्म के बाद हो गई थी, जबकि डाक्टरों ने दूसरे बच्चे को भी एक घंटे बाद मृत बताकर परिवारवालों को सौंप दिया था। बाद में इस बच्चे के शरीर में जीवित रहने के चिन्ह पाए जाने पर उसे दूसरे अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती किया गया था, जहां उसकी भी मृत्यु हो गई थी।

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड विधान की धारा 308 के तहत मामला दर्ज किया है। दूसरी तरफ अस्पताल ने इस मामले से जुड़े दो डाक्टरों को नौकरी से निकाल दिया है। दिल्ली सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए थे। तीन सदस्यीय समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट में अस्पताल को दोषी पाया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार नवजात शिशुओं के मामले में चिकित्सा शर्तों का पालन नहीं किया गया। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि नवजात को मृत घोषित करने से पहले ईसीजी नहीं की गई और उसे अपनी मृत बहन से अलग नहीं किया गया था।

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