2019:भाजपा सक्रिय, पर विपक्ष निष्क्रिय !

जो लोग चुनाओं में बूथ कार्यकर्ताओं की अहमियत से वाकिफ हैं, वे निश्चय ही देश की राजनीति की दिशा तय करनेवाले उत्तर प्रदेश के एक खास लोकसभा क्षेत्र में हो रहे इस ‘अभिनव प्रयोग’ के लिए भाजपा को दाद देंगे...

अतिथि लेखक

 -एच.एल.दुसाध

कई अख़बारों में इस शीर्षक-‘ 2019 के लिए भाजपा ने शुरू की किलेबंदी’- से छपी यह खबर पढ़कर निश्चय ही उन लोगों की पेशानी पर चिंता की लकीरें और गहरी हो गयी होंगी, जो भाजपा को 2019 में हारते देखना चाहते हैं. अख़बारों में छपा है-’ भारतीय जनता पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर युवाओं की किलेबंदी शुरू कर दी है. युवाओं को पार्टी से जोड़ने के लिए ‘युवा उदघोष ’ कार्यक्रम शुरू किया जायेगा. प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में काशी विद्यापीठ के खेल मैदान में आयोजित होने वाले युवा उदघोष कार्यक्रम में प्रत्येक बूथ से कमसे कम 10 युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए हैं. इस कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह संबोधित करेंगे. भाजपा युवा उदघोष कार्यक्रम में 20 जनवरी को वाराणसी लोकसभा के 1736 बूथों के कार्यकर्ताओं का समागम होगा.प्रत्येक बूथ से कम से कम 10 युवा कार्यकर्त्ता शामिल होंगे.बूथ कार्यकर्ताओं की आयु 17 से 35 वर्ष के बीच होगी. युवा उदघोष में मुख्य अतिथि के तौर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष शाह तथा विशिष्ट अतिथि के तौर पर प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेन्द्रनाथ पाण्डेय, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश प्रभारी ओम प्रकाश माथुर एवं प्रदेश महामंत्री सुनील बंसल उपस्थित होकर युवाओं का मार्गदर्शन करेंगे.

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्रनाथ पाण्डेय ने कहा कि प्रदेश महामंत्री सुनील बंसल एवं काशी क्षेत्र के संगठन मंत्री रत्नाकर द्वारा अभिनव प्रयोग किया गया है, जिसमें वाराणसी लोकसभा के 1736 बूथों पर कार्यकर्ताओं से ऑनलाइन 20 रूपये शुल्क लेकर ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया गया. 17 से 35 वर्ष की आयु के 19 हजार, 130 कार्यकर्ताओं ने रजिस्ट्रेशन करवाया और उनमें से 77 फीसद कार्यकर्ताओं ने भीमएप भी डाउनलोड किया. 19,130 ऑनलाइन रजिस्टर्ड कार्यकर्त्ताओं के पास प्रवेशिका भेजी गयी है, जो फोटो पर्चे पत्र के रूप में भी काम करेगी. डॉ. पाण्डेय ने कहा कि कार्यकर्ताओं को इस संकल्प के साथ जोड़ा गया है कि वह अपने बूथ पर पूर्णनिष्ठां से पार्टी का कार्य करेंगे. यह प्रयोग पूरे प्रदेश में दोहराया जायेगा. उन्होंने विश्वास जताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का मार्गदर्शन हम सभी में 2019 की तैयारियों में जुटने के लिए उर्जा प्रदान करेगा. ‘

जो लोग चुनाओं में बूथ कार्यकर्ताओं की अहमियत से वाकिफ हैं, वे निश्चय ही देश की राजनीति की दिशा तय करनेवाले उत्तर प्रदेश के एक खास लोकसभा क्षेत्र में हो रहे इस ‘अभिनव प्रयोग’ के लिए भाजपा नेतृत्व को दाद देंगे. निश्चय ही वाराणसी के लोकसभा क्षेत्र में 20 जनवरी को हो रहा यह अभिनव प्रयोग आने वाले दिनों में भाजपा न सिर्फ यूपी बल्कि पूरे देश में दोहराएगी.

