‘यह मुखबिरो का लहू नही है’ : आजादी की लड़ाई में मुसलमानों का शानदार इतिहास रहा है

जंगे आजादी में मुसलमानो की कुर्बानियों का सिलसिला 1912 से प्रारम्भ हो जाता है। देवबन्द के उलेमा देश को आजाद कराने के लिये भारी संख्या मे उलेमा अफगास्तिन भेजे और वहां पर निर्वाचित सरकार का गठन होता है,...

बाराबंकी। देश की आजादी की लडाई मे मुसलमानो की अहम भूमिका व शानदार इतिहास रहा है। देशभक्ति के मामले में आज भी मुसलमान अग्रणी भूमिका में हैं। पहले जहां फिरंगियो से मुल्क को आजाद कराने में मुसलमानों ने अपनी जानें दी हैं, वही आज भी देश की सीमा पर दुश्मनों का मुकाबला करते हुए अपना खून बहाने में किसी से पीछे नहीं हैं। उन्हे देशभक्ति का प्रमाणपत्र किसी से नही चाहिये, क्योंकि देशभक्ति उनके दीन व इमान का हिस्सा है, जिसकी तस्दीक हदीस तैयबा से होती है।

उक्त विचार व्यक्त वरिष्ठ पत्रकार, पूर्व सांसद अहमद सईद मलिहाबादी ने व्यक्त किए। वे ‘यह मुखबिरो का लहू नही है’ पुस्तक के विमोचन अवसर पर मुख्य अतिथि के तौर पर अपने विचार व्यक्तकर रहे थे।

उन्होंने कहा कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह परमाणु समझौते के लिये जब अमेरिका गये थे तो वहां के राष्ट्रपति जांर्ज बुश के सामने अपने भाषण में गर्व से कहा था कि हिन्दुस्तान का एक भी मुसलमान आंतकी नही है। लेकिन पूरी दुनिया मे आंतकवाद के सरगना जार्ज बुश ने उसका बदला यूं दिया कि अपने पूरे देश में धमाके होने लगे और मुसलमानो को आंतकी बताकर जेल में डालने का सिलसिला शुरु हो गया। यह बात अलग है कि देश की कुछ अदालतों ने उनके साथ न्याय किया है।

मलिहाबादी ने आगे कहा कि जंगे आजादी में मुसलमानो की कुर्बानियों का सिलसिला 1912 से प्रारम्भ हो जाता है। देवबन्द के उलेमा देश को आजाद कराने के लिये भारी संख्या मे उलेमा अफगास्तिन भेजे और वहां पर निर्वाचित सरकार का गठन होता है, जिसका राष्ट्रपति राजा महेन्द्र प्रताप सिंह को चुना जाता है और प्रधानमंत्री मौलाना बरकत उल्ला और गृहमंत्री उबैद उल्ला सिंघी को बनाया जाता है। उस निर्वाचित सरकार का राष्ट्रपति किसी मुस्लिम को नहीं बनाया था।

उन्होंने मौलाना महमूदुर रहमान की रेशमी रुमाल की तहरीक का भी जिक्र किया। ’यह मुखबिरो की लहू नही है’ के लेखको का हौसला बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि आज के दौर में इस तरह की किताबों की सख्त जरूरत है और लेखक मुबारकबाद के पात्र है। इस दौर में जब पत्रकारिता अपनी विश्वसनीयता और बेबाकी खोती जा रही है, तो इस तरह की किताब लिखना व प्रकाशित करना देश व समाज की बड़ी सेवा है। और देश के दुश्मनो के लिये एक बड़ी चुनौती है।

वरिष्ठ पत्रकार उबैदउल्ला नासिर ने कहा कि मुस्लिम क्रान्तिकारियों ने देश को आजाद कराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है और उसके बाद देश के नवनिर्माण मे भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। यह बात अलग है कि आज के दौर मे वह आर्थिक तंगी का शिकार हो रहा है।

इसके पूर्व हिन्दी के मूर्धन्य विद्वान डा0 विनय दास, रिहाई मंच अध्यक्ष मो0 शुएब, सामाजिक कार्यकर्ता रफत फातिमा ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

स्वागत भाषण लोक संघर्ष पत्रिका के प्रबन्ध संपादक रणधीर सिंह सुमन ने दिया।

कार्यक्रम का संचालन तारिक खान व अध्यक्षता बृजमोहन वर्मा ने की।

इस अवसर पर कदीर हसन, आल इण्ड़िया पंसमादा मुस्लिम महाज प्रदेश अध्यक्ष वसीन राईन, नफीस राईन, चौधरी महबूब राईन, फजल ईमाम मदनी, मो0 मोहसिन, मो0 हगिश, कलीम युसूफ किदवई, मो0 अतहर, तारिक किदवई, मो0 आमिर अली, सरदार भूपिन्दर पाल िंसह, शहनवाज आलम, डा0 कौशर हुसैन, सुप्रसिद्व ज्योतिषी प्रित्युशकान्त शुक्ला, प्रवीण कुमार, मुज्जवर अहमद लारी समेत भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।

 

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