सुप्रीम कोर्ट भीमसिंह की पाकिस्तानी कैदियों की रिहाई याचिका को बुधवार को सुनवाई करेगा

इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि इन कैदियों की रिहाई के लिए हस्तक्षेप करे, जिन्होंने अपनी सजाएं पूरी ली हैं या काफी समय पहले पूरी कर चुके हैं।...

नई दिल्ली। जस्टिस ए.के. सिकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने स्टेट लीगल एड कमेटी कार्यकारी चेयरमैन एवं वरिष्ठ अधिवक्ता प्रो. भीमसिंह ने पाकिस्तान, पाक-अधिकृत कश्मीर, अफगानिस्तान और अन्य विदेशी कैदियों, जिन्हें जम्मू-कश्मीर सरकार ने हिरासत को लेकर देश की विभिन्न राज्यों की जेलों में सजा काटने के लिए भेज दिया गया है, की रिहाई के संदर्भ में 2005 में दायर याचिका की अंतिम सुनवाई 3 मई, 2017 को होगी।

इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि इन कैदियों की रिहाई के लिए हस्तक्षेप करे, जिन्होंने अपनी सजाएं पूरी ली हैं या काफी समय पहले पूरी कर चुके हैं।

एक विज्ञप्ति के अनुसार प्रो. भीमसिंह ने अदालत को बताया कि जब उन्होंने 2005 में यह याचिका दायर की थी उस समय भारत के विभिन्न जेलों में ऐसे लगभग 1000 कैदी थे।

उन्होंने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अब तक 700 कैदियों को जिनमें ज्यादातर पाकिस्तानी थे, रिहा किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि इस समय देश के विभिन्न जेलों में ऐसे 250 कैदी हैं, जिनमें ज्यादातर कैदी पाकिस्तानी हैं।

उन्होंने कहा सुप्रीम कोर्ट ने 2008 में भारत सरकार और राज्य सरकार को ऐसे कैदियों के मामलों एक साल के अंदर पूरा करने का निर्देश दिया था, लेकिन अदालत ने इस निर्देश पर अमल नहीं किया गया।

प्रो. भीमसिंह के तर्क सुनने के बाद अदालत ने इस मामले की अंतिम सुनवाई के लिए 3 मई 2017 निर्धारित की है।

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