जनता के खिलाफ तृणमूल सरकार की जंग

पश्चिम बंगाल में 3 अक्टूबर को हुए बिधान नगर नगरनिगम, ग्रेटर आसनसोल कार्पोरेशन और  बाली कार्पोरेशन के चुनाव में, सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने जनतंत्र पर ही चौतरफा हमला बोल दिया। तृणमूल कांग्रेस के बड़े नेताओं की अगुआई में इस पार्टी के गुंडा गिरोहों ने खुल्लमखुल्ला मतदान केंद्रों पर कब्जे किए और फर्जी वोट डाले। बिधाननगर कार्पोरेशन के अंतर्गत साल्ट लेक में चुनाव को पूरी तरह से बेमानी बना दिया गया। यहां बड़ी संख्या में बाहर से लाए गए फर्जी वोटरों को झौंक दिया गया, खुद अपना वोट डालने की कोशिश करने वाले वैध मतदाताओं पर हमले किए गए और चुनाव में इस धांधली की खबर देने वाले पत्रकारों को भी हमलों का निशाना बनाया गया। यहां 13 पत्रकारों का घायल होना दिखाता है कि कैसे भयावह तरीके से इस चुनावी धांधली के मीडिया कवरेज को कुचलने की कोशिश की गयी है। इसी प्रकार आसनसोल में जगह-जगह, मुखौटों के पीछे मुंह छुपाए गुंडों के  बम फैंककर विपक्षी उम्मीदवारों को घायल करने और मतदान केंद्रों पर कब्जा करने के दृश्य देखने को मिले। पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी ने चुनाव का इस तरह मजाक बनाकर रख दिए जाने में साथ दिया और चुनाव के दिन के इन हमलों के संचालक, तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के साथ मिलीभगत कर काम किया।                 चुनाव में धांधली तथा हिंसा के  प्रचंड साक्ष्यों के सामने, राज्य के  चुनाव आयुक्त एस आर उपाध्याय को, 7 अक्टूबर के लिए प्रस्तावित मतगणना स्थगित करने की घोषणा करनी पड़ी। लेकिन, इस घोषणा के कुछ ही घंटों के अंदर-अंदर, तृणमूल सरकार की धमकियों और राज्य सरकार के मंत्रियों समेत तृणमूली नेताओं द्वारा दफ्तर पर धरना दिए जाने के बीच, राज्य चुनाव आयुक्त को यह एलान करना पड़ा कि 8 अक्टूबर को कुछ मतदान केंद्रों में दोबारा मतदान कराया जाएगा और 9 अक्टूबर को गिनती करा दी जाएगी। इस तरह सत्ताधारी पार्टी के सामने घुटने टेेकने के बाद, उपाध्याय ने अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया। यह पूरा प्रकरण इसकी आंखें खोलने वाली मिसाल है कि किस तरह तृणमूल कांग्रेस के राज में संस्थाओं तथा सरकारी मशीनरी को भीतर से खोखला कर के रख दिया गया है।                 बहरहाल, चुनाव का ही अपहरण करने के लिए तृणमूल कांग्रेस द्वारा इस तरह के अद्र्घ-फासी हथकंडों का अपनाया जाना, इस बात की बढ़ती चिंता व इस सचाई के बढ़ते अहसास हो ही दिखाता है कि मौजूदा तृणमूल निजाम के पीछे से जनसमर्थन खिसकता जा रहा है। याद रहे कि उक्त नगरनिगम चुनावों के साथ ही, सिलीगुड़ी महकमा परिषद के तीन-स्तरीय चुनाव भी हुए थे। यहां जबर्दस्त जन-एकता तथा प्रतिरोध के चलते, तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनाव में वैसी धांधली करना संभव नहीं हुआ था और चुनाव शांतिपूर्वक हुआ था। इन चुनावों के नतीजे से राज्य की जनता के वास्तविक मूड का पता चल जाता है। यहां तीनों के स्तर के चुनाव में वाम मोर्चा की जीत हुई है। महकमा परिषद की कुल नौ सीटों में से छ: पर वाम मोर्चा के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज करायी है।                 साफ है कि तीन नगरनिगमों के चुनाव तृणमूल कांग्रेस के लिए खोखली जीत ही साबित हो सकते होंगे। इन चुनावों को जबरन ‘जीतने’ के लिए जनता के खिलाफ ही जंग का एलान कर उसने जनता को अपना असली बदनुमा चेहरा ही दिखाया है। 0 प्रकाश कारात

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