गौ-आतंकियों ने गाय ले जा रहे हिंदुओं को पीटा

मोदी सरकार आने के बाद गौरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी थमने का नाम नहीं ले रही है और देश भर में गो-आतंकियों का आतंक बढ़ता जा रहा है, जिसके चलते अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की बदनामी हो रही है...

नई दिल्ली। केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार आने के बाद गौरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी थमने का नाम नहीं ले रही है और देश भर में गो-आतंकियों का आतंक बढ़ता जा रहा है, जिसके चलते अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की बदनामी हो रही है।

ताजा मामला ग्रेटर नोएडा का है, जहां कथित गौरक्षकों ने दो लोगों पर गौ तस्कर समझकर जानलेवा हमला कर दिया। पीड़ित चिल्लाते रहे कि वो गौ तस्कर नहीं हैं, उन्होंने गौरक्षकों से ये भी बताया कि वो हिंदू है, लेकिन गौरक्षकों ने कुछ नहीं सुना। दोनों लोगों की जमकर पिटाई की।

दरअसल पीड़ित जबर सिंह और भूप सिंह नाम के दो व्यक्ति जेवर के सिरसा मांझीपुर के रहने वाले हैं।

पीड़ितों के मुताबिक वे दोनों मेहंदीपुर गांव से गाय खरीदकर घर लौट रहे थे। तभी रास्ते में गौआतंकियों ने गाय तस्कर समझकर पीटना शुरू कर दिया।

पीड़ितों ने बताया कि हमने गौरक्षकों से कहा कि हम हिंदू है और गाय को डेयरी कारोबार के लिए ले जा रहे हैं। इसके बाद गौरक्षक हमें घायल हालत में छोड़कर फरार हो गए। वहीं

स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी और पीड़ितों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। बाद में पीड़ितों को नोएडा के जिला अस्पताल में रेफर कर दिया गया। गौतमबुद्धनगर के एसपी ने बताया कि पीड़ितों की शिकायत पर 8 अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।

अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने माँग की है कि भारतीय अधिकारियों को तुरंत स्वयंभू "गौ रक्षकों" पर मुकदमा चलाना चाहिए, जिन्होंने मुस्लिमों और दलितों के खिलाफ गायों को बेचने, खरीदने या मारने की अफवाहों पर क्रूर हमले किए हैं।

ह्यूमन राइट्स वाच ने कहा है कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी से संबद्ध चरमपंथी हिंदू समूहों से जुड़े हमलावरों के विरुद्ध कार्रवाई करने के स्थान पर पुलिस अक्सर हमले में पीड़ित, उनके रिश्तेदारों और सहकर्मियों के खिलाफ गौवध निरोधक कानून के तहत मुकदमा दर्ज कर लेती है।

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।
क्या मौजूदा किसान आंदोलन राजनीति से प्रेरित है ?