मोदी सरकार आने के बाद से मीडिया को भी संघी विचारधारा का केन्द्र बनाया जा रहा है

नई दिल्ली। वरिष्ठ संस्कृतिकर्मी शम्सुल इस्लाम ने कहा है कि आज देश के अंदर हिन्दू फासीवादी आंदोलन निरंतर मजबूत होता जा रहा है। देश में मोदी सरकार आने के बाद से मीडिया को भी संघी विचारधारा का केन्द्र बनाया जा रहा है। शम्सुल इस्लाम 27 सितम्बर को ‘नागरिक’ पाक्षिक पत्र द्वारा भगत सिंह के जन्म दिवस पर ‘हिन्दू फासीवाद और मीडिया’ विषय पर गांधी शांति प्रतिष्ठान, दिल्ली में आयोजित एक सेमिनार में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एक खास धर्म के खिलाफ जनमानस की चेतना को ढाला जा रहा है। आतंकवादी घटनाओं के बाद एक विशेष धर्म के लोगों के खिलाफ हमला बोला जाता है। वहीं दूसारी तरफ मालेगांव, समझौता एक्सप्रैस जैसी आतंकवादी घटनाओं पर मीडिया चुप रहता है। झाबुआ ब्लास्ट, जिसमें संघ के लोग शामिल हैं, पर भी मीडिया का आंख मूंद लेना उसके पक्ष को स्पष्ट कर देता है।    वरिष्ठ साहित्यकार विष्णु नागर ने अपनी बात रखते हुए कहा कि आज बोलने के हक पर भी हमला बोला जा रहा है। मीडिया, सोशल मीडिया पर तर्कपूर्ण, जनवादी बात या विचार रखने वालों को गाली-गलौंच दी जा रही है। कलबुर्गी, दोभालकर, पानसारे जैसे वैज्ञानिक सोच रखने वाले लोगों की दक्षिणपंथी ताकतों द्वारा हत्या की जा रही है। फिर भी सरकार चुप है। जरूरी हो जाता है कि इन काली ताकतों के खिलाफ एक वैकल्पिक मीडिया को खड़ा का मजबूती के साथ इनका जवाब दिया जाए।    इंकलाबी मजदूर केन्द्र के नगेन्द्र ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा तेजी से आर्थिक नीतियों को आगे बढ़ाया जा रहा है। जिसने मजदूरों, किसानों, युवाओं की जिंदगी को और अधिक नरकीय बनाया है। ऐसे में तबाह-बर्बाद जनता कहीं सत्ता के खिलाफ विरोध न कर दे, इसके लिए जमीनी स्तर पर आम जनता को धर्म के नाम पर बांटा जा रहा है। इस पूरे काम में एकाधिकारी पूंजीपति वर्ग का मीडिया फासिस्टों के साथ खड़ा है। भगत सिंह खुद एक लेखक, पत्रकार और क्रांतिकारी थे और उन्होने अपना पूरा जीवन साम्प्रदायिकता के खिलाफ व देश की आजादी के लिए संघर्ष करते हुए कुर्बान कर दिया। ऐसे में देश में उभर रहे हिन्दू फासीवाद के खिलाफ संघर्ष खड़ा करके ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की जा सकती है।    सेमिनार में पत्रकार व संस्कृतिकर्मी पाणिनी आनंद, प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र की अध्यक्ष शीला शर्मा, मोर्चा पत्रिका से गोपाल, आई. एफ. टी. यू. से मृगांक, कवि व साहित्यकार निलाभ, परिवर्तनकामी छात्र संगठन से दीपक, साहित्यकार विष्णु नागर, समयांतर पत्रिका के संपादक पंकज बिष्ट, प्रो. चमनलाल, इंकलाबी मजदूर केन्द्र से संजय, नवाब खान, मनोज,  नागरिक के प्रतिनिधि कमलेश आदि वक्ताओं ने अपनी बात रखी।    सेमिनार के अंत में हिन्दू फासीवाद के खिलाफ संकल्प, एफ.टी.आई.आई के संघर्षरत छात्रों के समर्थन में, कन्नड़ विद्वान कालबुर्गी की याद में- सम्बन्धित तीन प्रस्ताव भी ध्वनि मत से पारित किए गए। सभा में सभी वक्ताओं ने ‘नागरिक’ के प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य में फासीवाद के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने पर जोर दिया।

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