क्या पाकिस्तान ने भारत के लिए एक बड़ी लकीर खींच दी है ?

क्या पाकिस्तान ने भारत के लिए एक बड़ी लकीर खींच दी है ?...

क्या पाकिस्तान ने भारत के लिए एक बड़ी लकीर खींच दी है ?

नरेंद्र यादव

जब पाकिस्तान के चुनावों के परिणाम आना शुरू हुए तो शुरू से ही इमरान की पार्टी बढ़त बनाते हुए नजर आई। और अब नतीजे बताते हैं कि इमरान की पार्टी बहुमत से कुछ ही कदम पीछे है। और ये भी निश्चित है, कि सबसे बड़ी पार्टी के मुखिया होने के नाते अब इमरान ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री होंगे।

इस बार गौर करने वाली बात ये रही कि किसी भी मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टी ने भारत विरोधी या कश्मीर में आतंक के समर्थन में कोई भी बयानबाजी नहीं की है। अपनी पार्टी के घोषणापत्र में इमरान खान ने जो वादे किए हैं, वो मूलभूत सुधार जैसे शिक्षा, रोजगार, न्यायिक सुधार और सत्ता के विकेंद्रीकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को अपने घोषणापत्र में मुख्य रूप से शामिल किया है।

और चुनाव में आए नतीजों और रुझानों में बढ़त के बाद इमरान ख़ान ने कहा, "मैं चाहता हूं कि हमारे व्यापारिक संबंध और बेहतर हों.कश्मीर में जो हालात हैं, वहां के लोगों ने जो झेला है, हमारी कोशिश होगी कि दोनों देश एक साथ बैठ कर तय करें कि वहां की स्थिति कैसे बेहतर की जाए।"।

   जहाँ भारत में एक राज्य विधानसभा के चुनाव को पाकिस्तान को बीच लाए बिना पूरा करना संभव नहीं है, और पाकिस्तान ने कश्मीर और भारत के बारे में एक भी घ्रणा से भरे बयान के बिना पूरे चुनाव को संपन्न कर लिया। और सत्ता हस्तान्तरण की प्रक्रिया भी पूर्ण होने जा रही है। याद करिए गुजरात चुनावों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र के ब्यान को कि पाकिस्तान गुजरात चुनाव के नतीजों को कोंग्रेस के पक्ष में करने के लिए साजिश रच रहा है, प्रधानमंत्री के इस बयान पर काफी हंगामा हुआ जिसके बाद भाजपा को सदन में सफाई देनी पड़ी। यहाँ न्यायपालिका का उदाहरण देना भी उचित रहेगा, पाकिस्तान में पनामा पेपर्स मामले में न्यायालय ने जाँच कर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को जेल की सजा सुनाई है, लेकिन भारत में इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती

     तो क्या पाकिस्तान ने आम चुनावों में शिक्षा, स्वास्थ्य और कमजोर वर्ग के लिए न्यायिक पहुंच और रोजगार और आर्थिक चुनौतियों को मुद्दा बना कर भारत के लिए एक बड़ी लकीर नहीं खींच दी है।

इमरान खान की पार्टी ने रोड टू न्यू पाकिस्तान नाम से घोषणापत्र जारी किया था, जिसमें भारत के साथ बेहतर रिश्ते को लेकर पाकिस्तानी अवाम से वादा किया है। घोषणापत्र पत्र में भारत के साथ शांति सुनिश्चित करने के लिए नीतियाँ बनाने की बात कही गई है, और कश्मीर मुद्दे को यूएनओ के प्रस्तावों के अंतर्गत सुलझाने की भी बात कही गई है।

क्या भारत की मौजूदा सरकार और विपक्षी पार्टियाँ पाकिस्तान को लेकर बेहतर सम्बंध और शान्ति सुनिश्चित करने की घोषणा अपने घोषणापत्र में कर सकती हैं। शायद नहीं। क्योंकि मौजूदा दौर में पाकिस्तान को लेकर पेड मीडिया ने जो छवि गढ़ी है, और जो घृणा का जो वातावरण तैयार किया है, ऐसे में यह कर पाना असंभव तो नहीं लेकिन मुश्किल जरूर है।

इस आम चुनाव का एक और पाकिस्तानी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अब पाकिस्तान किसी भी कट्टरपंथी और धार्मिक आधार पर वोट नहीं करेगा, चाहे इमरान की सरकार का जो अंजाम हो लेकिन पाकिस्तान ने लोकतांत्रिक पद्धति में फिर से मजबूत आस्था को प्रदर्शित किया है।

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