"औरंगज़ेब" बनने पर उतारू "टीपू" को “मुलायम” झटका- चुनाव बाद तय होगा मुख्यमंत्री

घमंडी हो गए हैं अखिलेश ? ... क्या अखिलेश भी अजितसिंह बन जाएंगे?   

हस्तक्षेप डेस्क
Updated on : 2018-09-10 20:24:18

औरंगज़ेब बनने पर उतारू टीपू को “मुलायम” झटका- चुनाव बाद तय होगा मुख्यमंत्री

लखनऊ, 14 अक्तूबर 2016। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने जोर का झटका धीरे से दिया है। मुलायम सिंह ने इशारों ही इशारों में अखिलेश यादव को बता दिया है कि जिस पार्टी को उन्होंने बहुत संघर्षों और कुर्बानियों से खड़ा किया है, उसे जाया नहीं होने देंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुलायम सिंह ने एक तरफ तो समाजवादी परिवार में किसी भी तरह के कलह की बात नकार दी, वहीं दूसरी ओर अखिलेश को साफ संदेश दिया कि चुनाव बाद ही अगला मुख्यमंत्री तय किया जाएगा।

बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के अपना नाम खुद रखने के बयान पर उनके पिता और समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने अपनी प्रतिक्रिया दी।

मुलायम ने कहा कि उनके परिवार में तीन पीढ़ियों से कोई विवाद नहीं है। अखिलेश के अलावा परिवार में कई सदस्यों ने अपने नाम खुद रखे हैं।

मुलायम ने कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद ही सपा की ओर से मुख्यमंत्री का चयन किया जाएगा। विधायक दल मिलकर मुख्यमंत्री के नाम पर कोई फैसला लेंगे।

आज तक के ओपिनियन पोल में भाजपा को बहुमत के करीब और सपा को तीन नंबर की पार्टी बताए जाने पर सपा सुप्रीमो ने कहा, 'चुनाव होने दीजिए। यूपी में चुनावी रथ भी चलेगा और साइकिल भी चलेगी।'

'मैंने अखिलेश को बनाया मुख्यमंत्री- मुलायम'

औरंगज़ेब बनने पर उतारू टीपू की हरकतों पर मुलायम का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने कहा कि अखिलेश को मेरी बहन और शिवपाल ने पाला-पोषा है। उनकी पढ़ाई पर मैंने काफी ध्यान दिया। मेरे नाम पर उन्होंने वोट मांगा था। मैंने ही उन्हें मुख्यमंत्री बनाया। अब उन्हें फ्री कर दिया है।

शिवपाल सिंह पार्टी के सब कुछ'

मुलायम ने कहा, 'कभी मेरे बिना सरकार नहीं बन सकती है। मैं छोटी पार्टी बनाकर इस मुकाम पर पहुंचा हूं। मेरे परिवार में किसी तरह का कोई विवाद नहीं है। शिवपाल पार्टी के इंचार्ज और सब कुछ हैं। जनता हमारे परिवार से प्यार करती है।'

अखिलेश यादव ने साक्षात्कार में किया था राजनीतिक लड़ाई का जिक्र गुरुवार को एक साक्षात्कार में अखिलेश ने अपने संघर्ष और राजनीतिक हक की लड़ाई का जिक्र किया था। उन्होंने कहा कि उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में फंसाया जा सकता है, लेकिन हराया नहीं जा सकता।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अखिलेश ने कहा था, 'बचपन में मुझे मेरा नाम खुद ही रखना पड़ा. ठीक उसी तरह मुझे लगता है कि किसी और का इंतजार किए बिना मुझे अकेले अपने दम पर ही चुनाव प्रचार करना होगा।'

घमंडी हो गए हैं अखिलेश ?

दरअसल अखिलेश यादव पर इस समय सत्ता का नशा चढ़कर बोल रहा है, जिसके चलते उनके इर्द-गिर्द जनाधारविहीन लोगों का एक कॉकस इकट्ठा हो गया है। पार्टी के पुराने कार्यकर्ता और जनाधार वाले जनप्रतिनिधि अखिलेश से खासे नाराज़ हैं। कहा जा रहा है कि टीम अखिलेश ने कदम-कदम पर पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं का अपमान किया है। कहा जा रहा है कि अखिलेश को ऐसे लोगों ने घेर लिया है, जो कभी चौधरी चरण सिंह के करीबी हुआ करते थे और जिनका अजित सिंह को हवा देकर लोकदल का विभाजन कराने में अहम योगदान था। सवाल है कि क्या अखिलेश भी अजितसिंह बन जाएंगे?

(2016-10-14 15:57:04)

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