यूपी में खुद से लड़ती भाजपा, कुछ लोगों को निपटाना है तो नयी सोशल इंजीनियरिंग

हस्तक्षेप
Updated on : 2016-06-03 10:42:12
यूपी में खुद से लड़ती भाजपा कुछ लोगों को निपटाना है तो नयी सोशल इंजीनियरिंग भी करनी है अंबरीश कुमार लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भाजपा सत्तारूढ़ दल से कम खुद से ज्यादा लड़ रही है। कुछ साल पहले तक यह संघर्ष प्रादेशिक था, अब यह राष्ट्रीय हो चुका है। कुछ लोगों को निपटाना है तो नयी सोशल इंजीनियरिंग भी करनी है। एमएलसी और राज्यसभा चुनाव में सीधे दिल्ली के निर्देश पार्टी ने जो फैसले किये उससे नेता कार्यकर्त्ता सभी हैरान हैं। एक पढ़े लिखे बुद्धिजीवी ब्राह्मण नेता को निपटाने के लिए ऐसा बाभन चेहरा लाया गया जिसे चौदह साल पहले हुये चुनाव में दस हजार वोट मिले थे। वे प्रदेश के ब्राह्मणों का वोट पार्टी को दिलायेंगे, समझ सकते हैं किस तरह। एक राजपूत नेता को निपटाने के लिये उनके खिलाफ मोर्चा खोलने वाले नेता को भी टिकट थमा दिया गया। बताते हैं पेपर लीक घोटाले में उनकी बड़ी भूमिका थी। तीसरी भाजपा के समर्थन वाली निर्दलीय उम्मीदवार प्रीति महापात्रा हैं, जिनके नामांकन में भाजपा के दस विधायकों के साथ मुस्लिम राजनीति करने वाले एक नेता का भी नाम शामिल था, जो बाद में हटा लिया गया। ये प्रीति महापात्रा कौन हैं, इस सवाल पर एक विधायक का जवाब था - यह तो हम भी नहीं जानते। बताते हैं मुंबई की हैं, किसी गुजराती उद्यमी परिवार की हैं, पार्टी आलाकमान का हुकुम सर माथे। यह एक बानगी है जिससे इन चुनावों में भाजपा की लोकतांत्रिक चयन प्रक्रिया का अंदाजा लगाया जा सकता है। जो नाराज हुये हैं उनकी क्या भूमिका होगी विधान सभा चुनाव में यह आसानी से समझ सकते हैं। पूर्वांचल में नारा चलता है 'बाबा की माला और रमाकांत का भाला'। बाबा यानी योगी आदित्यनाथ जिनका पूर्वांचल के कई जिलों में असर है। बताते हैं पार्टी के नये ब्राह्मण चेहरा से वे बुरी तरह नाराज हैं। पार्टी के एक नेता ने कहा, जब वे सूर्यप्रताप शाही को निपटा सकते हैं तो इनका क्या होगा। पार्टी कभी नया ब्राह्मण चेहरा सामने ला रही है तो कभी ठाकुर नेता। राजनाथ सिंह तो निशाने पर थे ही अब उनके पुत्र पंकज सिंह का भी विकल्प तलाश लिया गया है। ठीक उसी तरह जैसे ह्रदय नारायण दीक्षित को किनारे कर शिव प्रताप शुक्ल को ब्राह्मण चेहरा बनाया गया। गोरखपुर के एक कार्यकर्त्ता के मुताबिक इनके खिलाफ ऐसा माहौल बना कि एक किन्नर को लोगों ने जीता दिया। इस सब गणित के पीछे संगठन मंत्री सुनील बंसल की प्रतिभा बताई जा रही है। वैसे भी वे अपनी कुछ प्रतिभा के चलते पार्टी में चर्चित रहे हैं। बहरहाल इन चुनाव ने बता दिया है कि पार्टी किस अंदाज में प्रदेश का विधान सभा चुनाव लड़ने जा रही है। इन चेहरों के जरिये तो मुकाबले में आना भी आसान नहीं है। (शुक्रवार)
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