घोर अधर्मी होते हैं साम्प्रदायिक दल और उसके नेता

साम्प्रदायिकता विशुद्ध आधुनिक राजनीतिक विचारधारा है जो कि पावर पॉलिटिक्स के लिए सार्वजनिक जीवन में धर्म के नाजायज इस्तेमाल से चलती है।...

अतिथि लेखक
घोर अधर्मी होते हैं साम्प्रदायिक दल और उसके नेता

साम्प्रदायिकता, सांप्रदायिक सौहार्द और पावर पॉलिटिक्स

Communalism, communal harmony and power politics

आलोक वाजपेयी

साम्प्रदायिकता को समझने के लिए उसका विरोध करने के लिए सर्व धर्म समभाव की बात करना जरूरी तो है लेकिन पर्याप्त नहीं है।

सर्व धर्म समभाव एक सभ्यताजनित सामाजिक अंतर्वस्तु है जबकि साम्प्रदायिकता विशुद्ध आधुनिक राजनीतिक विचारधारा है जो कि पावर पॉलिटिक्स के लिए सार्वजनिक जीवन में धर्म के नाजायज इस्तेमाल से चलती है।

अगर हम साम्प्रदायिकता के उदय और विकास पर ध्यान दें तो पाएंगे कि इसका ठोस वर्गीय आधार है। यानि कि जो दल और नेता साम्प्रदायिक राजनीति करते आए और करते हैं उनके ठोस आर्थिक हित इस राजनीति में छुपे हैं जिन पर वो तमाम मुलम्मे चढ़ाए रहते आए हैं।

साम्प्रदायिक दल और उसके नेता घोर अधर्मी होते हैं। उनके अनुयायी जरूर धार्मिक होते हैं पर वो धर्म का मर्म (implied meaning of religion)नहीं समझ पाते और नेताओं के हाथ में खेल जाते हैं।

सांप्रदायिकता दूर करने के उपाय

Remedies for removing communalism

भारत या दुनिया में कहीं भी आधुनिक भाव बोध को नकार कर कोई प्रगति करना तो दूर प्रगति की बात सोचना भी मूर्खता समान है।

आधुनिक भाव बोध के अनिवार्य बिंदु है जिन्हें छोड़ना समाज के लिए आत्महत्या होगा।

ये हैं-

वैज्ञानिक तर्क पद्धति

सेकुलरिज्म

मानवतावाद

समानता

बंधुत्व

अन्याय के विरुद्ध संघर्ष।

भारत को इस सब के लिए पश्चिम का अंधानुकरण की जरूरत नहीं। भारत एक देश के रूप में सारी दुनिया में इस आधुनिक सोच को अमली जामा पहना कर एक मिसाल कायम कर सकता है।

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