भारत में बुद्धिजीवियों की गिरफ्तारी पर कनाडा में ग़दर आन्दोलन के वंशज बोले मोदी युग में एक दूसरे गदरी आन्दोलन की जरूरत

मुसलमानों को पाकिस्तान भेजने वाले संघियों पर जब पलटवार होगा तब उन्हें नेपाल में भी जगह नहीं मिलेगी....

भारत में बुद्धिजीवियों की गिरफ्तारी पर कनाडा में ग़दर आन्दोलन के वंशज बोले मोदी युग में एक दूसरे गदरी आन्दोलन की जरूरत

शमशाद इलाही शम्स

ब्राम्पटन (कनाडा)। एलायन्स आफ़ प्रोग्रेसिव कनेडियन्स. सी ए (ए पी सी .सी ए ) के आह्वान पर मोदी सरकार द्वारा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, दलित बुद्धिजीविओं पर गत मंगलवार को हुई सरकारी दहशतगर्द कार्रवाई के विरोध में ब्राम्पटन स्थित भारतीय पासपोर्ट कार्यालय के समक्ष एक प्रदर्शन आयोजित किया गया.

ध्यान रहे मोदी सरकार की इस नामाकूल हरकत के विरोध में दुनिया के कई देशों में बसे भारतीय समुदाय में भारी रोष व्याप्त है. वह भारत के लगातार बढ़ते प्रतिगामी स्वरूप पर रुष्ट हैं. इसी जनव्यापी जनरोष को स्वर देने का काम ए पी सी ने किया.

मोदी नेतृत्व की कटु आलोचना करते हुए उत्तर अमरीकी तर्कशील समिति के नेता डाक्टर बलजिंदर सिंह शेखो ने छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की जमीन, जंगल और सम्पदा को भाजपा द्वारा पूंजीपतियों को कोडियों के भाव बेचने का आरोप लगाया. इस जनविरोधी नीति का विरोध करने वालों पर माओवादी होने का आरोप लगा कर उनकी दुर्दांत हत्या करने, जेलों में डालने और उनकी महिलाओं का बलात्कार करने की सरकारी नीति का पर्दाफाश किया.

ए पी सी नेता डाक्टर हरदीप अटवाल ने इस मौके पर बोलते हुए भाजपा और संघ द्वारा प्रचारित राष्ट्र भक्ति की नई अवधारणा की कड़े शब्दों में आलोचना की. उन्होंने कहा कि पूरे देश को मोदी और मोदी को पूरा देश बनाने की कोशिश की जा रही है और जो मोदी का विरोध करे उसे देश विरोधी बताने की जनविरोधी कोशिश की जा रही है, जिसमें मीडिया अपना सबसे बड़ा नकारात्मक रोल अदा कर रहा है. उन्होंने देशभक्त और जनवादी शक्तियों के एकजुट होने का आह्वान करते हुए मोदीवाद के विरुद्ध जनांदोलनों को शुरू करने की बात कही. उन्होंने कहा कि मुसलमानों को पाकिस्तान भेजने वाले संघियों पर जब पलटवार होगा तब उन्हें नेपाल में भी जगह नहीं मिलेगी.

हरपर्मिंदर सिंह गदरी ने इस मौके पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत में दूसरी आज़ादी की लडाई लड़ने का वक्त आ चुका है. हमें कनाडा पर गर्व है क्योंकि ग़दर आन्दोलन इसी धरती से शुरू हुआ था और मोदी युग में एक दूसरे गदरी आन्दोलन की जरूरत आन पडी है. भारत को सांप्रदायिक संघी राजनीति से विदा करने के लिए गदर पार्टी के सन्देश आज भी हमें रास्ता दिखा रहे हैं.

कनेडियन कम्युनिस्ट पार्टी के नेता मल्कियत सिंह ने कहा कि भारत में संघी फासीवाद के विरुद्ध कम्युनिस्ट क्रांतिकारी संघर्षरत हैं, कनेडियन कम्युनिस्ट पार्टी अपनी पूरी क्षमता और शक्ति के साथ कनाडा की धरती पर दक्षिणपंथी राजनीति का सडकों पर उतर कर विरोध कर रही है, वह भारत में बढ़ती दक्षिणपंथी ताकतों के असर चुप नहीं बैठ सकती और यथाशक्ति इस चुनौती का मुंह तोड़ जवाब देगी.

ए पी सी के संयोजक शमशाद इलाही शम्स ने कहा कि मई २०१४ से भारतीय राजनीति को ग्रहण लगा है, मोदी सरकार अपने चार साल के कार्यकाल में ही इतनी नंगी हो चुकी है कि २०१९ में जनता उसे अच्छा सबक सिखाएगी. मोदी काल में हुई ७३ मोब लिंचिंग, ६३ आर टी आई कार्यकर्ताओं की हत्याएं और सोहराबुद्दीन मुकदमे में अमित शाह के खिलाफ ५४ गवाहों का मुकर जाना भारतीय न्याय व्यवस्था पर प्रश्न चिह्न लगाता है, पटना उच्च न्यायालय के सिटिंग जज द्वारा मोदी को आदर्श मानना इस बात का सबूत है कि भारत के न्यायालयों ने अपने बची खुची गरिमा भी खो दी ऐसे हालात में अल्पसंख्यकों, दलितों और गरीबो को न्याय नहीं मिल सकता. उन्होंने कहा कि मोदी दुनिया का ऐसा अनोखा नेता है जिसमें आज तक किसी पत्रकार सम्मलेन को संबोधित करने का साहस नहीं हुआ, क्योंकि उसे मालूम है पत्रकार २००२ के दंगों के उसके द्वारा प्रायोजित हिंसा और हजारों लोगों की हत्याओं का जवाब मांगेगे. 

संयोजक ने कहा कि उन्हें नेपाल, अफगानिस्तान, बांग्लादेश के साथियों सहित अन्य दोस्तों के समर्थन के मैसेज मिले हैं जो अपनी व्यस्ताओं के चलते प्रदर्शन के हिस्सा न बन सके.   

इस पर श्रीलंका वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता कामरेड बाला सितम ने श्रीलंका में हुये तमिलो के संघार का जिक्र करते हुए कहा कि दक्षिणपंथी ताकतें पूरे दक्षिण एशिया में अपना सर उठा रही हैं, ऐसे हालात में व्यापक जनवादी ताकतों की एकता स्थापित करना जरुरी है. प्रदर्शन के दौरान एनी वक्ताओं में भारत से आये कामरेड अमरजीत सिंह बाई ने भी अपने विचार रखे.

ए पी सी ने उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त करते हुए भरोसा दिलाया कि ऐसे अगले आयोजनों में विभिन्न जन संगठनों के साथ पूर्व सहमति  लेकर आयोजन किया जाएगा.

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