1 मई : आज ही हुई थी हिटलर की मौत और समाजवादी राष्ट्र घोषित हुआ था क्यूबा

1 मई, यूँ तो अन्तर्राष्ट्रीय मजदूर दिवसकेरूप में जाना जाताहै, लेकिन 1मई से इतिहास की बहुत सीमहत्वपूर्ण चीजें जुड़ी हुई हैं। मसलन आज ही तानाशाह हिटलर की मौत हुई थी और आज ही क्यूबा समाजवादी राष्ट्र.......

इतिहास के झरोखे से 1 मई

आज का इतिहास

1 मई, यूँ तो अन्तर्राष्ट्रीय मजदूर दिवसकेरूप में जाना जाताहै, लेकिन 1मई से इतिहास की बहुत सीमहत्वपूर्ण चीजें जुड़ी हुई हैं। मसलन आज ही तानाशाह हिटलर की मौत हुई थी और आज ही क्यूबा समाजवादी राष्ट्र घोषित हुआ था

1897 में 1 मई को स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी। इसका मुख्यालय कोलकाता के निकट बेलुड़ में है।

रामकृष्ण मिशन की स्थापना का उद्देश्य ऐसे साधुओं और संन्यासियों को संगठित करना था, जो रामकृष्ण परमहंस की शिक्षाओं में गहरी आस्था रखें, उनके उपदेशों को जनसाधारण तक पहुंचा सकें और दु:खी एवं पीड़ित मानव जाति की नि:स्वार्थ सेवा कर सकें।

1945 में 1 मई को हिटलर की मौत हुई थी...

जर्मनी के हैमबर्ग रेडियो ने 1 मई 1945 को घोषणा की कि एडोल्फ़ हिटलर की बर्लिन में मौत हो गई है।

स्थानीय समयानुसार 10 बजकर 30 मिनट पर रेडियो पर उद्घोषक ने कहा कि हिटलर के मुख्यालय से ये ख़बर आ रही है कि हिटलर जर्मनी की ख़ातिर कम्युनिस्ट बलों के ख़िलाफ़ आख़िरी सांस तक लड़ते हुए अपनी कमांड पोस्ट पर ढेर हो गए।

रेडियो ने यह भी घोषणा की कि हिटलर ने एडमिरल डोएनिट्ज़ को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त कर दिया है। इसके बाद एडमिरल डोएनिट्ज़ ने अपने संबोधन में कहा कि हिटलर की मौत राजधानी बर्लिन में एक हीरो की तरह हुई और लोग हिटलर की मौत पर शोक मनाएं।

और क्यूबा समाजवादी राष्ट्र बन गया

1961 में 1 मई को क्यूबा के प्रधानमंत्री डॉक्टर फ़िदेल कास्त्रो ने क्यूबा को समाजवादी राष्ट्र घोषित कर दिया था और चुनावी प्रक्रिया को खत्म कर दिया।

राजधानी हवाना में हुई 'मे-डे परेड ' में जब कास्त्रो ने ये घोषणा की, तो वहां लाखों की संख्या में मौजूद लोगों ने इसका समर्थन किया।

कास्त्रो ने घोषणा करते हुए कहा कि क्रांति के इस माहौल में चुनाव के लिए समय नहीं है।

उनका कहना था कि लातिन अमेरिका में क्रांतिकारी सरकार से ज्यादा कोई लोकतांत्रिक सरकार नहीं है। कास्त्रो 1959 में सत्ता में आए थे।

आज ही है मन्ना डे का जन्म दिन

1919 में फिल्म जगत के मशहूर गायक मन्ना डे का जन्म हुआ था। मन्ना डे को प्यार से लोग मन्ना दा के नाम से भी पुकारते थे।

मन्ना डे ने 3000 से अधिक गानों को अपनी आवाज दी।

हिन्दी औऱ बंगाली फिल्मी गानों के अलावा उन्होंने अन्य भारतीय भाषाओं में भी अपने कुछ गीत रिकॉर्ड करवाये।

1971 में पद्मश्री, 2005 में पद्म भूषण और 2007 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से उन्हें सम्मानित किया गया।

"जिन्दगी कैसी है पहेली हाय, कभी ये हंसाये कभी ये रुलाये!", "ये रात भीगी भीगी, ये मस्त फिजाएं!", "तुझे सूरज कहूं या चन्दा, तुझे दीप कहूं या तारा!" और उनके गाये "यक चतुर नार, बड़ी होशियार!", " यारी है ईमान मेरा, यार मेरी जिन्दगी!" के अलावा "ऐ मेरे प्यारे वतन!" जैसे गीत भी लोगों की जबान पर आज भी चढ़े हुए हैं।

मज़दूर दिवस या मई दिवस

एक मई को पूरी दुनिया में मज़दूर दिवस या मई दिवस के रूप में मनाया जाता है। कई देशों में इस दिन छुट्टी होती है।

अंतरराष्ट्रीय श्रमिक आंदोलनों की याद में दुनिया के कई देशों में यह दिन अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के रूप में मनाया जाता है। 1886 में अमेरिका के शिकागो में रोजाना आठ घंटे काम करने की मांग कर रहे श्रमिकों ने हड़ताल की। आंदोलनकारियों पर नियंत्रण के लिए पुलिस ने गोलीबारी शुरू कर दी। इस हिंसक मुठभेड़ में दर्जनों लोग मारे गए और कई घायल हो गए। आगे चलकर कई यूरोपीय देशों में यही मांग उठी और शिकागो में मारे गए मज़दूरों की याद में एक मई को मज़दूर दिवस के रुप में मनाने पर सहमति बनी।

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।