दरअसल यह अभिनव प्रयोग इस बात का संकेतक है भाजपा 2019 में वापसी के लिए बेहद गंभीर है: प्रधानमत्री, मुख्यमंत्री से लेकर उसके निचले स्तर के कार्यकर्त्ता अभी से 2019 की तैयारियों में जुट गए हैं. भाजपा का घोषित एजेंडा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद है, जिसका मूलमंत्र है डॉ. हेडगेवार द्वारा तैयार हिन्दू धर्म-संस्कृति के उज्जवल पक्ष का जयगान व मुस्लिम विद्वेष का प्रसार है. ध्यान लगाकर कोई भी देखेगा तो पायेगा कि इस काम में भाजपा के सांसद-विधायक –पार्षद सहित उसके मातृसंगठन आरएसएस के भारतीय मजदूर संघ,सेवा भारती,राष्ट्रीय सेविका समिति,अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद,विश्व हिन्दू परिषद,स्वदेशी जागरण मंच,सरस्वती शिशु मंदिर,विद्या भारती,वनवासी कल्याण आश्रम,मुस्लिम राष्ट्रीय मंच,बजरंग दल,अनुसूचित जाति आरक्षण बचाओ परिषद,लघु उद्योग भारती,भारतीय विचार केंद्र,विश्व संवाद केंद्र,राष्ट्रीय सिख संगठन,विवेकानंद केंद्र जैसे आनुषांगिक संगठनों के साथ उसके बेहद समर्पित व ईमानदार 4000 पूर्णकालिक कार्यकर्त्ता, 28 हजार, 500 विद्यामंदिर, 2 लाख,80 हजार आचार्य, 48 लाख,59 हजार छात्र, 83 लाख,18 हजार,348 मजदूर,595 प्रकाशन समूह,1 लाख पूर्व सैनिक,6 लाख,85 हजार वीएचपी-बजरंग दल के सदस्य: सभी ही 2019 को देखते इस काम में पूरी तरह मुस्तैद हो चुके हैं. इनके साथ 56 हजार,859 शाखाओं में कार्यरत 55 लाख, 20 हजार स्वयंसेवक भी हिन्दू-धर्म –संस्कृति के उज्जवल पक्ष तथा अल्पसंख्यक, विशेषकर मुस्लिम विद्वेष के प्रसार में जरा भी पीछे नहीं होंगे, इसका कयास संघ का चाल-चरित्र समझने वाला एक बच्चा भी लगा सकता है.

भाजपा शासित राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, हरियाणा की सरकारों द्वारा पद्मावती फिल्म रोकने में अतरिक्त तत्परता का प्रदर्शन एवं सुप्रीम कोर्ट के निदेश के बावजूद भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा इस फिल्म के प्रदर्शन के प्रति आनाकानी ; हज यात्रा की सब्सिडी का खात्मा किन्तु कैलास मानसरोवर यात्रा की सब्सिडी बरक़रार रखना, संघ के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का ही हिस्सा है, जो 2019 को ध्यान में रखकर ही किया जा रहा है. जहाँ तक प्रधानमंत्री नरेंद्र और भाजपाध्यक्ष अमित शाह का सवाल है, वे 24 घंटे ही चुनावी मोड में ही रहते है, और अपने विपक्षियों की तुलना में कई गुणा मेहनत करते हैं. वे 2019 को ध्यान में रखते हुए ही ‘न्यू इंडिया का विजन’ प्रस्तुत कर रहे हैं; इसी मकसद से उन्होंने पिछड़ा वर्ग आयोग गठित कर दिया है जो पिछड़ा वर्ग की केन्द्रीय सूची की जातियों को तीन उपवर्गों में विभाजित करेगा और तीनों के लिए अलग-अलग आरक्षण तय करेगा. इससे जिस तरह बिहार में दलित–महादलित का विभाजन कर दलितों को परस्पर शत्रु बना दिया गया है, उसी तरह ओबीसी आरक्षण में विभाजन कर पिछड़ों को आपस में लड़ाने के साथ मोदी जैसे व्यक्ति को सामाजिक न्याय का नया मसीहा बनाया जायेगा. और भी ऐसे कई काम गिनाये जा सकते हैं, जो यह बता देंगे कि केंद्र सहित भारत के 19 राज्यों में शासन कर रही भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अभी से युद्ध स्तर पर मिशन-2019 के काम में लग गया है.

भाजपा के विपरीत उसके प्रतिपक्ष पर ध्यान पर ध्यान लगायें. खासकर जिस उत्तर प्रदेश से राजनीति से देश की दिशा तय होती है, वाहना नजर दौड़ाएं तो पता चलेगा यहाँ का मुख्य भाजपाई विपक्ष कुम्भकर्णी निद्रा में सोया है. उसकी इस निद्रा पर 16 जनवरी को मैंने इसी अख़बार में एक विद्वान को उद्धृत करते हुए लिखा था-‘2019 में लोकसभा चुनाव होने हैं.इसे देखते हुए भाजपा विरोधी दलों की निष्क्रियता हैरान करने वाली है. 2019 के लोकसभा चुनाव में यदि नरेंद्र मोदी वापस सत्ता में आते हैं तो यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण होगा और इसके बाद जो कुछ होगा, उसकी कल्पना अभी नहीं की जा सकती. देश का लोकतंत्र खतरे में पड़ सकता है.’

दरअसल मोदी सरकार द्वारा जन्मजात वंचितों ( दलित-आदिवासी-पिछड़ों )के संवैधानिक अधिकारों पर लगातार किये जा रहे कुठाराघात; उनकी कार्पोरेटपरस्त व देश को विदेशियों का गुलाम बनाने जैसी सर्वनाशी नीतियों से त्रस्त होकर देश का बहुसंख्य तबका, पत्रकार व लेखक वर्ग 2019 में मोदी को रोकने के लिए तैयार हो रहा है. पर, चुनाव में तो उसे सीधी चुनौती देंगे पिपक्षी दल. अफ़सोस वही विपक्ष कुम्भकर्णी निद्रा से बाहर नहीं आ रहा है. क्या वह कुछ लोगों की यह बात गांठ बांधकर चुप्प बैठा है कि विपक्ष 2019 की बात भूलकर, 2024 की तैयारियों में जुट जाए!        

लेखक बहुजन डाइवर्सिटी मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. 

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