UNHRC में उठा गौआंतकियों और गौरी लंकेश की हत्या का मामला, भारत की निंदा

संयु्क्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन (UNHRC) में भारत की वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या व गौआतंकियों द्वारा की जा रही हत्याओं का मामला उठा है। ...

हाइलाइट्स

संयु्क्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन में उठा गौरी लंकेश की हत्या का मामला, भारत की निंदा

ह्यूमनराइट्स कौंसिल के 36वें सेशन में अपनी रिपोर्ट रखते हुए जीद राद अल हुसैन ने भारत में धार्मिक एवं अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ असहिष्णुता का माहौल उभरने की भी निराशा व्यक्त की

संयु्क्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन (UNHRC) में भारत की वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या व गौआतंकियों द्वारा कीजा रही हत्याओं का मामला उठा है।

ह्यूमनराइट्स कौंसिल के 36वें सेशन में अपनी रिपोर्ट रखते हुए जीद राद अल हुसैन ने भारत में धार्मिक एवं अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ असहिष्णुता का माहौल उभरने की भी निराशा व्यक्त करते हुए कहा,

"हिंसा का मौजूदा दौर, जो अक्सर प्राणघातक हो जाता है तथा गोरक्षा के नाम पर भीड़ द्वारा लोगों पर हमला किया जाना भयावह है। मौलिक मानवाधिकारों की हिमायत करने वाले लोगों को भी धमकाया जा रहा है। सांप्रदायिकतावाद और घृणा के विनाशक प्रभाव के बारे में लगातार आवाज उठाने वाली पत्रकार गौरी लंकेश की पिछले सप्ताह ही हत्या कर दी गई। भारत में सर्वाधिक वंचित तबके के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले लोगों को भारत में एक मजबूत और समावेशी समाज स्थापित करने में सहयोगियों की तरह समझा जाना चाहिए।"

यूएनएचआरसी के इस वक्तव्य पर पाकिस्तानी मूल के विवादास्पद लेखक तारक फतेह ने कहा कि एक तानानशाह जॉर्डन के राजकुमार, जो UNHRC का नेतृत्व करते हैं रोहिंग्या औरगौरी लंकेश हत्याकांड पर भारत की खाल उतार रहे हैं।

Human Rights Council के 36th session में United Nations High Commissioner for Human Rights Zeid Ra'ad Al Hussein के खुले बयान का रोहिंग्या व भारत के संदर्भ में वक्तव्य मूल का अंश निम्नवत् है।

I am also dismayed by a broader rise of intolerance towards religious and other minorities in India. The current wave of violent, and often lethal, mob attacks against people under the pretext of protecting the lives of cows is alarming. People who speak out for fundamental human rights are also threatened. Gauri Lankesh, a journalist who tirelessly addressed the corrosive effect of sectarianism and hatred, was assassinated last week. I have been heartened by the subsequent marches calling for protection of the right to freedom of expression, and by demonstrations in 12 cities to protest the lynchings. Human rights defenders who work for the rights of India's most vulnerable groups – including those threatened with displacement by infrastructure projects such as the Sardar Sarovar Dam in the Narmada river valley – should be considered allies in building on India's achievements to create a stronger and more inclusive society. Instead, many are subject to harassment and even criminal proceedings, or denied protection by the State.

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