कनाडा के शिक्षा उद्योग के लिए दुधारू गाय हैं विदेशी छात्र

अन्य क्षेत्रों की भांति शिक्षा के क्षेत्र में भी नौकरी का अस्थायी होना दरअसल पूंजीवादी व्यवस्था का बुनियादी संकट है। विकसित देशों के वर्ग संघर्ष भी अपने आप में एक साथ कई डायमेंशन लिए होते हैं।...

शमशाद इलाही शम्स

16 अक्टूबर से कनाडा के ओंटारियो प्रान्त के 24 कॉलेज के 12,000 से अधिक अध्यापक और अन्य स्टाफ हड़ताल पर हैं। वे अपने रोजगार संबंधी मांगों को लेकर सरकार से संघर्षरत हैं। इन अध्यापकों से अधिकतर दिहाड़ी मजदूरों की तरह काम लिया जाता है जिनकी न तो नौकरी पक्की है, न काम के घंटे निर्धारित हैं।

अन्य क्षेत्रों की भांति शिक्षा के क्षेत्र में भी नौकरी का अस्थायी होना दरअसल पूंजीवादी व्यवस्था का बुनियादी संकट है। इस हड़ताल से पांच लाख से ज्यादा छात्र प्रभावित हो रहे हैं जिनमें विदेशी छात्रों की तादाद बहुत है। शिक्षा के निजीकरण और उससे मुनाफा कमाने का उद्योग पूंजीवादी व्यवस्था की एक शो केस प्रोडक्ट है लेकिन इस उद्योग में भी पूंजी और श्रम के बुनियादी अंतर्विरोध को यह कथित सोशल वेलफेयर स्टेट हल करने में अक्षम है।

विदेशी छात्र, कनाडा के शिक्षा उद्योग के लिए दुधारू गाय है जिसे वह जी भर निचोड़ते हैं। जिस कोर्स को एक कनेडियन नागरिक 6,327 डालर फीस देकर करता है उसके लिए विदेशी छात्र लगभग चार गुना फीस (23,510 डालर) दे कर वही डिग्री लेता है।

2011-12 में विदेशी छात्रों की संख्या ओंटेरियो प्रान्त में 30,985 थी जो 2016-17 में बढ़कर 58,406 हो चुकी है। फीस के नाम पर इन कॉलेजों ने विदेशी छात्रों से जो रकम 2011-12 में वसूली थी वह 620 मिलियन (62 करोड़ डालर) थी। 2015-16 में मनचाही फीस बढ़ाकर यह उगाही 1.3 अरब डालर तक पहुँच चुकी है।

गौरतलब बात यह है कि अध्यापकों की यूनियन ने जो मांग की है यदि उसे मान लिया जाए तब, कुल 250 मिलियन डालर (25 करोड़ डालर) का अतिरिक्त भार सरकार को वहन करना पड़ेगा, जिसे लिबरल सरकार मान ही नहीं रही बल्कि इस आन्दोलन को तोड़ने के प्रयास में जुटी है।

मज़े की बात यह है कि इसी दल की सरकार केंद्र में है जो अरबों डॉलर के F -35 युद्धक विमान अमेरिका से खरीद रही है, लेकिन 250 मिलियन डालर शिक्षा की मद में खर्च करने से कतरा रही है।

अध्यापकों-कालिजों के इस बंदरबाट संघर्ष में छात्रों का नुकसान भी हो रहा है। 50,000 से अधिक छात्रों ने एक पेटीशन पर दस्तख्त करके फीस वापस करने की जायज़ मांग भी की है। विकसित देशों के वर्ग संघर्ष भी अपने आप में एक साथ कई डायमेंशन लिए होते हैं।

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