ईद के दिन बेगुनाहों की रिहाई के लिये दुआ को उठे हाथ, सपा की वादाफरामोशी के खिलाफ मुसलमानों ने बाँधी काली पट्टी

जस्टिस सच्चर और मुझसे वादा के बावजूद अखिलेश ने नहीं लागू की निमेष आयोग की रपट- सुराणा ईद के दिन पुराने कपड़े पहन, काली पट्टी बाँधकर जारी रहा 80 वें दिन जारी रहा रिहाई मंच का धरना   लखनऊ 09 अगस्त । भारी बारिश के बीच आज ईद के दिन भी रिहाई मंच ने 80 वें दिन मौलाना खालिद को न्याय दिलाने व आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों की रिहाई के लिये धरना जारी रखा। आज पूरे प्रदेश भर में आजमगढ़, जौनपुर, वाराणसी, इलाहाबाद, फैजाबाद, बाराबंकी, बरेली, मेरठ, मथुरा, गोरखपुर, रामपुर, कुशीनगर, प्रतापगढ़, मुरादाबाद और लखनऊ समेत पूरे प्रदेश में बेगुनाहों की रिहाई के लिये इज्तेमाई दुआ माँगी और काली पट्टी बाँधकर आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों के सवाल पर वादा खिलाफी करने वाली सपा सरकार का विरोध किया। लखनऊ ईदगाह में हाजी फहीम सिद्दीकी के नेतृत्व में सपा-कांग्रेस के नेताओं को काले झंडे दिखाए और सर पर काला साफा भी बाँधा। महाराष्ट्र से आये सोशलिस्ट पार्टी संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष पन्ना लाल सुराणा ने कहा कि जिस तरीके से आज भारी बरसात के बीच लोग ईद के त्योहार के दिन भी काली पट्टियाँ बाँधकर रिहाई मंच के इस आन्दोलन में शामिल हैं, वो बताता है कि इस देश में लोकतंत्र की जड़े बहुत मजबूत हैं। श्री सुराणा ने कहा कि जिस तरह से लू के थपड़ों के बीच शुरू हुये इस आन्दोलन के अस्सी दिन बाद भी सपा सरकार इसकी मांगों को नहीं मान रही है जबकि मै खुद और हमारे पार्टी के वरिष्ठ नेता जस्टिस राजेन्द्र सच्चर ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलकर आरडी निमेष कमीशन रिपोर्ट पर कार्यवाही करने की बात कही थी और अखिलेश यादव ने हामी भी भरी थी। इंसाफ के सवाल पर इस तरह की देरी और प्रदेश सरकार के गैर जिम्मदाराना रवैये की वजह से एक बेगुनाह की हत्या हो जाना यह बताता है कि नीतिगत स्तर पर वंचित तबका जाहे वह मुस्लिम, दलित या फिर आदिवासी हो उसको सरकारें इंसाफ से वंचित ही नही करती हैं बल्कि थकाने व बेबस करने का काम करती हैं। पर जिस मजबूती से रिहाई मंच इस आन्दोलन को चला रहा है हमें यकीन है कि सरकार को एक दिन झुकना पड़ेगा और रिहाई मंच की माँगों को मानना पड़ेगा। रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने धरने को संबोधित करते हुये कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक महत्व का है। आज के ही दिन साम्राज्यवादी अमेरिका ने मानवता के खिलाफ युद्ध को आगे बढ़ाते हुये नागासाकी पर परमाणु बम गिराया था जिसमें कई लाख लोग अपनी जान गँवा बैठे। उन्होंने कहा कि मानवता के खिलाफ समय दर समय शासक वर्ग द्वारा लगातार हमले किये गये हैं। जिस तरह से अमरीका ने द्वितीय विश्व युद्ध में परमाणु बम को अवाम के खिलाफ प्रयोग किया था ठीक उसी तरह आज के दौर में इस मुल्क की सरकार भी एक खास नीति के तहत लोकतंत्र पर संकट पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि इस मुल्क में इस दिन को अग्रेजों के खिलाफ क्रान्ति दिवस के रूप में भारत छोड़ो आन्दोलन के आरम्भ के रूप में याद किया जाता है। मानवता और शांति के त्योहार ईद के दिन आवाम ने जिस तरीकेे से जेलों में बंद बेगुनाहों की रिहाई के लिये दुआएं मांगी और जालिम हुकूमत के खिलाफ काली पट्टी बाँधकर विरोध का इजहार किया। उसने इस रिहाई आन्दोलन के आधार को और मजबूत किया है।   