आधार कार्ड सीधे राजनीतिक उत्पीड़न का अस्त्र बन गया है

मोदी सरकार आम जनता को आधार कार्ड के बहाने उत्पीड़ित कर रही है, संविधान प्रदत्त हकों से वंचित कर रही है। कोई स्कीम राजनीतिक उत्पीड़न-वंचित करने की स्कीम बन जाए तो उसे किसी भी तर्क से नहीं मानना चाहिए...

 

जगदीश्वर चतुर्वेदी

जिनके पास आधारकार्ड नहीं हैं उनको राशन नहीं मिलेगा, वहीं राजस्थान में 38फीसदी जनता के आधारकार्ड वाले अंगुलियों के निशान ही नहीं मिलते। हजारों कुष्ठरोगी हैं जिनके फिंगरप्रिंट नहीं मिलते, मोदी के नियम से ये सब लोग राशन नहीं ले पा रहे हैं।

इस देश का तो भगवान ही मालिक है, संविधान नहीं

आधार कार्ड को सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी योजनाओं के लिए स्वैच्छिक रखने का आदेश दिया है, लेकिन मोदी सरकार तो सुप्रीम कोर्ट को धता बता रही है। जब पीएम ही सुप्रीम कोर्ट का आदेश न माने और सुप्रीम कोर्ट चुपचाप देखता रहे तो इस देश का तो भगवान ही मालिक है, संविधान नहीं। हे ईश्वर, कहां सोए हो।

कांग्रेस और समूचे विपक्ष को गभीरता के साथ आधार कार्ड पर अपने फैसले को पलटना चाहिए।आधार कार्ड खत्म होना चाहिए।

मोदी सरकार आम जनता को आधार कार्ड के बहाने उत्पीड़ित कर रही है, संविधान प्रदत्त हकों से वंचित कर रही है।

आधार कार्ड को लेकर हमने आरंभ में यूपीए शासन के दौरान फेसबुक पर अपनी अनेक शंकाएं प्राइवेसी के संदर्भ में व्यक्त की थीं, लेकिन आज तो आधार कार्ड सीधे राजनीतिक उत्पीड़न का अस्त्र बन गया है।

यदि कोई स्कीम राजनीतिक उत्पीड़न और वंचित करने की स्कीम बन जाए तो उससे किसी भी तर्क से नहीं माना जाना चाहिए।

आधार कार्ड को अनिवार्य करने और मनी बिल के साथ पेश करने के सवाल को सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दी गयी है, इस पर मुख्य न्यायाधीश ने मोदी सरकार के मुँह पर करारा तमाचा दिया है, कहा है- “If the Speaker says colour blue is green. We will tell her that blue is blue and not green,” Chief Justice of India J.S. Khehar.

(फेसबुक टिप्पणियों का समुच्चय)

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