हस्तक्षेप
यादों के झरोखे से  सामाजिक न्याय के पहरुआ केदारनाथ सिंह
यादों के झरोखे से : सामाजिक न्याय के पहरुआ केदारनाथ सिंह

केदारनाथ सिंह ने भी पूर्वांचल में पिछड़ों की आबादी को जागरूक करने का बीड़ा उठा लिया। सबसे तीखा विरोध उन्हें खुद अपनी जाति के लोगों से उठाना पड़ा।

अतिथि लेखक
2017-12-12 11:40:15
मतलब की बातें भी जब बेमतलब-सी लगने लगीं तो इस किताब की ज़रूरत सामने आई
मतलब की बातें भी जब बेमतलब-सी लगने लगीं तो इस किताब की ज़रूरत सामने आई

इस संग्रह में लेखक ने हर ज़रूरी बात भर रखी है, ताकि आप हमेशा अपडेट रहें और किसी मुसीबत में ना पड़ें। देशभक्त हैं तो क्या क्रांतिकारी न होंगे। विर...

अतिथि लेखक
2017-12-12 10:00:22
अफराजुल की हत्या का कारण लव जिहाद नही भगवा जिहाद है
अफराजुल की हत्या का कारण 'लव जिहाद' नही 'भगवा जिहाद' है !

अम्बेडकरवादियों की यह खामोशी उनकी सामुदायिक कायरता को दर्शाती है, उनकी यह चुप्पी दलित समाज को भगवा जिहाद के खतरे की तरफ धकेल देगी।

अतिथि लेखक
2017-12-10 23:02:04
पत्रकारिता का ‘पत्थरकारिता’ काल
उप्र नगर निकाय चुनाव  जो जीता वही सिकंदर मगर कैसा
उप्र नगर निकाय चुनाव : जो जीता वही सिकंदर, मगर कैसा?

विधानसभा चुनाव के बाद गुजरे आठ ही महीनों में मत फीसद में यह भारी गिरावट, न तो योगी राज का अनुमोदन दिखाती है और जीएसटी के लिए यूपी की जनता का समर्थन।

राजेंद्र शर्मा
2017-12-10 22:16:17
सीपीएम  गुटबाज़ी की ‘सैद्धांतिक’ कसरत अभी शायद अपने चरम पर है
सीपीएम : गुटबाज़ी की ‘सैद्धांतिक’ कसरत अभी शायद अपने चरम पर है

सीपीएम का जनवादी केंद्रीयतावाद पर टिका अभी का ढाँचा पूरी तरह से विकृत और आज की राजनीति के लिहाज से किसी काम का नहीं रह गया है।

अरुण माहेश्वरी
2017-12-10 21:26:55
खतरे में मुल्क की मासूमियत
खतरे में मुल्क की मासूमियत

राजीव रंजन श्रीवास्तव
2017-12-10 21:10:11
त्रिलोचन का मूल्यांकन अभी होना है अभी तो उन्हें ठीक से पढ़ा भी नहीं गया है
त्रिलोचन का मूल्यांकन अभी होना है, अभी तो उन्हें ठीक से पढ़ा भी नहीं गया है

त्रिलोचन का जन बावजूद प्रहारों के जीवन का हिमायती, रोजमर्रा की जिंदगी को जीता हुआ, जो नहीं है, उसके लिए तैयारी करता हुआ जनपदीय जन है, जबकि नागार्...

अतिथि लेखक
2017-12-09 21:33:30
अब मोदी की भाजपा की रुग्णता मृत्यु की दिशा में बढ़ चुकी है
अब मोदी की भाजपा की रुग्णता मृत्यु की दिशा में बढ़ चुकी है

नोटबंदी और जीएसटी के बाद आम लोगों की बचत की राशि पर धावा बोलने की मोदी सरकार की मंशा ने लोगों में मोदी के प्रति पहले से चले आ रहे आक्रोश को और बढ...

अरुण माहेश्वरी
2017-12-08 18:18:53
ऐसे लोगो को आदमखोर जानवर धीरे-धीरे हिंदुत्ववादी आंतकवादियों ने बनाया है
ऐसे लोगो को आदमखोर जानवर धीरे-धीरे हिंदुत्ववादी आंतकवादियों ने बनाया है

गोडसे को धर्म के जहर ने धीरे-धीरे आदमखोर जानवर बनाया।

उदय चे
2017-12-08 13:35:51
पंचलाइट ने जलायी है एक नयी अलख
पंचलाइट ने जलायी है एक नयी अलख ...

नयी पीढ़ी को सिनेमा हॉल में एक बार फिर से गाँव को दिखाने के लिए प्रेम मोदी का धन्यवाद दर्शकों को देना चाहिए. उन्होने खुद जोखिम भरा काम करने के अला...

अतिथि लेखक
2017-12-07 23:46:10
कवि कुमार का आपत्तिजनक बयान आप और केजरीवाल की घोषित लाइन है
कवि कुमार का आपत्तिजनक बयान आप और केजरीवाल की घोषित लाइन है

कुमार विश्वास जातिवाद का ज़हर फैलाने का आरोप उन नेताओं पर लगा रहे हैं जिन्होंने जातिवाद की खाई को पाटने में सबसे ज्यादा योगदान दिया था।

अतिथि लेखक
2017-12-07 11:36:18
एक शिकंजा है जाति
एक शिकंजा है जाति

वोट बैंक राजनीति के चक्कर में पड़ गई अंबेडकरवादी पार्टियों को अब वास्तव में इस बात की चिंता सताने लगी है कि अगर जाति का विनाश हो जाएगा तो उन का क्...

शेष नारायण सिंह
2017-12-07 09:41:50
विकास की इस दौड़ में हम अंधेरा और उजाला दोनों खोते जा रहे हैं
विकास की इस दौड़ में हम अंधेरा और उजाला दोनों खोते जा रहे हैं

रात तो हो रही है लेकिन अंधेरे में कमी आई है, कालिमा घट रही है। इसका कारण है कृत्रिम प्रकाश में हो रही बढ़ोतरी। इसका इंसान की सेहत और पर्यावरण पर ...

अतिथि लेखक
2017-12-07 09:32:52
लोकतंत्र में निर्दलीय सन्दर्भ उप्र नगर निकाय चुनाव
लोकतंत्र में निर्दलीय, सन्दर्भ उ.प्र. नगर निकाय चुनाव

ऐसा लगता है कि उनकी चुनावी असफलता के बाद खुद को धर्मनिरपेक्ष बताने वाली पार्टियों से मुसलमानों का भरोसा कम हो रहा है।

वीरेन्द्र जैन
2017-12-06 22:33:59