मैग्सैसे पुरस्कार से सम्मानित संदीप पाण्डेय ने कहा कि आज ईद के दिन सड़कों पर सपा नेताओं की बड़ी-बड़ी होर्डिगें आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों और उनके परिजनों के बारे में सोचने को मजबूर कर रही हैं कि जो सपा सरकार बेगुनाहों की रिहाई के वादे से वादा खिलाफी कर युवकों को जेलों में सड़ने को मजबूर कर रही है। वो सपा सरकार और उसके नेता आखिर किस मुँह से बधाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि रामपुर सीआरपीएफ कैंप पर हुआ कथित आतंकी हमला कोई आतंकी हमला न होकर सीआरपीएफ जवानों द्वारा नये वर्ष के जश्न में शराब के नशे में धुत होकर आपस में चलाई गयी गोलियों का नतीजा था। पर उत्तर प्रदेश में हुयी ऐसी तमाम आतंकी घटनाओं पर रिहाई मंच की पुनर्विवेचना की लगातार माँग करता रहा है। पर सरकार नहीं मान रही है और ऐसे में बेगुनाह बच्चों को खुशियों के त्योहार ईद पर जेलों में रहने के लिये मजबूर होना पड़ रहा है। हाजी फहीम सिद्दीकी और सैयद मोईद अहमद ने कहा कि आज पूरे प्रदेश में बेगुनाहों की रिहाई के लिये जिस तरह से दुआयें हुयीं और जिस तरीके से मिल्लत ने काली पट्टी बाँधकर सपा सरकार का विरोध किया उसने यह साफ कर दिया है कि मिल्लत अपने बेगुनाह बच्चों के न्याय के लिये जाग गई है। हाजी फहीम सिद्दीकी ने कहा कि आज लखनऊ ईदगाह में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता रीता बहुगुणा को काला झंडा दिखाना इनकी मुस्लिम विरोधी नीतियों को आईना दिखाने की कोशिश थी कि वो हमारे बच्चों की कभी बाटला हाउस तो कभी खालिद मुजाहिद के रुप में हत्या करवाएंगे और हम खामोश रहेंगे अब ऐसा नहीं होगा। सोशलिस्ट पार्टी के नेता ओंकार सिंह ने कहा कि हमारी पार्टी रिहाई मंच के इस आन्दोलन का हमेशा समर्थन करती रही है। आज के दिन हम जेलों में बंद बेगुनाह बच्चों से इस मंच के माध्यम से कहना चाहेंगे कि कभी निराश न हों क्योंकि हिन्दू-मुस्लिम का भेद मिटाते हुये अवाम की एक बड़ी ताकत उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि आज जिस तरह से इस मंच पर हमारे मुसलमान भाइयों ने ईद के दिन नये कपड़े न पहन कर पुराने कपड़े पहने वो बताता है कि किस तरह से आन्दोलन की नयी संस्कृति का निर्माण हो रहा है और ऐसी आंदोलनकारी संस्कृतियाँ शासक वर्ग के लिये चुनौती बन कर उभरती हैं। इस धरने का संचालन इलाहाबाद से आये अनिल आजमी ने किया। धरने को मौलाना मोहम्मद मियां, रिहाई मंच इलाहाबाद के प्रभारी राघवेन्द्र प्रताप सिंह, लक्ष्मण प्रसाद, भारतीय एकता पार्टी (एम) के सैयद मोईद अहमद, पिछड़ा महासभा के एहसानुल हक मलिक व शिव नारायण कुशवाहा, इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हाजी फहीम सिद्दीकी, एसएफआई के अखिल विकल्प, धर्मेन्द्र यादव, बबलू यादव, अम्बेडकर नेशनल कांग्रेस के फरीद खान, हरेराम मिश्र, प्रबुद्ध गौतम, राधा पाण्डेय, फरुर्खाबाद से आये सामाजिक कार्यकर्ता योगेन्द्र यादव, राजीव यादव सहित अनेक लोगों ने धरने को संबोधित किया।

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।