वायु प्रदूषण से बढ़ सकता है मासिक धर्म के अनियमित होने का खतरा

भारतीय मूल के एक शोधकर्ता के नेतृत्व में किए गए एक नए शोध में यह बात सामने आई है कि हवा में बढ़ते प्रदूषण स्तर की वजह से किशोरियों में अनियमित मासिक धर्म का खतरा बढ़ जाता है।...

नई दिल्ली। दीपावली पर माननीय उच्चतम न्यायालय ने पटाखों पर प्रतिबंध लगाकर एक अच्छी पहल की थी, लेकिन उस आदेश की धज्जियां उड़ा दी गईं। अब भारतीय मूल के एक शोधकर्ता के नेतृत्व में किए गए एक नए शोध में यह बात सामने आई है कि हवा में बढ़ते प्रदूषण स्तर की वजह से किशोरियों में अनियमित मासिक धर्म का खतरा बढ़ जाता है।

Oxford Academic, में प्रकाशित शोध के मुताबिक, किशोरियों में वायु प्रदूषण से मासिक धर्म की अनियमितता थोड़ी बढ़ जाती है और इसे नियमित होने में लंबा समय लगता है।

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शोधकर्ताओं ने यह भी चेताया है कि वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से बांझपन, मेटाबॉलिक सिंड्रोम व पॉलीस्टिक ओवरी सिंड्रोम हो सकता है।

शोध में व्याख्या की गई है कि इससे पूर्व के शोधों में यह पाया गया था कि वायु प्रदूषण हार्मोनल गतिविधि को प्रभावित करते हैं और हार्मोन मासिक धर्म को विनियमित करने में एक भूमिका निभाते हैं।

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पूर्व के शोधों में यह भी सुझाव दिया गया था कि वायु प्रदूषण का बांझपन और महिला प्रजनन प्रणाली के साथ-साथ हार्मोनल पॉलीसिस्टिक व अंडाशय सिंड्रोम का भी संबंध है।

बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के एपिडेमिओलॉजी संकाय मे  सहायक प्रोफेसर व शोधककर्ता श्रुति महालिंग्या के मुताबिक

"वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से दिल संबंधी, पल्मोनरी रोग होने की संभावना होती है। लेकिन यह शोध अलग तंत्रों के प्रभावित होने के बारे में भी सुझाव देता है, जिसमें प्रजनन अंतस्रावी तंत्र शामिल हैं।"

मासिक धर्म हार्मोन के नियमन से जुड़े हैं। वायु प्रदूषण के पर्टिकुलेट मैटर से हार्मोन की क्रिया पर असर पड़ता है। हालांकि, शोधकर्ताओं के अनुसार यह पता नहीं चल सका है कि क्या वायु प्रदूषण का मासिक धर्म की अनियमितता से जुड़ाव है या नहीं।

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