पाकिस्तानी कैदियों के मामले की सुनवाई 21 जुलाई तक स्थगित, सरकार को स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का दिया सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश

याचिका सं. 310/2005 में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि इन कैदियों की रिहाई के लिए हस्तक्षेप करे, जिन्होंने अपनी सजाएं पूरी ली हैं या काफी समय पहले पूरी कर चुके हैं।...

नई दिल्ली, 03मई। जस्टिस ए.के. सिकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने आज भारत संघ के सोलिसिटर जनरल रंजीत कुमार को भारतीय जेलों में बंद विदेशी कैदियों, जिनमें अधिकतर पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर से हैं, की रिहाई के मामले में स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

स्टेट लीगल एड कमेटी कार्यकारी चेयरमैन एवं वरिष्ठ अधिवक्ता प्रो. भीमसिंह के अनुरोध पर खंडपीठ ने भारत सरकार की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता से असहमति जताते हुए यह निर्देश दिया।

इस याचिका सं. 310/2005 में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि इन कैदियों की रिहाई के लिए हस्तक्षेप करे, जिन्होंने अपनी सजाएं पूरी ली हैं या काफी समय पहले पूरी कर चुके हैं।

प्रो.भीमसिंह ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अन्तर्गत मौलिक अधिकारों को ध्यान में रखते में हुए इस मामले पर निर्णय देने का अनुरोध किया, क्योंकि किसी भी व्यक्ति व राष्ट्रीयता के उसे जीवन या स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता।

प्रो. भीमसिंह ने अपनी पुस्तक (भीमसिंह द्वारा लिखी) को माननीय न्यायाधीशों को पेश की, जो उन्होंने 2012 में पाकिस्तान से लौटने के बाद लिखी थी।

भारत संघ और बचाव पक्ष की तरफ से पेश हुए अधिवक्ताओं के अनुरोध पर इस मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई, 2017 तक स्थगित कर दी गयी है।

सुप्रीम कोर्ट ने भारत संघ और जम्मू-कश्मीर सरकार को अप-टू-डेट स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिये।

प्रो. भीमसिंह का सहयोग करने वाले अधिवक्ताओं में सर्वश्री बी.एस. बिलौरिया, एस.के. बंदोपाध्याय, विजय प्रताप सिंह और आदि शामिल थे।

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