अमीर ख़ुसरो अहद साज़ शायर भी थे और मौसीक़ी के माहिर भी

हस्तक्षेप
Updated on : 2016-12-23 10:58:57
अमीर ख़ुसरो अहद साज़ शायर भी थे और मौसीक़ी के माहिर भी खुसरो की शख्सियत.. मौहब्बत की इबादत.. बयां करती शायरी व संगीत की महफिल ‘रंग-ए-खुसरो’ आयोजित.. शैलेश के. नावातिया नई दिल्ली, 23 दिसम्बर 2016; दिल्ली के सांस्कृतिक हब इंडिया हैबीटेट सेन्टर में एक अद्वितीय संगीत कार्यक्रम ‘रंग-ए-खुसरो’ का आयोजन किया गया। गैर सरकारी संगठन साक्षी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से गुलाबी ठंड के बीच दिल्लीवासियों को हज़रत आमीर खुसरो की शख्सियत, इंसानियत और रूहानी मोहब्बत भरे गीत-संगीत से परिपूर्ण सूफी संध्या का हिस्सा बनने का मौका प्रदान किया गया। खचाखच भरे अमलतास सभागार में दर्शकों ने शानदार सूफीयाना कलाम व संगीत का लुत्फ उठाया। कार्यक्रम की शुरूआत जाने-माने शायर व साहित्य जगत से जुड़ी शख्सियत लक्ष्मी शंकर बाजपयी की शायरी से हुई। शायरी के इस सफर को जाने-माने मीडियाकर्मी राणा यशवंत ने आगे बढ़ाया। उनके बाद सितार वादक सुदीप राय के सितार वादन ने उपस्थित मेहमानों व अन्य को गद्गद् किया। कार्यक्रम का अगला चरण उस्ताद शकील अहमद के नाम रहा। उनके गायन को साथी कलाकारों की संगत ने बखूबी गुंजायमान करते हुए दिल्लीवासियों को मंत्र-मुग्ध किया। कार्यक्रम की शुरूआत से अंत तक महफिल में उपस्थित दिल्लीवासी वाह! उस्ताद करते नज़र आये।  सुदीप राय की सितार से निकले सुर-लय-ताल का तालमेल खूबसूरत था जिसने दर्शकों को खासा प्रभावित किया। शकील अहमद ने अपनी मनोरम पेशकश से हज़रत आमिर खुसरो की भाषाओं पर आसानी और महारत का प्रदर्शन किया। शकील अहमद ने श्रोताओं को खुसरो की सार्वभौमिक भावनाओं, मानवता और प्रेम की दुनिया से रूबरू कराते हुए जमकर वाह-वाही लूटी।  इस अवसर पर कार्यक्रम की आयोजक डॉ. श्रीमति मृदुला टंडन (अध्यक्ष, साक्षी व जश्न-ए-तहजीब) काफी प्रसन्न नज़र आयीं। उन्होंने कहा किसी आयोजक के लिए इससे बड़ी सफलता और खुशी की बात और क्या हो सकती है कि दर्शकों का भरपूर सहयोग उन्हें मिले और सभी इसका पूरा लुत्फ भी उठायें। श्रीमति टंडन ने बताया कि हज़रत अमीर ख़ुसरो 12वीं, 13वीं सदी की एक बड़ी शख़्सियत थे जिनमें कई शख़्सियत विद्यमान थीं। वो अहद साज़ शायर भी थे, मौसीक़ी के माहिर भी। वो सहिबे तलवार भी थे आज की मॉडर्न हिन्दी और उर्दू उन्हीं की क़लम का जादू है। वास्तव में उनका जीवन हमारे ‘गंगा जमुनी तहजीब’ का एक अद्भुत उदाहरण है। साक्षी इंटरनेशनल फेस्टिवल ऑफ कल्चर के अन्तर्गत जश्न-ए-तहजीब श्रृंखला की चौथी कड़ी के रूप में आयोजित इस कार्यक्रम का हमारा उद्देश्य आज के समय में सुकून भरी शाम प्रदान करते हुए हज़रत अमीर खुसरो के जीवन की प्रासंगिकता व प्यार का सूफी संदेश देना है। उस्ताद शकील अहमद ने कार्यक्रम के लिए दिल्लीवासियों द्वारा दिखाये स्नेह व रूझान हेतु शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा बतौर कलाकार यह मेरे लिए एक यादगार पल है, जहां दर्शकों से ज्यादा लुत्फ मैने महसूस किया। एक महान हस्ती के कार्यक्रम को ऐसी प्रतिक्रिया मिलना स्वाभाविक है लेकिन उससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह भी है कि हम दर्शकों का मनोरंजन करने में सफल रहे।
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